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तुला लग्न और आप: जानिए, तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व

तुला लग्न और आप: जानिए, तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व
तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

तुला लग्न में जन्मे व्यक्ति की आकृति कुछ लंबी व मुख सुंदर होता है तथा इनका कद भी सामान्यतः लंबा होता है, नेत्र ललित व दाँत विरल होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति प्रायः सामान्य काठी अर्थात न बहुत मोटे और न बहुत दुबले होते हैं तथा यदि शुक्र या बृहस्पति लग्न में स्थित हों या लग्न को देखते हैं तो शरीर स्थूल होता है, विचार में तुला लग्न वाले व्यक्ति अव्यवस्थित चित्त तथा अनिश्चित विचार वाले होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों का चरित्र अव्यवस्थित होता है और ऐसे व्यक्ति खर्चीले स्वभाव के होते हैं, इनकी उदारता अत्यंत प्रशंसनीय होती है, तुला लग्न वाले व्यक्ति मिलनसार, सदा दूसरों की सहायता में तत्पर, मित्र बनाने में कुशल, चतुर, धार्मिक, मेधावी, सफाई में रहने वाले तथा घर-द्वार को साफ रखनेवक शौकीन, न्याय प्रिय, सत्यवादी, शांत और प्रफुल्लित चित्त, प्रत्येक कार्य को न्यायपूर्ण तरीके से करने वाले होते हैं किंतु इनकी क्रोधाग्नि बहुत जल्दी प्रज्वलित हो जाती है परंतु उतनी ही शीघ्रता से इनकी क्रोधाग्नि शांत भी हो जाती है, इनके मित्र और संरक्षक बहुत उच्च श्रेणी के प्रतिष्ठित व्यक्ति होते हैं, तुला लग्न वाले व्यक्ति उच्चाधिकारी द्वारा सम्माननीय, विद्वान परंतु भीरु अर्थात डरपोक होते हैं, तुला लग्न वाले व्यक्ति वाणिज्य, न्यायकर्ता तथा पंचायती आदि प्रिय होते हैं और प्रायः इनके दो नाम होते हैं।

 

तुला लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हों तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त अहंकारी, क्रोधी, लालची, बदनाम और कृपण आदि होना ग्रंथकारों ने कहा है किंतु मेरे अनुभव के आधार पर ऐसी महिलाएं सुंदर, रूपवान, सुंदर नेत्र वाली, कमर पतली किंतु पैर मोटा और विलक्षण आकर्षक शक्ति वाली होती हैं यदि इनके चतुर्थ भाव में शुक्र हो तो कार्यस्थल पर इनके संबंध बनने की संभावना रहती है, तुला लग्न वाले व्यक्तियों को कमर, गुर्दा, मूत्रस्थली आदि में समस्या रहती है अतः इन सभी स्थानों को शीत से बचाना इनके लिए लाभप्रद रहता है, शुद्ध जल व स्वच्छ वायु से इन्हें लाभ मिलता है, तुला लग्न वाले व्यक्तियों के लिए शनि अत्यंत शुभ ग्रह अर्थात राजयोगकारक ग्रह होते हैं जो इन्हें भूमि, वाहन, वायुयान यात्रा व संतान का उत्तम सुख प्रदान करते हैं, बुध भी तुला लग्न वालों के लिए उत्तम फल देने वाला ग्रह होता है, यदि कुंडली में बुध और चंद्र या शनि और बुध का संबंध बनता हो तो व्यक्ति को राजयोग तुल्य सुख प्राप्त होता है, मंगल, सूर्य व बृहस्पति इनके लिए अशुभ ग्रह होते हैं किंतु यदि मंगल का शनि या बुध से संबंध बनता हो तो व्यक्ति के वैभव में वृद्धि होती है, सूर्य और बृहस्पति मृत्यु प्रदान करने वाले ग्रह अर्थात प्रवल मारकेश होते हैं, मंगल तुला लग्न वालों को मारकेश होकर भी नही मारता, यदि मेष का नवमांश हो तो व्यक्ति में प्राकृतिक स्वभाव का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

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कन्या लग्न और आप: जानिए, कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व

कन्या लग्न और आप: जानिए, कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व
कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कन्या लग्न में जन्मे व्यक्तियों के मुख की कांति से स्त्रीवर्गीय स्वभाव झलकता है इनके कंधे व बाहु थोड़े छोटे होते हैं तथा किस कार्य को कब और किस प्रकार से करना चाहिए यह कन्या लग्न के व्यक्ति विशेष रूप से जानते हैं, कन्या लग्न में जन्मे व्यक्ति सत्यवादी तथा न्याय प्रिय, दयालु, धैर्यवान और स्नेही होते हैं तथा बुद्धि व युक्ति लगाने में कुशल होते हैं किंतु व्यवहार में किसी दूसरे के सुख-दुःख की उपेक्षा नही करते हैं साथ ही दूसरों से कम लेने में भी नही हिचकिचाते हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्ति किसी कार्य को करने में बड़े सावधान और चौकस रहते हैं तथा बिना विचारे कुछ भी नही करते साथ ही कन्या लग्न वाले व्यक्ति बातों को गुप्त रखने वाले और अपने भाव को दूसरों पर प्रकट नही करने वाले तथा वाणिज्य से जुड़े व्यवसाय में बड़े ही निपुण होते हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्ति मितव्ययी, सहनशील, दयालु, किसी भी कार्य को करने में दक्ष, धीर और साहसी होते हैं तथा अच्छे लोगों की सहायता व संरक्षता प्राप्त करने वाले होते हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्ति अन्य लोगों के पदार्थों और धन को भोगने वाले होते हैं परंतु ऐसे व्यक्ति कभी-कभी स्त्री विलास रसिक और इन्द्रिय लोलुप और विद्वान लोगों से प्रेम करने वाले होते हैं।

 

कन्या लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हो तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त बुद्धिमती, सुशीला, मिलनसार, उदार, धार्मिक और दानशीला होती हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्तियों को अपनी मानसिक अवस्थाओं पर पूर्ण ध्यान रखना चाहिए, उदर जनित रोग से यह प्रायः पीड़ित और दुःखी रहते हैं अतएव उत्तम भोजन करना इनके लिए श्रेयस्कर होता है, सांसारिक बातों में उपद्रव होने से भी इनके स्वास्थ्य पर प्रायः बुरा परिणाम होता है, कन्या लग्न वाले व्यक्तियों के लिए शुक्र और बुध शुभफलदाई होते हैं और इनमें भी शुक्र बेहद शुभ होता है तथा बुध व शुक्र के कुंडली में संबंध बनने पर उत्तम राजयोग के समान फल की प्राप्ति होती है, शनि थोड़े अंशों का हो तो शुभ होता है, यदि केतु व चंद्र की लगन में युति हो तो शुभफलदाई होती है परंतु मारक स्थितियाँ भी उत्पन्न करता है, सूर्य मृत्यु तुल्य कष्ट तो देता है किंतु मृत्यु नही देता, बृहस्पति और चंद्र इनकी कुंडली में शुभ फल नही देते हैं, मंगल, चंद्र और बृहस्पति सहायक (कारक) ग्रह होते हैं, शुक्र भी कभी-कभी मार्केशव्हो जाता है, धनु लग्न का यदि नवमांश हो तो व्यक्ति में प्राकृतिक स्वभाव का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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सिंह लग्न और आप: जानिए, सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व

सिंह लग्न और आप: जानिए, सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व
सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

सिंह लग्न वाले व्यक्तियों के मुख की आकृति चौड़ी और हड्डी पुष्ट होती है, इनकी आँखे सुंदर और भाव प्रकट करने वाली और आकर्षक होती हैं ऐसे व्यक्ति नेत्रों के इशारे से भी अपनी बातें बड़ी सरलता से प्रकट कर लेते हैं तथा इनका जीवन आनंदमयी रहता है, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों पर शत्रुओं कभी हावी नही हो पाते तथा उनको कोई हानि नही पहुँचा पाते, सिंह लग्न वाले व्यक्ति निष्कपट और मनसा, स्पष्टवादी व पवित्रता का पालन करने वाले होते हैं और नीच कर्म से घृणा करते हैं तथा धैर्यवान और उदार होते हैं किंतु किसी के अधीन रहकर कार्य नही कर सकते इन्हें स्वतंत्रता प्रिय होती है, सिंह लग्न वाले व्यक्ति जिस कार्य को करते हैं उसे पूरी ईमानदारी एयर निपुणता के साथ करते हैं साथ ही अपनी मर्यादा के पालन में सर्वदा तत्पर रहते हैं और मित्रता में अटल तथा विश्वास पात्र होते हैं, सिंह लग्न के व्यक्ति केवल दयालु ही नही होते अपितु सत्य की रक्षा के लिए भी सदैव तत्पर रहते हैं तथा दुःख के समय में अपनी सूझ-बूझ को काम में लाकर दुःख का निवारण करने में भी समर्थ होते हैं और शत्रुओं से झगड़ा जल्द नही करते अपितु धैर्य व युक्ति से उनसे मुक्ति पाने हेतु प्रयास भी करते हैं, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों को अपनी मेहनत का पूर्ण फल नही मिल पाता है किंतु समाज में अपने गुणों व व्यवहार के कारण से मान-सम्मान की प्राप्ति इन्हें अवश्य ही मिलती है, सिंह लग्न वाले व्यक्ति अपनी आज्ञा तथा रुचि के अनुसार अन्य मनुष्यों को चलाने में कुशल होते हैं तथा एक अच्छे नेता या राजनेता बनकर देश व समाज का कल्याण करने में भी सक्षम होते हैं, सिंह लग्न के व्यक्ति या तो स्वम् का व्यवसाय करते हैं या किसी उच्च पद पर आसीन रहकर सेवा करते हैं, जीवन के उत्तरार्ध में इन्हें बड़ी सफलता प्राप्त होती है।

 

सिंह लग्न की यदि कोई महिला हों तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त दुबली, पतली, कफ प्रकृति से पीड़ित, झगड़ालू, बचपन में शरीर के गुप्त भागों में वाहनादि द्वारा चोट से ग्रसित तथा तर्क में कुशल होती हैं, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों के दाम्पत्य जीवन में प्रायः उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों को गर्म पदार्थों व मादक पदार्थों का सेवन कभी नही करना चाहिए, उत्तेजना और जल्दबाजी में कार्य करना इनके लिए कष्टप्रद रहता है, प्रायः इन्हें ज्वर आदि की समस्या भी रहती है जिसका सही समय पर औषधि सेवन कर इलाज करना अत्यंत आवश्यक होता है अन्यथा ज्वर की पीड़ा अति कष्टदाई रहती है, सिंह लग्न वालों के लिए मंगल विशेष शुभ ग्रह व राजयोगकारक ग्रह होते हैं, गुरु और मंगल का यदि कुंडली में संबंध बनें तो यह राजयोग समान फल देने वाला होता है, बृहस्पति और शुक्र का संबंध भी इनके लिए शुभ होता है किंतु अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति नही हो पाती है, चन्द्रमा का साधारण फल इन्हें मिलता है जिसके कारण इनके खर्चे अनियंत्रित रहते हैं और इनका मन जल्दी स्थिर नही हो पाता इनके मस्तिष्क में नित्य नए विचार आते रहते हैं, सिंह लग्न वालों के लिए शनि कष्टप्रद और बुध मारकेश होते हैं तथा सूर्य व बुध का संबंध बनाने से कार्य कुशल होते हैं, मंगल और शनि का द्वादश भाव में संबंध बने तो शनि की दशा के अंदर मंगल की अंतर्दशा आने पर इनके वैभव की उन्नति होती है, राहु व केतु यदि मारक भाव में बैठे हों तो अनिष्टकारी अर्थात मृत्युदाई होते हैं, बृहस्पति और शुक्र का संबंध इनके लिए राजयोग नही होता है, यदि सिंह का नवमांश हो तो व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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कर्क लग्न: जानिए, कर्क लग्न वालों का व्यक्तित्व

कर्क लग्न: जानिए, कर्क लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कर्क लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कर्क लग्न में जन्मे व्यक्ति न अधिक लंबे और न अधिक नाटे अर्थात मझोला कद वाले होते हैं इनकी गर्दन मोटी, मुख गोल और शरीर स्थूल अर्थात सामान्यतः मोटा होता है, कर्क लग्न वाले व्यक्ति मिलनसार, आनंद और विलास प्रिय, सुंदर वस्तुओं को चाहने वाले, साफ-सफाई पसंद करने वाले, सत्य प्रिय, उत्तम भोजन की चाह रखने वाले, आभूषण आदि में रुचि रखने वाले, मधुर वाणी से सबको मोहित करने वाले, भ्रमण शील, प्रभावशाली, यशस्वी कर्तव्य परायण और श्रेष्ठ जन अर्थात गुरु तथा धार्मिक पुरुषों के प्रति भक्ति भाव रखने वाले होते हैं, कर्क लग्न वालों प्रायः आडंबर युक्त अर्थात ठाट-बाट वाला रहन-सहन पसंद होता है और यह धार्मिक होते हुए भी कपटी होने में रुचि रखते हैं तथा सिद्धांत रहित होते हैं, कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के जीवन में अस्थिरता बनी ही रहती है कहने का आशय यह है कि कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के जीवन में उतार-चढ़ाव बना ही रहता है तथा यह जितनी तीव्रता से शिखर पर पहुँचते हैं उतनी ही तीव्रता से इनका पतन भी हो जाता है, कर्क लग्न वाले व्यक्तियों का मन अस्थिर रहता है तथा इन्हें सर्दी-जुकाम, कफ, ज्वर, मलेरिया, उदर संबंधित विकार अर्थात पाकस्थली के बिगड़ने से समस्या, अपच आदि की समस्या प्रायः बनी रहती है तथा कर्क लग्न वाले व्यक्ति हर समस्या पर औषधि तुरंत लेना पसंद करते हैं जिसकी अधिक मात्रा से भी इनके उदर के किडनी में समस्या संभव होती है अतः कर्क लग्न वालों को अत्यधिक औषधि की अपेक्षा घरेलू उपचार पर अधिक ध्यान देना चाहिए, कर्क लग्न वाकई व्यक्ति अपने जीवनसाथी व संतानों से अत्यधिक प्रेम करते हैं तथा कभी-कभी इनका प्रेम इतना अधिक होने लगता है कि इनकी संतान व जीवनसाथी को उलझन अनुभव होती है जिस कारण से इनके घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने लगती है, कर्क लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हों तो वह प्रत्येक बात पर टोक लगाने वाली होती है किंतु ऐसी महिला सुंदरी, शीलवती, विश्वसनीय, शांतिमयी, प्रभावशालिनी, अपने स्वजनों से अत्यधिक प्रेम करने वाली, सुखमयी और बहु संतान वाली होती हैं।

 

कर्क लग्न वाले व्यक्ति स्त्री सहवास में समर्थ तथा मिष्ठान प्रिय होते हैं और इनमें कामुकता अधिक रहती है, कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के मन में अपने सगे संबंधियों के प्रति सद्द्भाव रहता है, कर्क लग्न वाले व्यक्ति जिन्हें चाहते हैं उन्ही की बातों को तवज्जो देते हैं तथा जिसकी बात उनको नही पसंद आती है उसकी बात का अनुसरण नही करते हैं और उसके परामर्श को घृणा की दृष्टि से देखते है तथा उन व्यक्तियों पर अविश्वास रखते हैं केवल इतना ही नही अपितु ऐसे व्यक्तियों की संगति का भी परित्याग कर देते हैं, कर्क लग्न वाले व्यक्ति हर विषय की उपयोगिता और मोल का अनुमान उचित रीति से करने में निपुण होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति प्रायः (कुंडली में ग्रहों की स्थिति अनुसार) प्रवासी रहते हैं परंतु गृह में रहने के इच्छुक होते हैं।

 

कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के लिए मंगल सबसे उत्तम फल देने वाला ग्रह होता है जो कि इस कुंडली का राजयोगकारक ग्रह भी होता है और यदि व्यक्ति की कुंडली में मंगल पंचम, नवम या दशम भाव में हो तो यह राजयोग के समान फल देने वाली स्थितियों को निर्मित करता है, बृहस्पति भी कर्क लग्न वालों के लिए शुभ होता है तथा बृहस्पति यदि लग्न या नवम में हो तो बहुत शुभ देता है साथ ही यदि कुंडली में मंगल व गुरु में संबंध बने तो यह स्थिति व्यक्ति को उत्तम राजयोग देती है, शुक्र, शनि व बुध कर्क लग्न वालों के लिए बेहद अशुभ ग्रह होते हैं, सूर्य मारक भाव का स्वामी अर्थात मारकेश होकर भी मृत्यु नही देता है, चंद्रमा लग्नेश होने के नाते शुभ होता है तथा यदि लग्न में गुरु व चंद्र स्थित हों तो व्यक्ति अत्यंत धनी व अनेक प्रकार के सुखों को प्राप्त करने वाला होता है, यदि मेष का नवमांश हो तो व्यक्ति प्राकृतिक स्वभाव को पूर्ण रूप से दिखाता है।

 

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मिथुन लग्न और आप: जानिए, मिथुन लग्न वालों का व्यक्तित्व

मिथुन लग्न और आप: जानिए, मिथुन लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

मिथुन लग्न वालों का व्यक्तित्व
मिथुन लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

मिथुन लग्न के व्यक्तियों के हाथ-पैर लंबे व दुबले और नेत्र सुंदर होते हैं जिनके चेहरे से तीक्ष्णता और प्रसन्नता व्यक्त होती रहती है, ऐसे व्यक्ति कुशाग्र बुद्धि वाले, उत्तम वक्ता, अत्यंत मेहनती, वार्तालाप में कुशल, प्रत्येक बात की छान-बीन करने वाले, सुगमता से समझने वाले, बातों का मर्म व तत्व समझने वाले, कला व कौशल प्रेमी, बहस करने में निपुण व अपने तर्क रखने में कुशल, किसी कार्य में ज्यादा समय तक स्थिर न रहने वाले, कठिन से कठिन विषयों की व्याख्या सुगमता पूर्वक और स्पष्ट रूप से करने वाले, योग्यतापूर्ण लेख लिखने वाले, वाद-विवाद में निपुण, बुद्धिमान, चतुर कार्य कुशल, क्रोधी, कला तथा विज्ञान के प्रति रुचि रखने वाले, असंयमी तथा अधीर होने के कारण अस्वस्थ रहने वाले, कमजोर मनोबल वाले, संबंधियों से सहायता प्राप्त करने वाले व कई भाषाओं के जानकार होते हैं, बात-चीत में मुहावरे व कहावत आदि का प्रयोग करने वाले, कविताएं एवं शायरी करने वाले, गम्भीरता पूर्वक विचार करने वाले, तर्क में चतुर, दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ने वाले और नृत्य व संगीत में आनंद लेने वाले होते हैं।

 

मिथुन लग्न वाले व्यक्ति धनी, दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ने वाले, परिवर्तन पसंद करने वाले, अच्छे व्यापारी, अच्छे ज्योतिषी, अपनी किस्मत स्वम् लिखने वाले, मित्र व संबंधियों की सहायता से भाग्योदय प्राप्त करने वाले, आत्मविश्वास की कमी के कारण चिंताग्रस्त रहने वाले, रोगपीडित, धन लोभी, लड़ाकू, स्त्री सुख भोगी, गुरुजनों के आज्ञापालक, ब्राह्मणों के सेवक, चुगलखोर, परदेश अथवा विदेश से धनार्जन करने वाले, कुटिल स्त्रियों के कारण या मित्रों पर धन व्यय करने वाले, सज्जनता व दुर्जनता दोनो का समन्वय रखने वाले, दांव-पेंच में निपुण, विरोधियों को षड्यंत्र से शांत रखने वाले, सामने से वार न करने वाले, सौंदर्य उपासक, विपरीत लिंग के प्रति विशेष आकर्षण रखने वाले, हमेशा कार्य को 2 प्रकार से करने का प्रयास करने वाले होते हैं तथ इनके मन में विचारों की अस्थिरता रहती है, यदि मिथुन लग्न की कन्या हो तो उपरोक्त फल के अतिरिक्त कठोर बात करने वाली, स्वभाव की कड़ी, अतिव्ययी अर्थात खर्चीले स्वभाव वाली और वायु तथा कफ प्रकृति से पीड़ित रहने वाली होती है, मिथुन लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः फेफड़े व स्नायु रोग की संभावना रावल रहती है अतः इनको उत्तेजना देने वाली क्रियाओं से बचना चाहिए साथ ही समयानुसार स्वम् को बदलना, बातों से पलट जाना इनका विशेष गुड़ होता है।

 

मिथुन लग्न वालों के लिए शुक्र सबसे शुभ ग्रह होता है, चन्द्रमाA, सूर्य व मंगल इनके लिए अशुभ ग्रह रहता है, शुक्र व बुध का संबंध यदि कुंडली में हो तो उत्तम भाग्योदय होता है, शनि व गुरु का संबंध होना अनिष्टकारी रहता है, यदि केतु के दूसरे, सप्तम अथवा द्वादश भाव में चंद्रमा के साथ हो तो केतु की दशा में चंद्र की अंतर्दशा मृत्यु अथवा मृत्यु तुल्य कष्ट अवश्य ही देती है ठीक इसी प्रकार यदि राहु द्वितीय भाव में गुरु के साथ हो तो राहु की दशा में गुरु की अंतर्दशा अनिष्ट करती है किंतु यदि सूर्य और बुध तृतीय भाव में हों तो बुध की दशा में सूर्य की अंतर्दशा शुभ फलदाई होती है, यदि चन्द्रमा द्वितीय स्थान में हो तो शुक्र की दशा में भाग्योन्नति होती है, राहु की दशा में रोग और बन्धनादि का भय रहता है किंतु मृत्यु नही होती है।

 

जय श्री राम।

 

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वृषभ लग्न और आप: जानिए, वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

वृषभ लग्न और आप: जानिए, वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व
वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

वृषभ लग्न वाले व्यक्ति तीव्र इच्छा शक्ति वाले, स्त्रियों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले, प्रकृति प्रेमी, प्रेम में विश्वास रखने वाले, विश्वसनीय, गोल मुख, छोटी गर्दन किंतु मोटी और पुष्ट जंघा वाले होते हैं साथ ही इनके चेहरे पर छोटी सी मुस्कान सदैव ही बनी रहती है, वृषभ लग्न वाले व्यक्ति प्रायः दुबले होते हैं तथा इनके कंधे बलिष्ठ और उन्नत एवं बाहु छोटे एवं गठीले होते हैं, इनके चेहरे से सदैव ही प्रसन्नता का आभास होता है, वृषभ लग्न के व्यक्ति संगीत, मनोहर वस्तु और भ्रमण अर्थात घूमने-फिरने के प्रेमी होते है तथा इनका स्वभाव कुछ चिड़चिड़ा किंतु शांति प्रिय, अत्यंत कामी, धीर, बड़े से बड़े दुःख में भी धैर्य रखने वाले, दयालु, धर्मानुरागी, कलात्मक दृष्टि वाले तथा कलात्मक वस्तुओं का संग्रह करने वाले और प्रत्येक बात में अपना विचार व्यक्त करने वाले होते हैं, दूसरों के परामर्श पर चलना इन्हें नही रास आता, ऐसे व्यक्ति सदाशय, विद्या विवाद में चतुर, भाग्यवान, चतुराई में निपुण, विद्वान, विभिन्न मंत्रों को जानने वाले, देवता व ब्राह्मण भक्त, भौतिक सुखों का इच्छुक, स्वादिष्ट भोजन करने वाले, अधिकांश खाली बैठे रहने वाले किंतु इनको कोई कार्य मिल जाए तो उसे पूर्ण किए बिना न रुकने वाले, शांत चित्त वाले किंतु क्रोध में तहस-नहस कर देने वाले, शत्रु विजयी, जीवन के उत्तरार्ध में बड़ी सफलता प्राप्त करने वाले होते हैं और यदि वृषभ लग्न की स्त्रियां अच्छी पत्नी सिद्ध होती है तथा घर को सुचारू रूप से चलाने में सक्षम और अनुशासित होती हैं।

 

वृषभ लग्न के व्यक्ति चित्त के बड़े गंभीर होते हैं तथा दूसरों को अपने विचार ज्ञात नही होने देते हैं साथ ही वृषभ लग्न के व्यक्ति उतावलेपन में कभी कोई कार्य नही करते हैं तथा शांतिमय जीवन को जीने में विश्वास रखते हैं, इनके मित्रों की संख्या काफी अधिक होती है, वृषभ लग्न वाले व्यक्तियों का भाग्य अचानक से होता है तथा इन्हें भूमि, वाहन व वायुयान यात्रा का उत्तम सुख प्राप्त होता है, वृषभ लग्न के व्यक्तियों का बचपन अनेक यातनाओं व पीड़ाओं से युक्त किंतु उत्तरार्ध में सभी समस्याओं व संकटों पर विजय प्राप्त करते हुए उन्नति व सुख को प्राप्त करते हैं, वृषभ लग्न के व्यक्ति अपने कष्टों को छिपाने में निपुण तथा गृहस्थी का खर्च चलाने हेतु कोल्हू के बैल की भांति दिन-रात कार्य में जुटे रहते हैं साथ ही यदि किसी महिला का वृषभ लग्न हो तो वह बुद्धिमती, विदुषी, सुशीला, विश्वसनीय और कला कौशल को जानने वाली होती है और अपने पुरुष की आज्ञाकारिणी होकर पुरुष पर अपना अधिकार जताने वाली होती है, वृषभ लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः कंठ, गले, छाती, मुख, उदर आदि की समस्या रहती है तथा उत्तेजक भोजन इनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है अतः वृषभ लग्न वाले व्यक्तियों को नित्य व्यायाम व सादे भोजन को करना लाभप्रद रहता है।

 

वृषभ लग्न वालों के लिए शनि बहुत शुभ ग्रह अर्थात राजयोगकारक ग्रह होता है तथा यही शनि 36 वर्ष की आयु के आस-पास कार्यक्षेत्र में कुछ बदलाव के साथ या अत्यंत संघर्ष उपरांत बड़ी उन्नति प्रदान करने वाला ग्रह होता है इसी प्रकार सूर्य भी इनके लिए शुभ ग्रह होता है, मंगल, चंद्र और गुरु इनके लिए अशुभ ग्रह अर्थात मारकेश होते हैं, वृषभ लग्न वालों की कुंडली में यदि सूर्य व बुध या शनि व बुध का संबंध हो तो यह राजयोग समान सुख प्रदान करने वाला योग होता है, यदि नवमांश के पंचम भाव में वृषभ राशि हो तो व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव विशेष रूप से प्रकट होता है।

 

जय श्री राम।

 

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तुला राशि: जानिए, तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

तुला राशि: जानिए, तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

तुला राशि वाले व्यक्ति देवताओं और ब्राह्मणों के भक्त किंतु चंचल स्वभाव और कृश शरीर वाले होते हैं, ऐसे व्यक्तियों का कद सामान्यतः लंबा होता है तथा ऐसे व्यक्ति खरीद-फरोख्त में होशियार, धैर्यवान, इंसाफ पसंद करने वाले तथा प्रायः दो नाम वाले होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्ति घूमने-फिरने के शौकीन होते हैं, इनकी संतान प्रायः कम ही होती है साथ ही तुला राशि वालों का भाग्योदय कुछ विलंब के साथ होता है, तुला राशि वाले व्यक्ति भोगी, धार्मिक, चतुर, बुद्धिमान, कला में कुशल, राजा प्रिय, पितृ सेवी, वस्तुओं का संग्रह करने वाले, विद्वान, धनी, अत्यंत बोलने वाले, मित्रों से युक्त, संगीत, कविता व युद्ध के प्रेमी, सभा-सोसाइटी और कंपनी इत्यादि में रुचि रखने वाले, अपने जीवन के प्रत्येक कार्य में अन्य किसी पर भरोसा रखने वाले, लंबे कद वाले, बलवान, उन्नत नासिका वाले और वायु प्रकृति से पीड़ित होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्तियों को सर, उदर एवं चर्म रोग संभव रहता है साथ ही इन्हें जल भय भी रहता है, तुला राशि वाले व्यक्ति स्त्री के अधीन, बहु स्त्री भोगी अर्थात दो विवाह करने वाले, कृषि करने में चतुर तथा क्रय-विक्रय से लाभ प्राप्त करने वाले होते हैं।

 

तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए १, ३, ५, ६, १५, २५, २६, ३६, ४६ व ५६ वां वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में ज्वर, तृतीय वर्ष में अग्नि भय, वें वर्ष में ज्वर पीड़ा, १५ वें वर्ष में सामान्य पीड़ा और २५ वें वर्ष में अधिक पीड़ा रहती है, यदि चंद्रमा को शुभ ग्रह देखते हैं और आयु सुख को करने वाले अन्य योग न बनते हो और उपर्युक्त बताए गए वर्षों को पार कर लें तो ८५ वर्ष की औसत आयु प्राप्त करते हैं कुछ ग्रंथकारों के अनुसार तुला राशि वाले व्यक्तियों की आयु ६५ वर्ष ११ माह की होती है तथा इन्हें मृत्यु उपरांत ख्याति अवश्य ही मिलती है, तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी तिथि अनिष्टकारी होती है तथा मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि वालों से मित्रता एवं कर्क व सिंह राशि वालों से शत्रुता रहती है, रत्नों में इनके लिए हीरा शुभदायी होता है, वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, अष्टमी तिथि, शुक्रवार व आश्लेषा नक्षत्र और दिन का प्रथम प्रहर इनके लिए अनिष्टकारी होता है।

 

जय श्री राम।

 

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