नवरात्रि पाँचवाँ दिन: माँ स्कंदमाता की पूजा विधि और सिद्ध मंत्र
चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व के पांचवें दिन नवदुर्गा के अत्यंत ममतामयी और मोक्षदायिनी स्वरूप ‘माँ स्कंदमाता’ (Maa Skandamata) की उपासना की जाती है। भगवान कार्तिकेय (जिन्हें दक्षिण भारत में मुरुगन या स्कंद कुमार कहा जाता है) की माता होने के कारण ही इन्हें ‘स्कंदमाता’ के नाम से पूजा जाता है। जो साधक अपने जीवन में संतान सुख, अखंड ज्ञान और करियर में सर्वोच्च शिखर प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए नवरात्रि का पांचवां दिन सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।
Astrology Sutras के इस विशेष लेख में आइए जानते हैं 100% शास्त्रोक्त माँ स्कंदमाता की पूजा विधि, केले के शुभ भोग का रहस्य और वह अचूक सिद्ध मंत्र जिससे माता शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।
🚩 1. माँ स्कंदमाता का दिव्य स्वरूप और अर्थ
माता का स्वरूप अत्यंत ज्योतिर्मय और शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें ‘पद्मासना देवी’ (Padmasana Devi) भी कहा जाता है:
- चतुर्भुजी स्वरूप: माता की चार भुजाएं हैं। इन्होंने अपनी दाईं ओर की ऊपरी भुजा से भगवान स्कंद (बाल कार्तिकेय) को गोद में पकड़ा हुआ है और निचली भुजा में कमल पुष्प धारण किया है। बाईं ओर की ऊपरी भुजा वरमुद्रा में है और निचली भुजा में भी कमल पुष्प सुशोभित है।
- वाहन: माँ स्कंदमाता का वाहन ‘सिंह’ (Lion) है, जो शौर्य और पराक्रम का प्रतीक है।
🧘♂️ 2. आध्यात्मिक रहस्य: विशुद्धि चक्र (Vishuddhi Chakra) का जागरण
योग शास्त्र और तंत्र विज्ञान के अनुसार, नवरात्रि के पांचवें दिन साधक का मन ‘विशुद्धि चक्र’ (Throat Chakra) में स्थित होता है। यह चक्र कंठ (गले) में स्थित होता है और यह हमारे संचार (Communication), ज्ञान और कलात्मक क्षमताओं का केंद्र है।
माँ स्कंदमाता की उपासना से विशुद्धि चक्र जागृत होता है, जिससे साधक के भीतर की सभी अशुद्धियां और नकारात्मक विचार नष्ट हो जाते हैं और वह परम शांति व मोक्ष का अधिकारी बन जाता है।
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🙏 3. माँ स्कंदमाता के अचूक सिद्ध मंत्र
पांचवें दिन माता की पूजा आरंभ करते समय इन वैदिक सिद्ध श्लोकों का उच्चारण समस्त कष्टों को दूर करता है:
✨ ध्यान मंत्र
“सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥”
हिंदी अर्थ: जो नित्य सिंह रूपी सिंहासन पर विराजमान रहती हैं और जिनके दोनों हाथों में कमल पुष्प सुशोभित हैं, वे यशस्विनी माँ स्कंदमाता हमारे लिए सदा शुभदायी हों।
✨ स्तुति मंत्र
“या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
🌸 4. शास्त्रोक्त माँ स्कंदमाता की पूजा विधि, शुभ रंग और भोग
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के पांचवें दिन माता की पूजा अत्यंत सरल और प्रेम-भाव से की जानी चाहिए। इन वैदिक नियमों का पालन करें:
- स्नान और शुभ रंग: माँ स्कंदमाता को ‘पीला’ (Yellow) रंग अत्यंत प्रिय है। स्नान के पश्चात पीले या सुनहरे रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा में बैठें।
- अचूक भोग (प्रसाद): माता को ‘केले’ (Banana) का भोग लगाना सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि पांचवें दिन केले का भोग लगाकर उसे प्रसाद के रूप में ब्राह्मणों को दान करने से परिवार में सुख-शांति आती है और स्वास्थ्य उत्तम रहता है।
- श्रृंगार और कार्तिकेय पूजा: माता की पूजा के साथ भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की पूजा अवश्य करें, क्योंकि माता स्कंदमाता की पूजा करने से बाल कार्तिकेय की पूजा स्वतः ही हो जाती है। माता को पीले फूल, पीला चंदन, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
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❓ FAQ: आपके मन में उठ रहे सवाल
Q1: माँ स्कंदमाता को कौन सा भोग लगाना चाहिए?
नवरात्रि के पांचवें दिन माँ स्कंदमाता को मुख्य रूप से ‘केले’ (Banana) का भोग अर्पित किया जाता है। इससे शरीर निरोगी रहता है।
Q2: माता की पूजा से कौन सा चक्र जागृत होता है?
माँ स्कंदमाता की साधना से कंठ में स्थित ‘विशुद्धि चक्र’ जागृत होता है, जिससे वाणी में ओज और परम ज्ञान की प्राप्ति होती है।
Q3: संतान प्राप्ति के लिए क्या करें?
जिन दंपत्तियों को संतान सुख नहीं मिल रहा है, उन्हें पांचवें दिन माता की गोद में बैठे भगवान स्कंद की पूजा करनी चाहिए और पीले पुष्प अर्पित करने चाहिए।
