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तुला राशि: जानिए, तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

तुला राशि: जानिए, तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

तुला राशि वाले व्यक्ति देवताओं और ब्राह्मणों के भक्त किंतु चंचल स्वभाव और कृश शरीर वाले होते हैं, ऐसे व्यक्तियों का कद सामान्यतः लंबा होता है तथा ऐसे व्यक्ति खरीद-फरोख्त में होशियार, धैर्यवान, इंसाफ पसंद करने वाले तथा प्रायः दो नाम वाले होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्ति घूमने-फिरने के शौकीन होते हैं, इनकी संतान प्रायः कम ही होती है साथ ही तुला राशि वालों का भाग्योदय कुछ विलंब के साथ होता है, तुला राशि वाले व्यक्ति भोगी, धार्मिक, चतुर, बुद्धिमान, कला में कुशल, राजा प्रिय, पितृ सेवी, वस्तुओं का संग्रह करने वाले, विद्वान, धनी, अत्यंत बोलने वाले, मित्रों से युक्त, संगीत, कविता व युद्ध के प्रेमी, सभा-सोसाइटी और कंपनी इत्यादि में रुचि रखने वाले, अपने जीवन के प्रत्येक कार्य में अन्य किसी पर भरोसा रखने वाले, लंबे कद वाले, बलवान, उन्नत नासिका वाले और वायु प्रकृति से पीड़ित होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्तियों को सर, उदर एवं चर्म रोग संभव रहता है साथ ही इन्हें जल भय भी रहता है, तुला राशि वाले व्यक्ति स्त्री के अधीन, बहु स्त्री भोगी अर्थात दो विवाह करने वाले, कृषि करने में चतुर तथा क्रय-विक्रय से लाभ प्राप्त करने वाले होते हैं।

 

तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए १, ३, ५, ६, १५, २५, २६, ३६, ४६ व ५६ वां वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में ज्वर, तृतीय वर्ष में अग्नि भय, वें वर्ष में ज्वर पीड़ा, १५ वें वर्ष में सामान्य पीड़ा और २५ वें वर्ष में अधिक पीड़ा रहती है, यदि चंद्रमा को शुभ ग्रह देखते हैं और आयु सुख को करने वाले अन्य योग न बनते हो और उपर्युक्त बताए गए वर्षों को पार कर लें तो ८५ वर्ष की औसत आयु प्राप्त करते हैं कुछ ग्रंथकारों के अनुसार तुला राशि वाले व्यक्तियों की आयु ६५ वर्ष ११ माह की होती है तथा इन्हें मृत्यु उपरांत ख्याति अवश्य ही मिलती है, तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी तिथि अनिष्टकारी होती है तथा मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि वालों से मित्रता एवं कर्क व सिंह राशि वालों से शत्रुता रहती है, रत्नों में इनके लिए हीरा शुभदायी होता है, वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, अष्टमी तिथि, शुक्रवार व आश्लेषा नक्षत्र और दिन का प्रथम प्रहर इनके लिए अनिष्टकारी होता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

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सिंह राशि: जानिए, सिंह राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

सिंह राशि: जानिए, सिंह राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

सिंह राशि वाले व्यक्तियों से जुड़ी मुख्य बातें

 

सिंह राशि वाले व्यक्तियों की चेहरा कुछ बड़ा और ठोड़ी कुछ मोटी होती है, ऐसे व्यक्ति अभिमानी, पराक्रमी, स्थिर बुद्धि वाले और अपनी माता के विशेष प्यारे होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्ति वनों और पहाड़ों वाले जगहों पर घूमने के शौंकीन होते है साथ ही इनमें क्रोध की अधिकता रहती है, सिंह राशि वाले व्यक्ति धन-धान्य से युक्त, लक्ष्मीवान, विद्वान, सभी कलाओं में निपुण, अहंकारी, निष्ठुर, सत्यवादी, विदेश यात्रा पसंद करने वाले, शत्रु पर विजय प्राप्त करने वाले, तीक्ष्ण स्वभाव, उदार, मानसिक दुःख से पीड़ित, बुद्धिमान, निष्कपट, माता के प्रेमी, वस्त्र व सुगंधित द्रव्यों में रुचि रखने वाले, कला, संगीत व चित्र प्रेमी, उच्च पद प्राप्ति हेतु प्रयत्नशील रहने वाले, किसी की अधीनता जल्द न स्वीकार करने वाले और कभी-कभी कुंडली में ग्रहों द्वारा चतुर्थ भाव को पीड़ित करने की अवस्था में बाल्यकाल में दो स्त्रियों द्वारा दुग्धपान कराए जाने वाले होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्ति शरीर से पुष्ट, पीठ पर तिल या मस्से से युक्त चिन्ह, पेट के वाम भाग में वात रोग, सर, दंत, गला एवं उदर रोग से पीड़ित, भूख-प्यास और मानसिक व्यथा से पीड़ित, स्त्रियों से शत्रुता व अनबन रखने वाले होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्तियों की संतान प्रायः कम होती है, चोर के माध्यम से सिंह राशि वालों को नुकसान उठाना पड़ता है तथा अग्नि से भय रहता है।

 

सिंह राशि वालों के लिए १, ५, ७, २०, २१, २८, ३० और ३२ वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में प्रेत-पिशाच आदि बाधा से पीड़ा, पाँचवें वर्ष में अग्नि भय, सातवें वर्ष में ज्वर पीड़ा एवं विसूचिका रोग, २० वें वर्ष में सर्प भय, २१ वें वर्ष में पीड़ा, २८ वें वर्ष में अपवाद और ३२ वें वर्ष में पीड़ा होती है, यदि अष्टम, तृतीय, लग्न पर आशुभ ग्रहों का प्रभाव न हो और शनि या चंद्रमा या शुक्र में से कोई एक या दो या तीनों तृतीय व अष्टम भाव में स्थित हो तो व्यक्ति की औसत आयु ८७ वर्ष तक रहती है वहीं कुछ ग्रंथकारों ने बताया है कि ऐसी स्थिति में व्यक्ति की आयु १०० से ११७ वर्ष तक होती है, सिंह राशि वालों के लिए तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि अशुभ होती है, रविवार किसी भी कार्य के आरंभ हेतु शुभ होता है, मेष, मिथुन, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वाले व्यक्ति सिंह राशि वालों के लिए शुभचिंतक व सहयोगी अर्थात अच्छे मित्र होते हैं किंतु तुला, मकर और कुंभ राशि वाले व्यक्तियों से प्रायः इनकी शत्रुता रहती है, फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष, तृतीया, पंचमी, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि, मंगलवार, दोपहर का समय सिंह राशि वालों के लिए अनिष्टकारी रहता है साथ ही सिंह राशि वाले व्यक्तियों को जल से भी मृत्यु भय होता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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Astrology Sutras/Logics ग्रह शान्ति उपाय व रत्न सलाह

शनि जयंती 10 जून 2021: शनि के अशुभ फल में कमी लाने हेतु करें यह खास उपाय

शनि जयंती 10 जून 2021: शनि के अशुभ फल में कमी लाने हेतु करें यह खास उपाय

 

शनि के अशुभ फल में कमी लाने हेतु करें यह खास उपाय
शनि के अशुभ फल में कमी लाने हेतु करें यह खास उपाय

 

१० जून २०२१ को शनि जयंती पड़ रही है शनि को न्याय का देवता कहा गया है शनि हमें हमारे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं जिन लोगों की कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ हो उन्हें जीवन में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है उनके कार्यों में बाधाएं आती हैं तथा किसी भी काम में पूरी एकाग्रता नहीं बन पाती है समस्त नव ग्रहों में शनि बहुत धीमी गति से भ्रमण करते है जिस कारण उन्हें एक राशि पार करने में ढाई वर्ष लगते हैं वर्तमान में शनि मकर राशि में वक्री अवस्था में गोचर कर रहे हैं।

 

जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ होता है, उनके दैनिक जीवन में कुछ खास घटनाएं होने लगती हैं जिनसे हम बिना कुंडली देखे ही ये अंदाजा लगा सकते हैं कि शनि हमारी कुंडली में शुभ है या अशुभ तो आइए जानते हैं उन घटनाओं के बारे में:-

 

कुंडली में शनि के अशुभ होने की पहचान
कुंडली में शनि के अशुभ होने की पहचान

 

१. जिसकी कुंडली में शनि अशुभ होता है उनके जूते-चप्पल बार-बार टूट जाते हैं या गुम हो जाते हैं।

 

२. यदि शनि अशुभ हो तो व्यक्ति नया ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाता है, पढ़ाई में मन नहीं लगता और इस क्षेत्र में उसे कोई उपलब्धि भी प्राप्त नहीं हो पाती है।

 

३. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि अशुभ हो तो उसका विवाह होते ही ससुराल पक्ष में कोई हानि हो सकती है।

 

४. यदि कोई व्यक्ति घर बनवा रहा है और कोई अशुभ घटना घर बनवाते वक्त हो जाए तो यह शनि के अशुभ होने का संकेत है।

 

५. कुंडली में शनि अशुभ हो तो व्यक्ति का मन बुराई की ओर, कुसंगति, नशे की ओर झुकने लगता है।

 

६. शनि यदि अशुभ हो तो जमा धन का नाश होता है, कोई बीमारी हो जाती है और शरीर कमजोर होने लगता है।

 

७. कुंडली में शनि की विपरीत स्थिति के कारण व्यक्ति आलसी हो जाता है इस कारण उसके काम ठीक तरह से नहीं हो पाते हैं और सफलता दूर होती जाती है।

 

८. जब किसी व्यक्ति के चेहरे पर हमेशा थकान, तनाव दिखाई देने लगे तो यह भी शनि के अशुभ होने का संकेत है।

 

९. शनि यदि अशुभ हो तो जवानी में ही व्यक्ति के बाल सफेद हो जाते हैं और बाल झड़ने लगते हैं और व्यक्ति को जोड़ों में दर्द रहता है।

 

१०. शनि अशुभ होने पर आंखें कमजोर हो जाती हैं, कमर दर्द की शिकायत रहती है।

 

शनि जयंती पर करें यह विशेष उपाय निश्चित ही लाभ होगा:-

 

शनि जयंती के खास उपाय
शनि जयंती के खास उपाय

 

१. काली उर्द, काला तिल, सरसों का तेल किसी निम्न वर्ग के प्राणी को दक्षिणा के साथ दान करें।

 

२. सरकारी अस्पतालों में दवाईयां दान करें।

 

३. हनुमान जी को तिल के तेल में सिंदूर घोलकर लगाएं तथा सुंदरकांड का पाठ करे व ११ बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।

 

४. २१ आम के पत्तों पर चंदन से “राम” लिखकर उन पत्तो को एक के ऊपर एक रखें उसके बाद उस आम के पत्ते को मौली से लपेटकर २१ गांठ लगाएं तथा शनि मंत्रों का १ माला जाप कर के उन पत्तों को किसी पीपल वृक्ष के पास रखें या नदी में प्रवाहित करें तथा पीपल वृक्ष को सरसों के तेल का दिया अर्पित कर के १०८ बार “नमः शिवाय” मन्त्र का जाप करें।

 

५. छाया दान करें।

 

जय श्री राम।

 

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