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Vipareet Raj Yoga: Raj Yoga which gives happiness like a king and rich

Vipareet Raj Yoga
Vipareet Raj Yoga

 

Many yogas have been discussed in astrology, one of them is Vipareet Rajyoga, about which most of the people know, as it is clear from the name that Vipareet Rajyoga means adverse as well as Rajyoga. The person born in this yoga achieves great success through many adverse circumstances and experiences all the pleasures like a king, so let’s know when the Vipareet Raj Yoga is formed and what are some of its important rules?

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Vipareet Raj Yoga is formed from opposite houses in the horoscope. The 3rd, 6th, 8th and 12th houses of the horoscope are called Vipareet houses. When the lords of these houses placed in each other’s house, then Vipareet Rajyoga is formed, but there are some rules for this Rajyoga. In which this yoga shows its full result, there are three types of Vipareet Raj Yoga, Harsh, Saral and Vimal, so let’s know about those rules: –

 

1. When the lord of the sixth house is sutuated in the eighth or twelfth house and has conjuncted with malefic/inauspicious planet or aspecting the lord of the sixth house and the lord of the ascendant aspecting the ascendant, then Harsha Vipareet Rajyoga is formed.

2. When the lord of the 8th house is situated in the 6th or 12th house and conjuncted with malefic/inauspicious planets or aspecting the lord of the 6th house and the lord of the ascendant aspecting the ascendant, Saral Vipareet Rajyoga is formed.

3. When the lord of the twelfth house is situated in the sixth or eighth house and conjuncts with malefic/inauspicious planet or aspects the lord of the sixth house and the lord of the ascendant aspects the ascendant, it creates a Vimal Vipareet Rajyoga.

 

Some important rules of Vipareet Raj Yoga: –

 

Some important rules of Vipareet Raj Yoga
Some important rules of Vipareet Raj Yoga

 

1. If the lord of 3rd, 6th, 8th, 12th house situated in an inauspicious place with auspicious planet or aspected by auspicious planet, then Vipareet Rajyoga is not formed.

2. If Vipareet Rajyoga is being formed but ascendant lord is weak and ascendant lord does not aspect the Ascendant, then Vipareet Rajyoga does not give auspicious results.

3. If a planet is situated in his debilitated sign in the 3rd, 6th or 8th house and the lord of the ascendant aspects the ascendant, then Vipareet Rajyoga is formed.

4. If the lord of 6th, 8th or 12th house is situated in his debilitated sign or is situated in his enemy sign or lord of these house are combust & ascendant lord is aspecting the ascendant, then Vipareet Rajyoga is formed.

5. If the lord of the 6th, 8th and 12th houses aspects the Ascendant while situated in his debilitated sign, and at the same time the lord of the Ascendant aspects the Ascendant, then the Vipareet Rajyoga is formed.

 

A person born in Vipareet Raj Yoga overcomes many types of struggles and adverse circumstances, gets rich and gets happiness like a king, as well as gets good reputation in the society, let’s understand this yoga with some examples of horoscope.

 

Dr. Rajendra Prasad Birth Chart
Dr. Rajendra Prasad Birth Chart

 

In Dr. Rajendra Prasad’s Kundli, the lord of the eighth house situated in the sixth house with Saturn is forming Saral Vipareet Rajyoga and Sun is also aspecting the Moon and the Lord of the Ascendant is aspecting the Ascendant, which is creating a complete Vipareet Rajyog, Dr. Rajendra Prasad remained a very simple hearted person due to the Vipareet Rajyoga and became the President twice.

 

Queen Victoria Birth Chart
Queen Victoria Birth Chart

 

In Queen Victoria’s Kundli, the 8th lord Jupiter is situated in his debilitated sign and is aspecting the Ascendant (see important rule no. 4) and forming Vipareet Rajyoga, as a result of which Victoria became queen at the age of 13 and ruled for 56 years…

 

Let’s try to understand Vipareet Rajyoga with another horoscope:-

 

Indira Gandhi Birth Chart
Indira Gandhi Birth Chart

 

In this horoscope, Saturn, the eighth lord, is situated in his enemy sign in the ascendant and Jupiter, the owner of the sixth house, is in his enemy sign in the benefic position, as well as Moon being the lord of the ascendant, is aspecting the ascendant, which shows the Vipareet Rajyoga. This is the horoscope of Indira Gandhi. There is no need of Introduction, the meaning of explanation is this, that if the lord of the ascendant is strong, then only the full result of Vipareet Rajyoga is achieved.

Jai Shri Ram.

Astrologer:- Pooshark Jetly
Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)
Email:- astrologerpoosharkjetly@astrologysutras.com, pooshark@astrologysutras.com, info@astrologysutras.com
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विपरीत राजयोग: धनवान व राजा के समान सुख देने वाला राजयोग

ज्योतिष में बहुत से योग पर चर्चा करी गयी है उनमें से एक विपरीत राजयोग भी है जिसके बारे में अधिकतर लोग जानते हैं जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि विपरीत राजयोग अर्थात विपरीत भी है और राजयोग भी है इस योग में जन्मा व्यक्ति अनेक विपरीत परिस्थितियों से होते हुए बड़ी सफलता प्राप्त करते हैं व राजा के समान सभी सुखों का अनुभव करते हैं तो चलिए जानते हैं विपरीत राजयोग कब बनता है और उसके कुछ महत्वपूर्ण नियम क्या है?

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विपरीत राज योग कुंडली के विपरीत भावों से बनते हैं कुंडली के ३, ६, ८ व १२ भावों को विपरीत भाव कहा गया है जब इन भावों के स्वामी एक-दूसरे के भाव में बैठें तो विपरीत राजयोग बनता है लेकिन इस राजयोग के कुछ नियम हैं जिनमे ही यह योग अपना पूर्ण फल दिखाता है विपरीत राज योग तीन प्रकार हर्ष, सरल और विमल होते हैं तो चलिए जानते हैं उन नियमों के बारे में:-

१. षष्ठ भाव का मालिक जब अष्टम या द्वादश भाव में बैठे हो और पाप/अशुभ ग्रह के साथ युति किए हों या षष्ठ भाव के मालिक को देखते हों साथ ही लग्नेश लग्न को देखते हों तो हर्ष विपरीत राजयोग होता है।

२. अष्टम भाव का स्वामी जब षष्ठ और द्वादश भाव में बैठा हो और पाप/अशुभ ग्रह के साथ युति किए हों या षष्ठ भाव के मालिक को देखते हों साथ ही लग्नेश लग्न को देखते हों तो सरल विपरीत राजयोग होता है।

३. द्वादश भाव का स्वामी जब षष्ठ या अष्टम भाव में बैठें हों और पाप/अशुभ ग्रह के साथ युति किए हों या षष्ठ भाव के मालिक को देखते हों साथ ही लग्नेश लग्न को देखते हों तो यह विमल विपरीत राजयोग बनाता है।

विपरीत राजयोग कुछ महत्वपूर्ण नियम:-

 

विपरीत राजयोग के कुछ महत्वपूर्ण नियम
विपरीत राजयोग के कुछ महत्वपूर्ण नियम

 

१. यदि ३, ६, ८, १२ स्थान के मालिक अशुभ स्थान में शुभ ग्रह के साथ बैठे या शुभ ग्रह की दृष्टि उन पर हो तो विपरीत राजयोग नही बनता।

२. यदि विपरीत राजयोग बन रहा हो लेकिन लग्नेश कमजोर हो और लग्नेश की लग्न पर दृष्टि न हो तो विपरीत राजयोग के शुभ फल नही होते है।

३. ३, ६ या ८ भाव में कोई ग्रह नीच राशि में बैठे हों और लग्नेश लग्न को देखते हैं तो विपरीत राजयोग बनता है।

४. ६, ८ या १२ भावों के स्वामी नीच राशि में बैठे हों या शत्रु राशि में बैठे हों या अस्त हों और लग्न को देखते हों तो विपरीत राजयोग बनता है।

५. ६, ८ व १२ भाव के मालिक यदि अपनी नीच राशि में बैठकर लग्न को देखते हों साथ ही लग्नेश लग्न को देखते हों तो विपरीत राजयोग बनता है।

विपरीत राजयोग में जन्मा व्यक्ति अनेक प्रकार के संघर्षों व विपरीत परिस्थितियों को पार करते हैं धनवान व राजा के समान सुख प्राप्त करता है साथ ही समाज में अच्छी मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करता है, चलिए इस योग को कुछ उदाहरण कुंडली से समझते हैं।

 

डॉ० राजेन्द्र प्रसाद जी लग्न कुंडली
डॉ० राजेन्द्र प्रसाद जी लग्न कुंडली

 

डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी की कुंडली में अष्टम भाव के मालिक ग्रह षष्ठ स्थान में शनि के साथ बैठकर सरल विपरीत राजयोग बना रहा है और सूर्य की दृष्टि भी चंद्रमा पर है एवं लग्नेश गुरु की दृष्टि लग्न पर है जो कि पूर्ण विपरीत राजयोग बना रहे है सरल विपरीत राजयोग होने के कारण से डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद बहुत सरल हिर्दय के व्यक्ति रहे और 2 बार राष्ट्रपति बने।

 

क्वीन विक्टोरिया लग्न कुंडली
क्वीन विक्टोरिया लग्न कुंडली

 

Queen Victoria जी की कुंडली में अष्टमेश गुरु भाग्य स्थान पर नीच राशि में बैठकर लग्न को देख रहे हैं (महत्वपूर्ण नियम संख्या ४ देखें) और विपरीत राजयोग बना रहे हैं जिसके फलस्वरूप विक्टोरिया जी १३ वर्ष की उम्र में महारानी बनी और ५६ वर्षों तक शासन किया।

 

चलिए एक और कुंडली से विपरीत राजयोग को समझने का प्रयास करते हैं:-

 

इंदिरा गाँधी लग्न कुंडली
इंदिरा गाँधी लग्न कुंडली

 

इस कुंडली में अष्टमेश शनि लग्न में शत्रु राशि में बैठे हैं और षष्ठ स्थान के मालिक गुरु लाभ स्थान पर शत्रु राशि में हैं साथ ही चंद्रमा लग्नेश बनकर लग्न को देख रहे हैं जो कि विपरीत राजयोग को दर्शाता है यह इंदिरा गांधी जी की कुंडली है परिचय की आवश्यकता नही, समझाने का मतलब यह है कि यदि लग्नेश बली हो तभी विपरीत राजयोग का पूर्ण फल मिलता है।

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly
Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)
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विक्रम संवत्त 2079: जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव भाग:-१ Astrology Sutras

विक्रम संवत्त २०७९ का वार्षिक राशिफ़ल
विक्रम संवत्त २०७९ का वार्षिक राशिफ़ल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार विक्रम संवत्त २०७९ की शुरुवात में राहु वृषभ और केतु वृश्चिक राशि से गोचर करेंगे, ९ अप्रैल २०२२ की मध्य रात्रि ४:३१ पर राहु मेष राशि (कृत्तिका १ चरण) और केतु तुला राशि (विशाखा ३ चरण) में प्रवेश करेंगे तथा वर्ष पर्यन्त इन्ही राशि में रहेंगे साथ ही देव गुरु बृहस्पति वर्ष के आरंभ में कुंभ राशि से गोचर करेंगे जो कि ९ अप्रैल २०२२ को दिन के ८:२१ पर मीन राशि (पूर्वाभाद्रपद ४ चरण) में प्रवेश करेंगे और वर्ष पर्यन्त मीन राशि से गोचर करेंगे तो चलिए जानते हैं कि विक्रम संवत्त २०७९ विभिन्न राशियों के लिए कैसा रहेगा।

भाग:-१

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए यह वर्ष उन्नति कारक रहेगा, लंबी दूरी की यात्राएं संभव रहेंगी, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, मेष राशि वाले व्यक्तियों की इस वर्ष लोकप्रियता के साथ चिंताएं भी बढ़ने के योग रहेंगे, पित्त विकार या संधिवात से परेशानी संभव रहेगी, घर-परिवार में सामंजस्य बना रहेगा, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें व महिलाओं पर अधिक विश्वास करने से बचें, राज-समाज में मान सम्मान बढेगा, कारोबारी गतिविधियाँ अच्छे ढंग से चलती रहेंगी, कुटुंब में चले आ रहे तनाव कम होंगे, बड़े व्यवसायियों के मध्य मेल-जोल से नए व्यवसाय के मार्ग प्रशस्त होंगे, विद्यार्थियों के लिए अध्यन क्षेत्र में अभिरुचि कम होगी, दामपत्य जीवन में तालमेल बना रहेगा, नौकरी पेशा लोगों के लिए यह वर्ष थोड़ा संघर्ष पूर्ण रह सकता है, सितंबर मास के आस-पास गृहस्थी में खुशी रहेगी, गृहस्थ जीवन के लिए प्रतीक्षा कर रहे लोगों को शुभ समाचार प्राप्त होने की संभावना रहेगी किंतु मित्रों से धन की हानि संभव रहेगी, अक्टूबर मास में कोर्ट-कचहरी के मुकदमों से व्यथा संभव है, हिंदी मास के १, ३, ८, ११ मास कष्टदायक रह सकते हैं।

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा स्वास्थ्य संबंधित सावधानियां रखें, परिवार में धार्मिक कार्य संपन्न होंगे, भाई-बहन से सहयोग प्राप्त होगा, नवीन संपत्ति खरीदने के योग बनेंगे, माता-पिता का सहयोग प्राप्त होगा, विद्यार्थी वर्ग का पढ़ाई के प्रति रुझान बढ़ेगा, संतान पक्ष से भावनात्मक लगाव बनेगा, अदालत के मामलों में धीमी गति से प्रगति होगी, वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा, नौकरी पेशा लोगों की स्थिति में सुधार होगा, राजनीतिक क्षेत्र में मतभेद बढ़ेंगे, मन कुछ अशांत एवं बोझिल बना रहेगा, सरकारी कार्य पूर्ण होने से आगे का मार्ग प्रशस्त होगा, घर का वातावरण सुखद बना रहेगा, शेयर बाजार का व्यवसाय करने वालों को इस वर्ष अच्छा मुनाफा होगा, बढ़ती जिम्मेदारियों को संभालने में आप समय के साथ सक्षम होते जाएंगे, देश-विदेश से शुभ समाचार प्राप्त होंगे, हिंदी मास के २,५, १० मास कष्टप्रद रह सकते हैं।

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों पर शनि की ढैया का प्रभाव रहेगा, कुछ कठिन परिश्रम से संघर्ष के बाद सफलता प्राप्त होगी, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें, वर्ष के मध्य में लंबी दूरी की यात्रा पर जाने के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र की परेशानी के कारण से मानसिक परेशानी बढ़ने की संभावना रहेगी, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, भाई-बहनों के साथ सहयोगात्मक व्यवहार बनास रहेगा, भूमि-मकान-वाहन के क्रय-विक्रय के लिए लाभकारक स्थितियाँ बनेंगी, विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता रहेगी, वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के मध्य वैचारिक मतभेद बने रह सकते हैं, धार्मिक कार्यों से लाभ होगा, पड़ोसी के व्यवहार से अनंदाभूति का अनुभव होगा, कानूनी विवाद को मध्यस्थता से सुलझाने की कोशिश करें, नए कार्य में सावधानी बरतें, अकस्माक लाभ प्राप्त होने के योग बनेंगे, हिंदी मास के ४, ८, १२ मास कष्टप्रद रह सकते हैं।

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कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए यह वर्ष उत्तम रहेगा, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, धन लाभ में आने वाली परेशानियाँ कम होंगी, इष्ट मित्रों से सहयोग प्राप्त होगा, भौतिक सुख-साधनों पर अधिक खर्च होगा, घरेलू समस्याओं का समाधान होगा, माता-पिता के साथ अच्छे संबंध स्थापित होंगे, प्रतिष्ठित लोगों से मुलाकात होने की संभावना रहेगी, विद्यार्थियों के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा, शिक्षा के प्रति मन में जिज्ञासा उत्पन्न होगी, संतान पक्ष के साथ सामान्य मतभेद हो सकते हैं, कोर्ट-कचहरी वाले मामलों में समाधान प्राप्त होगा, वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी अपने दायित्वों के प्रति उदासीन न रहकर सकारात्मक विचार धारा मन में बैठाने का प्रयास करें, नौकरी पेशा लोगों के लिए यह उत्तम समय रहेगा, इच्छित वस्तु का सुख प्राप्त होगा, साझे काम से लाभ मिलेगा, सेहत पर मौसम का प्रभाव पड़ने से स्वास्थ्य में उतार चढ़ाव संभव रहेगा, परदेश से शुभ समाचार की प्राप्ति संभव है, बनते-बिगड़ते परिवेश से नए आयाम मिलेंगे, दीर्घकालीन विवाद सुलझने के योग बनेंगे, हिंदी मास के २, ३, ९ मास कष्टप्रद रह सकते हैं।

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए यह वर्ष उन्नतिकारक रहेगा, घर-परिवार में कही का वातावरण बनेगा, रुका हुआ धन प्राप्त हो सकता है, विदेश से लाभ होगा, आर्थिक उन्नति के लिए प्रयासरत रहें, संगीत, गायन, चित्रकला आदि मनोरंजन के साधनों में रुचि बढ़ेगी, भाई-बहनों का पारस्परिक सौहार्द बना रहेगा, नवीन संपत्तियों के क्रय-विक्रय करने के लिए अच्छी स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, विद्यार्थियों के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा, प्रेमियों में एक-दूसरे के मध्य सामंजस्य बना रहेगा, संतान की उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे, दामपत्य सुख में वृद्धि होगी, विरोधी पक्ष का दबाब कम होगा, धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे, व्यवसाय में उन्नति व नौकरी पेशा लोगों की पदोन्नति होने के योग बनेंगे, पुराने रोग-ऋणादि से छुटकारा मिल सकता है, मित्रों के साथ यात्रा का अवसर प्राप्त होने के योग बनेंगे, असफलता को परिश्रम से सफलता में बदलने में सफल होंगे, योजना पूर्ति में मदद मिलेगी, वाहनादि का सुख प्राप्त होगा, हिंदी मास के ३, ६, ११ मास कष्टप्रद रह सकते हैं।

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए यह वर्ष शांतिकारक रहेगा, अच्छे उद्देश्य हेतु किए गए प्रयासों में सफलता प्राप्त होगी, शल्य चिकित्सा के योग बनेंगे अतः स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, जीवन साथी के स्वास्थ्य में भी उतार-चढ़ाव संभव रहेगा, विवादपूर्ण माहौल से दूरी बनाकर रखें, विद्यार्थियों को कुछ कठिन परिश्रम से सफलता प्राप्त होने के योग हैं, संतान पक्ष से थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता रहेगी, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होगी, दाम्पत्य जीवन में प्रेम बना रहेगा, भूमि-मकान आदि खरीदने के योग बनेंगे, भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, माता-पिता का स्वास्थ्य कुछ बाधायुक्त रह सकता है, उदर जनित समस्याएं रह सकती हैं अतः अत्यधिक मिर्च-मसाले वाले व्यंजनों से सावधानी बरतें, व्यवसायियों के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा, अपने बल-पौरुष द्वारा परिस्थितियों पर काबू पाने का प्रयास करें, नए संपर्क से लाभ होगा, मई माह के आस-पास रुका हुआ धन प्राप्त होने के योग बनेंगे, योजनाएं राजनीतिक सहयोग से पूर्ण होंगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, मन में नए विचारों का उदय होगा, चौराग्नि भय व्याप्त रहेगा, अकास्मिक लाभ के योग बनेंगे, पड़ोसियों के साथ संबंधों में सुधार होगा, आशा पर निराशा हावी हो सकती है अतः खुद को मजबूत बनाकर अपने प्रयासों में कमी न आने दें, राज-समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी, यात्राओं के योग बनेंगे, विरोधियों के कुचक्र रचना से बचें, जनवरी २०२३ के आस-पास बिगड़े काम बनने की पूर्ण आशा रहेगी, हिंदी मास के २, ४, ९ मास कष्टप्रद रह सकते हैं।

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly
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चैत्र नवरात्रि 2022: जानें घट स्थापना शुभ मुहर्त व पूजन विधि

चैत्र नवरात्रि 2022
चैत्र नवरात्रि 2022

 

शक्ति की अधिष्ठात्री माता जगदंबा की आराधना का विशेष पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा माना गया है धर्म शास्त्रों के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी इस वर्ष चैत्र नवरात्र २ अप्रैल से शुरू हो रहा है जो कि पूरे ९ दिन चलेगा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक की अवधि शक्ति की अधिष्ठात्री माँ जगदंबा की साधना-आराधना को समर्पित रहेगा इसे शास्त्रों में वासंतिक या चैत्र नवरात्र कहा गया है।

महानिशा पूजन:-

 

महानिशा पूजन
महानिशा पूजन

 

महानिशा पूजन सप्तमी युक्त अष्टमी में करने का विधान है निशीथ व्यापिनी अष्टमी योग ८ अप्रैल की रात्रि को मिल रहा है जिसमें महानिशा पूजन आदि किया जाएगा, महाअष्टमी व्रत ९ अप्रैल को रखा जाएगा वहीं चैत्र शुक्ल नवमी १० अप्रैल की रात्रि १२ बजकर ०८ मिनट तक है इस दिन महानवमी व श्री रामनवमी के व्रत के साथ दोपहर में श्री राम का प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा, नवरात्रि का होम आदि १० अप्रैल को किया जाएगा व नवरात्र व्रत का पारण ११ अप्रैल को किया जाएगा।

आगमन व प्रस्थान विधान:-

 

आगमन व प्रस्थान विधान
आगमन व प्रस्थान विधान

 

शास्त्रों में कहा गया है:-

 

“शशिसूर्ये गजारुढ़ा, शनिभौमे तुरंगमे।”
“गुरौ शुक्रे च डोलायाम, बुधे नौका प्रकीर्तिता।।”

 

अर्थात नवरात्र के प्रथम दिन रविवार या सोमवार हो तो माता हाथी पर सवार होकर आती हैं, यदि प्रथम दिन शनिवार या मंगलवार हो तो माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं, प्रथम दिन गुरुवार या शुक्रवार हो तो माता पालकी से आती हैं, प्रथम दिन बुधवार हो तो माता नौका पर सवार होकर आती हैं तथा इसी प्रकार माता का गमन रविवार व सोमवार को भैंसा पर, मंगलवार व शनिवार को मुर्गा पर, बुधवार व शुक्रवार को हाथी पर और गुरुवार को मानव कंधे पर होता है।

घट स्थापना वेला:-

 

घट स्थापना बेला
घट स्थापना बेला

 

घट स्थापना के लिए प्रातः वेला शुभ मानी गयी है ०२ अप्रैल २०२२ को घट्यादि ०६|१७ दिन (०८:२२) से वैधृति योग आ रहा है, वैधृति योग में नवरात्रारम्भ का निषेध है अतः कलश स्थापना पूजन प्रातः ०८:२२ के पूर्व या अभिजिन्मुहूर्त्त (दिन ११:३५ से १२:२५) में किया जा सकता है।

श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया था देवी माँ की आराधना का निर्देश:-

 

 

आत्मा की शक्ति को देवी कहते हैं समस्त भूत, भौतिक जगत को प्रकाशित करने वाली चेतना शक्ति ही पराम्बा भगवती दुर्गा हैं वैसे तो इनकी उपासना हर दिन होती है और त्रिदेव जगत की रक्षा हेतु इनकी आराधना करते हैं, महाभारत युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए स्वम् भगवान श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को देवी माता पराम्बा की उपासना का निर्देश दिया था, वासंतिक नवरात्र शास्त्रों में वर्णित है, नौ रात्रियों का समूह होने से इसे नवरात्र कहा जाता है।

पूजन विधि:-

 

पूजन विधि
पूजन विधि

 

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि विशेष पर प्रातः नित्य कर्मादि-स्नानादि कर हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प, जल लेकर संकल्पित होकर ब्रह्मा जी का आवहान करना चाहिए आगमन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेध, ताम्बूल, नमस्कार पुष्पांजलि व प्रार्थना आदि उपचारों से पूजन करना चाहिए, नवीन पंचांग से नव वर्ष के राजा, मंत्री, सेनाध्यक्ष, धनाधीप, दुर्गाधीप, संवत्सर निवास और फलाधीप आदि का फल श्रवण, निवास स्थान को ध्वजा, पताका व तोरण आदि से सुशोभित करना चाहिए।

जय श्री राम।
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विक्रम संवत् २०७९ का सम्वत्सर फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार इस वर्ष के प्रारंभ में “राक्षस” नामक संवत्सर रहेगा, वैशाख कृष्ण १३ गुरुवार दिनांक २८ अप्रैल २०२२ को २५|२९ इष्ट (दिन ३:४५) पर “नल” नामक संवत्सर का प्रवेश होगा किंतु वर्ष पर्यन्त संकल्पादि में “राक्षस” संवत्सर का ही विनियोग करना चाहिए, इस वर्ष के राजा “शनि” तथा मंत्री “गुरु” हैं, राजा तथा मंत्री में परस्पर समभाव है परंतु इस वर्ष राजा शनि है इसलिए प्रजा को कई प्रकार के कष्टों से गुजरना पड़ सकता है, जगल्लग्न के विचार से लग्नेश बुध, सूर्य व राहु के साथ हैं अतः प्रजा के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं बनेंगी, अमेरिका को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, गुरु पर शनि की दृष्टि से विमान दुर्घटना या भयंकर प्राकृतिक प्रकोप से हानि होगी, शनि व मंगल का द्विदादश योग विश्व के कुछ राष्ट्रों में किसी विषय को लेकर स्थिति उग्र रूप धारण कर सकती है मित्र देशों में भी राजनयिक संबंध अकस्मात बिगड़ सकते हैं ऐसी स्थिति में राष्ट्रों के ध्रुवीकरण की प्रवृत्ति जोर पकड़ेगी।

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ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वर्ष लग्न के विचार लग्नेश नीच राशि में है और शनि की दृष्टि होने से यह ग्रह स्थिति विश्व में अघटित घटना चक्र का आभास कराएगी और किसी राष्ट्र विशेष में भूकम्प, जलप्लव आदि प्राकृतिक प्रकोप से जन-धन की हानि होगी, यूरोपीय देशों की ग्रह स्थिति से पश्चिम जर्मनी, फ्रांस, इटली, रोम, स्प्रेन, ब्रिटेन, आयरलैंड में कहीं भूकम्प आदि प्राकृतिक प्रकोप होगा, मुस्लिम राष्ट्रों में आंतरिक संघर्ष से सत्ता परिवर्तन के योग हैं, नव वर्ष प्रवेश में भारत की प्रभाव राशि मकर है लेकिन वृश्चिक लग्न में नव वर्ष का उदय होने से पश्चिमी प्रांत विशेष में कहीं ९ मास तक दुर्भिक्ष की स्थिति बनी रहेगी, उत्तर में विपरीत जलवायु के कारण फसलें प्रभावित होंगी, सोना-चांदी धातु में महँगाई अधिक बढ़ेगी, लोगों में विविध प्रकार के रोगों की व्याप्ति अधिक होगी, चोरी-डकैती, लूटमार एवं भ्रष्टाचार की वारदातें अधिक घटित होंगी।

 

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार आर्द्राप्रवेशाङ्ग के विचार से आर्द्रा प्रवेश कुंडली में धनु लग्न है, लग्नेश गुरु सुख भाव में जलराशि में हैं एवं चंद्र भी जल राशि में है भारत के पश्चिमी एवं पूर्वी भागों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश, हरियाणा व पंजाब आदि के अधिक क्षेत्रों में गर्मी का तापमान अधिक रहेगा व भीषण गर्मी पड़ेगी, पश्चिमी-पूर्वी भारत में मानसून की वर्षा तय समय पर होगी तो कहीं दुर्भिक्ष सूखा पड़ेगा इसलिए समाज व सरकार को सावधान रहने की आवश्यकता है, जलीय ग्रह शुक्र स्वराशि होकर बुध के साथ हैं अतः कहीं भूस्खलन आदि प्राकृतिक प्रकोप से हानि होगी, शारदधान्य एवं ग्रैष्मिकधान्य के विचार से शरद ऋतु की फसलें पर्याप्त होंगी, ग्रीष्मकाल की फसलों में प्राकृतिक प्रकोप से हानि संभव है।

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