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वक्री शनि 27 मई 2021 जानें विभिन्न राशियों पर वक्री शनि के फल

वक्री शनि 27 मई 2021 जानें विभिन्न राशियों पर वक्री शनि के फल

 

शनि के वक्री अवस्था में गोचर से विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
शनि के वक्री अवस्था में गोचर से विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

 

“ऋषिकेश पंचांग (काशी) अनुसारकर्म व न्याय के देवता शनि 27 मई 2021 गुरुवार को दिन के ०७:०९ पर मकर राशिश्रवण नक्षत्र के द्वितीय चरण में वक्री हो जाएंगे तथा 29 सितंबर 2021 को रात्रि के ०१:२६ पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मार्गी हो जाएंगे, शनि न्याय, नियम, कर्मादि के ग्रह हैं जिनके वक्री होने से विभिन्न राशियों पर भिन्न-भिन्न प्रभाव पड़ेगा तो चलिए जानते हैं विभिन्न राशियों पर वक्री शनि के गोचर से क्या प्रभाव पड़ेगा।

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए शनि दशम व एकादश भाव के स्वामी होकर दशम भाव से ही वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः इस दौरान कार्यक्षेत्र में कुछ अड़चनें आ सकती है, कार्यक्षेत्र में मन लगाकर दैनिक नियमों का पालन करते हुए कार्य करें, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, सामाजिक कार्यों को पूर्ण निष्ठा से करें, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे जो कि अनिष्टकारी सिद्ध होंगी अतः यात्राओं को टालने का प्रयास करें, विद्यार्थियों के लिए यह समय काफी अच्छा रहने वाला है, नियमों का पालन करें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए शनि नवम व दशम भाव के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर भाग्य स्थान से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे शनि विरक्ति का ग्रह है अतः इस दौरान धर्म-कर्म के क्षेत्र में मन में भटकाव रहेगा अतः पूजा-पाठ व जप-तप-दान आदि पूर्णतया नियम से करें, मन को एकाग्र करने हेतु कुछ देर ध्यान करें, कार्यक्षेत्र के लिए शनि का वक्री अवस्था से गोचर शुभफलदाई रहेगा, दाम्पत्य जीवन में चले आ रहे विवाद खत्म होंगे, यदि आप पहले से घर लेने का सोच रहे हैं तो यह समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए शनि अष्टम व नवम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः सेहत का विशेष ख्याल रखें, कुछ देर ध्यान करें जिससे मन शांत रहेगा, भोजन आदि का विशेष ख्याल रखें, पशु-वाहन व हथियार से सावधानी बरतें, छोटे भाई-बहन व मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, कार्यक्षेत्र के लिहाज से शनि का वक्री अवस्था में गोचर मिला-जुला फल देगा, धर्म-कर्म व भाग्य में वृद्धि होगी, आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी जिस कारण से कुछ तनाव रह सकता है अतः तनाव लेने से बचें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए शनि सप्तम व अष्टम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे जिस कारण से दाम्पत्य जीवन में कलह-क्लेश की स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है अतः जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, दाम्पत्य जीवन की मर्यादाओं का पालन करें, इस दौरान आपको जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होता रहेगा, पैतृक संपत्ति प्राप्त होने या अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, यदि आप किसी नए कार्य का आरंभ करना चाहते हैं तो आपके लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए शनि षष्ठ व सप्तम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे जिस कारण से आप जीवनसाथी के वशीभूत हो सकते हैं कहने का आशय यह है कि इस दौरान आपके जीवनसाथी आप पर हावी होने का प्रयास करेंगे, यदि आपके कोर्ट-कचहरी में कोई मुकदमा चल रहा है तो यह समय आपके लिए अशुभ रहने वाला है, स्वास्थ्य के लिहाज से आपके लिए यह अच्छा समय रहेगा, जो लोग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं उनको अत्यधिक प्रयास करना चाहिए क्योंकि आपका इसी समय के प्रयासों का आपको निकट भविष्य में शुभ फल की प्राप्ति कराएगा, पैतृक संपत्ति मिलने के योग है।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए शनि पंचम व षष्ठ भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे जिस कारण से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे व्यक्तियों को और अधिक अत्यधिक प्रयास करना चाहिए क्योंकि आपका इसी समय के प्रयासों का आपको निकट भविष्य में शुभ फल की प्राप्ति कराएगा, प्रेमयों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन अप्रसन्न रहेगा, स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सचेत रहें विशेषतः उदर संबंधित जैसे अपच आदि की समस्या हो सकती है, खान-पान का विशेष ख्याल रखें, व्यय में वृद्धि होने के कारण से आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव रहने के योग हैं, विद्यार्थियों के लिए यह समय बहुत ही शुभ रहने वाला है।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए शनि चतुर्थ व पंचम के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर चतुर्थ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे साथ ही लग्न को अपनी उच्च राशि तुला में देखने के कारण से यह समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, किसी संपत्ति को क्रय करने का विचार बना रहे हैं तो इस समय में खरीदना आपके लिए शुभ रहेगा, पारिवारिक निर्णयों को लेते वक्त थोड़ा सतर्क रहें, माता-पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए इस समय बेहद शुभ रहेगा, आय वृद्धि के योग बनेंगे।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि तृतीय व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः यह समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा स्थान परिवर्तन व नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, यदि आप कोई संपत्ति खरीदना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए शुभ रहेगा, आय में वृद्धि होगी, कार्यक्षेत्र में बदलाव संभव रहेगा, स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, शनि के मार्गी अवस्था में पुनः आने पर ही कार्यक्षेत्र में बदलाव करना शुभ रहेगा, छोटे भाई-बहन का ख्याल रखें, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वाले व्यक्तियों के लिए शनि द्वितीय व तृतीय भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः यह वक्री गोचर काल आपके लिए शुभ रहेगा नए मित्र बनेंगे व नए मित्रों से लाभ भी होगा, भाग्य का पूर्ण सहयोग आपको प्राप्त होगा, आय के साथ व्यय में भी वृद्धि होगी, आध्यात्मिक उन्नति के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र में बदलाव करने का सोच रहे हैं तो शनि के मार्गी होने तक रुक जाएं।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए शनि प्रथम तथा द्वितीय भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः इस वक्री गोचर काल आपको सेहत का विशेष ख्याल रखना चाहिए, दैनिक दिनचर्या का पालन करें, मिर्च-मसले वाले व्यंजनों से परहेज करें, कार्यक्षेत्र में अत्यधिक परिश्रम करने पर बड़ी सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे, अहंकार करने से बचें, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें अन्यथा दाम्पत्य जीवन में कलह-क्लेश की स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, पैतृक संपत्ति मिलने के योग बनेंगे।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए शमी प्रथम व द्वादश भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे कारण वश व्यय में वृद्धि होगी, दान (सरसों तेल व काली उर्द) करें लाभ होगा, धर्म-कर्म से मन हटेगा अतः धर्म-कर्म के प्रति समर्पित रहें, आध्यात्म की ओर झुकाव रहेगा, स्वास्थ्य में पहले से बेहतर अनुभव करेंगे किंतु स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, कार्यक्षेत्र में बदलाव संभव है।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए शनि एकादश व द्वादश भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी, आपका धन आपके कार्य की वृद्धि में व्यय हो सकता है, मान-सम्मान व ख्याति में वृद्धि होगी, स्थान परिवर्तन करना बेहद शुभ रहेगा, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें, मन एकाग्र करने हेतु कुछ देर ध्यान करें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह वक्री गोचर काल बेहद शुभ रहेगा, विद्यार्थियों के लिए यह समय मिला-जुला रहेगा, संतान को कष्ट संभव है, संतान को समझने का प्रयास करें अन्यथा तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

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विक्रम संवत २०७८ के मासिक शिवरात्रि व्रत व पूजन विधि

विक्रम संवत २०७८ के मासिक शिवरात्रि व्रत व पूजन विधि

 

विक्रम संवत २०७८ के मासिक शिवरात्रि व्रत
विक्रम संवत २०७८ के मासिक शिवरात्रि व्रत

 

प्रति मास कृष्ण पक्षीय निशीथ काल व्यापिनी चतुर्दशी के दिन मासिक शिवरात्रि व्रत किया जाता है समाज में फाल्गुन तथा श्रावण मास पूजा विशेष प्रचलित है “ईशान संहिता” के अनुसार फाल्गुन मास में ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव हुआ था:-

 

शिवलिङ्गतयोद्भूतः कोटि सूर्य समप्रभः।

 

इसलिए उसे महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है जनश्रुतियों के अनुसार श्रावण मास में शिव जी ने संसार की रक्षा हेतु विषपान किया था और विष की विकलता में इधर-उधर भागने लगे तब सभी ने विष की गर्मी से बचाने हेतु शिव जी का गंगाजल से रुद्राभिषेक किया था तभी से गंगाजल द्वारा रुद्राभिषेक की परंपरा शुरू हुई थी, गंगाजल से शिव अभिषेक आराधना में सर्वोत्तम माना जाता है गंगाजल के अतिरिक्त रत्नोदक, इक्षुरस (गन्ने का रस), दुग्ध, पंचामृत (दूध, दहीं, घी, चीनी, शहद) आदि अनेक द्रव्यों से किया जाता है।

 

वृहद् धर्मपुरण अ. ५७ में तो यहाँ तक लिखा है कि शिवलिङ्ग में सभी देवताओं का पूजन करें:-

 

शिवलिङ्गSपि सर्वेषां देवानां पूजनं भवेत्।

सर्वलोक मये यस्याच्छिव शक्तिविर्भु: प्रभु:।।

 

पंचाक्षर मन्त्र:- “नमः शिवाय”

षडाक्षर मंत्र:- “ॐ नमः शिवाय”

 

मासशिवरात्रि व्रत

 

मासिक शिवरात्रि व्रत तारीखें
मासिक शिवरात्रि व्रत तारीखें

 

१. वैशाख ९ मई २०२१ (रविवार)

२. ज्येष्ठ ८ जून २०२१ (मंगलवार)

३. आषाढ़ ८ जुलाई २०२१ (गुरुवार)

४.श्रावण (विशेष) ६ अगस्त २०२१ (शुक्रवार)

५. भाद्रपद ५ सितंबर २०२१ (रविवार)

६. आश्विन ४ अक्टूबर २०२१ (सोमवार)

७. कार्तिक २ नवंबर २०२१ (मंगलवार)

८. मार्गशीर्ष २ दिसंबर २०२१ (गुरुवार)

९. पौष १ जनवरी २०२२ (शनिवार)

१०. माघ ३० जनवरी २०२२ (रविवार)

११.फाल्गुन महाशिवरात्रि (विशेष)१ मार्च २०२२ (मंगलवार)

१२. चैत्र ३० मार्च २०२२ (बुधवार)

 

शिवरात्रि पूजन विधि:-

 

शिवरात्रि व्रत व पूजन विधि
शिवरात्रि व्रत व पूजन विधि

 

सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्नानादि कर के भगवान शिव का जलाभिषेक व पंचामृत स्नान करना चाहिए तदोपरांत चंदन, भस्म, रोली, जौं, काला तिल, अक्षत शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए तथा जनेऊ, बड़ी सुपाड़ी, वस्त्र, इत्र, गुलाब के पुष्प, विल्वपत्र, दूर्वा, भांग व धतूरा अर्पित करना चाहिए उसके बाद नैवेध अर्पित कर शिव जी का पूजन करना चाहिए और आरती कर पूजा संपन्न करनी चाहिए, अभीष्ट लाभ हेतु रुद्राभिषेक, रुद्रार्चन कर सकते हैं।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

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राहु और शनि से बनने वाला अशुभ योग: जानिए कौन सा है यह अशुभ योग व उसके फल और उपाय

राहु और शनि से बनने वाला अशुभ योग: जानिए कौन सा है यह अशुभ योग व उसके फल और उपाय

 

शनि व राहु से बनने वाला पिशाच योग
शनि व राहु से बनने वाला पिशाच योग

 

शनि और राहु इन दोनों को वैदिक ज्योतिष में पाप ग्रह की श्रेणी में रखा गया है जब यह दो ग्रह आपस में संबंध बनाते हैं तो पिशाच नामक योग बनता है अब प्रश्न यह उठता है कि किस प्रकार से शनि व राहु संबंध बनाएं तो यह योग बनता है उससे पूर्व हमारे लिए यह जानना आवश्यक है कि आखिर शनि व राहु से ही क्यों पिशाच योग बनता है व पिशाच योग का क्या अर्थ है इसके लिए हमें पहले शनि व राहु को समझना होगा शनि व राहु रात्रि बली होते हैं शनि का वर्ण श्याम है और शनि अंधेरे का ग्रह है और राहु एक माया अर्थात जादू है जब भी शनि और राहु के बीच संबंध बनता है तो एक नकारात्मक शक्ति का सृजन होता है जिसे पराशरी ज्योतिष में “पिशाच योग” की संज्ञा प्राप्त है।

 

राहु व शनि के चार प्रकार से संबंध बनने पर व्यक्ति को पिशाच योग का फल प्राप्त होता है वह इस प्रकार है:-

 

१. शनि व राहु एक साथ युति कर के किसी भी भाव में स्थित हों।

 

२. शनि व राहु एक दूसरे को परस्पर देखतें हों।

 

३. शनि की राहु या राहु की शनि पर दृष्टि हो।

 

४. गोचर वश जब शनि जन्म के राहु या राहु जन्म के शनि पर से गोचर करता हो।

 

इन चार प्रकार के शनि व राहु के मध्य संबंध बनने पर पिशाच योग बनता है अब प्रश्न यह उठता है कि इस पिशाच योग के क्या होते हैं तो चलिए मैं विभिन्न भावों में बनने वाले पिशाच योग के फल को बताता हूँ:-

 

पिशाच योग
पिशाच योग

 

१. यदि लग्न में शनि व राहु की युति हो तो ऐसे व्यक्ति के ऊपर तांत्रिक क्रियाओं का अधिक प्रभाव रहता है तथा ऐसे व्यक्ति हमेशा चिंतित रहते हैं और इनके मस्तिष्क में नकारात्मक विचार सबसे पहले आते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों को कोई न कोई रोग निरंतर बना रहता है।

 

२. यदि द्वितीय भाव में शनि व राहु की युति हो तो व्यक्ति के घर वाले ही उसके शत्रु रहते हैं तथा इनको हर कार्य में बाधाओं का सामना करना पड़ता है और इनकी वाणी में कुछ दोष रहता है साथ ही धन संचय में कठिनाई व जुए-सट्टे आदि में धन हानि होती है तथा ऐसे व्यक्ति नशीले पदार्थों या तामसिक पदार्थों या दोनों का सेवन करते हैं।

 

३. यदि तृतीय भाव में शनि व राहु की युति हो तो ऐसे व्यक्ति अधिकतर भ्रमित रहते हैं व ऐसे व्यक्तियों का छोटा भाई नही होता या छोटे भाई को किसी प्रकार कोई कष्ट रहता है कहने का आशय यह है कि तृतीय भाव का पिशाच योग छोटे भाई के सुख की हानि करता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को समय-समय पर भारी उतार-चढ़ाव के समय से गुजरना पड़ता है साथ ही यदि पंचमेश पर भी शनि या राहु की या दोनों की दृष्टि हो या युति हो तो ऐसे व्यक्तियों को संतान नही होती या होकर मर जाती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों को संतान सुख नही प्राप्त होता है।

 

४. यदि चतुर्थ भाव में शनि व राहु की युति हो तो यह और भी खराब स्थिति होती है क्योंकि चतुर्थ भाव भूमि, मकान, माता व सुख का भाव होता है अतः ऐसी स्थिति में व्यक्तियों को माता का पूर्ण सुख नही मिल पाता तथा इनके घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव रहता है प्रायः ऐसे व्यक्तियों के घर में वास्तु दोष अवश्य ही रहता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को मकान का सुख भी मुश्किल से ही प्राप्त होता है क्योंकि शनि निर्माण का कारक होता है और राहु माया, भ्रम व बाधाओं का कारक होता है ऐसे व्यक्ति जब भी किसी मकान का निर्माण आरंभ करवाते है तो उनके परिवार में रोग, व्याधि व पीड़ा प्रायः बनी रहती है या ऐसे व्यक्तियों को बड़ा आर्थिक नुकसान सहन करना पड़ता है।

 

५. यदि पंचम भाव में शनि व राहु की युति हो तो व्यक्ति के मस्तिष्क में नकारात्मक विचार आते रहते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों की शिक्षा भी कठिन परिस्थितियों से होते हए पूर्ण होती है व बड़े भाई-बहन को किसी प्रकार का कष्ट रहता है तथा ऐसे व्यक्तियों की संतान को कष्ट रहता है और यदि पंचमेश का भी शनि व राहु या दोनों में से किसी एक से भी संबंध बनता हो तो ऐसे व्यक्तियों की संतान हीन अर्थात देह के किसी भाग में दुर्बलता लिए हुए होती है या होकर मर जाती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों को संतान सुख नही प्राप्त होता है।

 

६. यदि षष्ठ भाव में शनि व राहु की युति हो तो ऐसे व्यक्तियों के छुपे हुए शत्रु अधिक होते हैं षष्ठ भाव से रोग, रिपु और ऋण का विचार करते हैं अतः ऐसे व्यक्तियों की बीमारी का रहस्य जल्दी ज्ञात नही हो पाता और किसी जुए व सट्टे में हारने या नशे के कारण से धन हानि व ऋण की वृद्धि होती है ऐसे व्यक्तियों को हिर्दय घात होने या अन्य किसी प्रकार की दिल की बीमारी, रक्त जनित विकार, एक्सीडेंट से देह के किसी भाग में कमजोरी की संभावना रहती है और मामा पक्ष से विवाद बना रहता है।

 

७. यदि सप्तम भाव में शनि व राहु की युति हो तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है क्योंकि सप्तम भाव से रोजगार, जीवनसाथी, दाम्पत्य जीवन, मित्र, साझेदारी आदि का विचार किया है अतः इस भाव में शनि व राहु की युति होने पर व्यक्ति को अपने मित्रों व साझेदारियों से धोखा मिलने की संभावना रहती है तथा किसी दूसरे व्यक्ति के कारण से घर के वातावरण में कलह का माहौल बना रहता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को किसी महिला के कारण से अपमानजनक स्थितियों का भी सामना करना पड़ता है और रोजगार के मार्ग में अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करते हुए धैर्य व संयम रखते हुए सफलता प्राप्त होती है।

 

८. अष्टम भाव से ससुराल, आयु, मृत्यु, पुरातत्व, रहस्मई कार्य, गूढ़ विद्या, जीवनसाथी की वाणी आदि का विचार किया जाता है अतः ऐसे स्थिति में अष्टम भाव में यदि शनि व राहु की युति हो तो व्यक्ति के दाम्पत्य जीवन में कलह की स्थितियाँ प्रायः बनी रहती है ध्यान देने योग्य बात यह है वहाँ बैठे इन दोनों ग्रह की सप्तम दृष्टि द्वितीय भाव जो आपका कुटुंब व वाणी का भाव है पर दृष्टि होती है अतः ऐसे व्यक्तियों का दाम्पत्य जीवन न्यून होता और यदि सप्तमेश अर्थात सप्तम भाव का स्वामी भी इनसे संबंध बनाता हो या त्रिक भाव में बैठा हो तो ऐसी स्थिति में दाम्पत्य जीवन को बचाना और भी मुश्किल हो जाता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को जीवन में कई बार शल्य चिकित्सा भी करानी पड़ सकती है तथा ऐसे व्यक्तियों को उदर व मूत्र विकार भी रहता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों की आयुष्य पर भी अनेक बार संकट आते हैं व ऐसे व्यक्तियों के अनैतिक संबंध बनने की भी संभावना रहती है।

 

९. यदि नवम भाव में शनि व राहु की युति हो तो ऐसा व्यक्ति धर्म के विपरीत आचरण करने वाला होता है तथा ऐसे व्यक्तियों के भाग्य में निरंतर उतार-चढ़ाव आते रहते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों के पिता को भी किसी प्रकार का कष्ट रहता है किंतु यदि भाग्येश की दृष्टि नवम भाव पर हो तो व्यक्ति को कड़े संघर्ष उपरांत सफलता प्राप्त होती है।

 

१०. यदि दशम भाव में शनि व राहु की युति हो तो व्यक्ति के घरेलू सुख में कुछ कमी व माता-पिता को कष्ट रहता है तथा ऐसे व्यक्तियों के कारोबार में निरंतर उतार-चढ़ाव आते रहते हैं साथ ही किसी राजा या उच्चाधिकारी से दंड भी प्राप्त होने की संभावना रहती है।

 

११. एकादश भाव को लाभ भाव भी कहा जाता है ज्योतिष का एक सर्वमान्य नियम है कि एकादश भाव में क्रूर से क्रूर ग्रह भी शुभ फल प्रदान करते है क्योंकि एकादश भाव का दूसरा नाम ही लाभ भाव है इस स्थिति में यदि शनि व राहु की युति एकादश भाव में हो तो व्यक्ति को जुए-सट्टे व किसी गलत कार्य द्वारा धन की प्राप्ति होती है किंतु ऐसे व्यक्तियों के भाई-बहन को किसी प्रकार का कष्ट अवश्य ही रहता है तथा ऐसे व्यक्तियों को संतान का पूर्ण सुख नही प्राप्त हो पाता है।

 

१२. द्वादश भाव में यदि शनि व राहु की युति हो तो व्यक्ति के अनैतिक संबंध बनने की अधिक संभावना रहती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों के गृहस्थ सुख में कुछ कमी रहती है तथा ऐसे व्यक्तियों को जीवन में कई बार धोखा मिलता है तथा किसी असाध्य रोग से पीड़ा होती है।

 

नोट:-

 

१. शनि व राहु की युति के अतिरिक्त उपरोक्त बताए गए अन्य प्रकार से संबंध बनाने पर भी प्राप्त होते हैं।

 

२. यदि शनि व राहु की युति या प्रतियुति (शनि से सप्तम भाव में राहु या राहु से सप्तम भाव में शनि हो) शनि की मकर या कुंभ राशि में हो तो स्थितियाँ धैर्य के साथ अत्यधिक प्रयास करने पर नियंत्रण में आ जाती है।

 

३. कुंडली के प्रथम अर्थात लग्न से सप्तम तक के भाव रात्रि बली होते हैं अतः इन भावों में शनि व राहु का संबंध बनना अत्यधिक कष्टदाई होता है।

 

मैंने द्वादश भावों में पिशाच योग बनने के फल को विस्तार से बताया है अब प्रश्न यह उठता है कि इस दोष के क्या उपाय होते हैं तो सर्वप्रथम मैं यहाँ यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि किसी भी प्रकार के दोष का उपाय पूर्ण विधि व शास्त्रोचित तरह से करने पर ही लाभ मिलता है अतः मैं यहाँ कुछ उपाय बता रहा हूँ जिन्हें करने से निश्चय ही लाभ प्राप्त होगा:-

 

१. दुर्गा सप्तशती का विधि पूर्वक पाठ व दशांश कराने से पिशाच योग के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है।

 

२. नित्य संकटमोचन हनुमाष्टक व सुंदरकांड का पाठ करने से पिशाच योग के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है।

३. शनि व राहु के हवनात्मक जप से भी पिशाच योग के दुष्प्रभाव में कमी आती है।

 

४. नित्य शनि स्तोत्र का पाठ करने व अमावस्या के दिन सूर्यास्त के समय बहते पानी में नारियल प्रवाहित करने से भी पिशाच योग के दुष्प्रभाव में कमी आती है।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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सितंबर 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

सितंबर 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न कुंडली

 

मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए सितंबर 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरूवात में मंगल का लग्न से गोचर रूचक नामक पंचमहापुरुष योग बनाएगा जिस पर गुरु की दृष्टि भी रहेगी फलस्वरूप स्वास्थ्य में सुधार होगा, खुद को ऊर्जावान अनुभव करेंगे, नई चुनातियों का सामना करना पड़ सकता है व इन चुनौतियों पर विजय प्राप्त करते हुए उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, क्रोध पर नियंत्रण रखें, 10 सितंबर को मंगल वक्री हो जाएंगे अतः स्वास्थ्य में कुछ परेशानियाँ अनुभव होगी, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है जिस कारण से मन अप्रसन्न रहेगा, जीवनसाथी से क्षणिक विवाद संभव रहेगा, माह के शुरुवात में सूर्य व बुध का पंचम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, संतान का सहयोग प्राप्त होगा किंतु संतान के स्वास्थ्य में कुछ परेशानियाँ संभव रहेगी, 2 सितंबर को बुध गोचर बदलकर आपके छठे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर बुद्धि व विवेक द्वारा विजय प्राप्त होगी, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त होने के योग बनेंगे, 16 सितंबर को सूर्य भी गोचर बदलकर आपकी कुंडली के छठे भाव में आ जाएंगे अतः सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, ज्वर, सर दर्द, नेत्रों में जलन/दर्द की समस्या रह सकती है, 22 सितंबर को बुध पुनः गोचर बदलकर आपकी कुंडली के सप्तम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, जिनका कार्य बैंकिंग व फाइनेंस से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा, माह के शुरुवात में शुक्र का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा अतः घर में किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, सीनियर आपके कार्य से खुश रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, यदि आप अपने प्रेमी/प्रेमिका को प्रपोज करना चाहते हैं तो 14, 19, 20 व 21 सितंबर का दिन आपके लिए शुभ रहेगा।

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर शश नामक योग बनाएगा अतः मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यदि आपका फाइनेंस से जुड़ा हुआ कार्य है तो यह माह आपके लिए अच्छा रहेगा, शेयर बाजार में पैसा लगाने से बचें, माह के शुरूवात में गुरु व केतु का गोचर नवम भाव से रहेगा फलस्वरूप आध्यत्म की ओर झुकाव बड़ेगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह माह अच्छा सिद्ध होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए है उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, 23 सितंबर को राहु व केतु गोचर बदलकर क्रमशः दूसरे व अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें अन्यथा बनते हुए कार्य बिगड़ सकते हैं, वाहन सावधानी से चलाएं, तामसिक चीजों से परहेज करें, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, 25 सितंबर को अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 14 सितंबर को परिवार वालों के साथ अच्छा समय बीतेगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, 19 से 21 सितंबर का समय भी आपके लिए अच्छा रहेगा, किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे व नजदीकियाँ बढ़ेंगी, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा।

 

Mesh rashi
मेष राशिफल

 

कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए सितंबर 2020 सामान्य रहेगा जिसमें किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है 10 सितंबर के बाद स्वास्थ्य का ख्याल रखें व क्रोध और वाणी पर नियंत्रण रखें, दामपत्य जीवन अधिकांश ठीक रहेगा, वाहन सावधानी से चलाएं, माह की 3, 4, 5, 17, 18, 21, 22 व 23 तिथियाँ अधिक शुभ नही है अतः इस दौरान कोई भी रिस्क लेने से बचें, मेरे अनुसार मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सूर्य को जल दें व सुंदरकांड का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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जून 2020: वृश्चिक लग्न व वृश्चिक राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

जून 2020: वृश्चिक लग्न व वृश्चिक राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

वृश्चिक लग्न
वृश्चिक लग्न कुंडली

 

वृश्चिक लग्न व वृश्चिक राशि वालों के लिए जून 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य व शुक्र का गोचर आपके सप्तम भाव से रहेगा फलस्वरूप जीवनसाथी से क्षणिक विवाद संभव रहेगा, कार्यक्षेत्र पर लोगों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, व्यापारियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, यदि आप कोई नया कार्य करना चाहते हैं तो जीवनसाथी को पार्टनर बना कर करें लाभ होगा, वाहन सावधानी से चलाएं, शुक्र के वक्री रहने के कारण से कार्यक्षेत्र में कुछ तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, यदि आप विवाह योग्य हो गए हैं तो विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, 14 जून को सूर्य गोचर बदलकर आपके अष्टम भाव में आ जाएंगे अतः पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, जीवनसाथी की वाणी में तेजी अनुभव होगी, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, माह के शुरुवात में बुध व राहु का गोचर अष्टम भाव में रहेगा और 14 जून से सूर्य भी अष्टम भाव से ही गोचर करेंगे अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है अतः तनाव लेने से बचें, पेट, गले व मुख से संबंधित कोई समस्या भी रह सकती है, 18 जून को बुध वक्री हो जाएंगे अतः कोई भी निर्णय सोच-समझकर ही लें, मामा पक्ष से विवाद संभव रहेगा, दवाईयों पर या फिजूल की चीजों पर धन व्यय होगा, यदि आपकी बड़ी बहन हैं तो उनसे व अपनी बुआ से व्यर्थ विवाद में न पड़ें।

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

माह के शुरुवात में मंगल का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा अतः घर में खुशियों का माहौल रहेगा, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, अविवाहित लोगों के लिए रिश्ते की बात कहीं चल सकती है, धन लाभ के योग बनेंगे, 18 जून को मंगल गोचर बदलकर आपके पंचम भाव में चले जाएंगे फलस्वरूप विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, नवदम्पत्तियों को लिए संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, संतान की उन्नति होगी, यात्राओं के योग बनेंगे, तामसिक चीजों से परहेज करें, माह के शुरुवात में शनि व गुरु की तीसरे भाव में युति नीचभंग राजयोग बनाएगी तथा दोनों ही ग्रह वक्री रहेंगे अतः छोटे भाई-बहन से संबंध मधुर होंगे व उनका सहयोग भी प्राप्त होगा, तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा फिर भी भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना पड़ेगा, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, 30 जून को गुरु गोचर बदलकर आपके दूसरे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप धन लाभ के योग बनेंगे (विस्तृत फल जुलाई गोचरफल में लिखूँगा), 21 जून को सूर्यग्रहण आपके लिए अधिक शुभ नही रहेगा अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें, 1 व  2 जून आपके लिए अच्छा रहेगा जो लोग अपने प्रेमी/प्रेमिका से अपने प्रेम का इजहार करना चाहते हैं उनके लिए यह अच्छा समय रहेगा, विद्यार्थियों के लिए भी यह अच्छा समय रहेगा, मन में नए विचार आएंगे, 3 से 7 जून का समय स्वास्थ्य के लिहाज से अच्छा नही है अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है अतः तनाव लेने से बचें, कार्यस्थल पर भी तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, सीनियर से व्यर्थ विवाद करने से बचें, 8 से 13 जून का समय शुभ रहेगा जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, नौकरीपेशा लोगों के लिए भी यह अच्छा समय रहेगा, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त हो सकती है, 14 से 18 जून तक यदि संभव हो सके तो यात्राओं को टालने का प्रयास करें, अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है अतः लोगों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, 19 से 30 जून तक का समय आपके लिए शुभ रहेगा आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, नौकरीपेशा लोगों के लिए भी यह अच्छा समय रहेगा, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, धन लाभ के योग बनेंगे।

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

कुल मिलाकर वृश्चिक लग्न व वृश्चिक राशि वालों के लिए जून 2020 सामान्य रहेगा जिसमें तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, घर का वातावरण मिला-जुला रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, संतान की उन्नति होगी, विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, किसी के साथ व्यर्थ विवाद में न पड़ें, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, धन लाभ के योग बनेंगे, नवदंपत्तियों के विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, माह की  3 से 7, 14 से 18 व 21 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदिवृश्चिक लग्न व वृश्चिक राशिवाले व्यक्ति यदि नित्य सूर्य को जल दें व अदित्यहिर्दय स्तोत्र का पाठ करें व संकटमोचन हनुमाष्टक का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

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