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मौनी अमावस्या 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और स्नान-दान का महत्व–Astrology Sutras

मौनी अमावस्या 2026: स्नान-दान का महत्व और अचूक उपाय जो बदल देंगे किस्मत

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है धर्म-शास्त्रों के अनुसार मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है, इस दिन मौन व्रत करने से व्यक्ति को मुनि पद की प्राप्ति होती है साथ ही मौनी अमावस्या पर स्नान-दान-श्राद्ध का विशेष महत्व है “ऋषिकेश पंचांग” (काशी) अनुसार वर्ष 2026 में अमावस्या तिथि 15 जनवरी की मध्य रात्रि 11 बजकर 53 मिनट से लगकर 18 जनवरी की मध्य रात्रि 1 बजकर 09 मिनट तक रहेगी अतः वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी को मनाई जाएगी, मौनी अमावस्या के दिन काशी के दशाश्वमेघ या प्रयाग में त्रिवेणी संगम या समुद्र में मौन रहकर स्नान करने का विशेष महत्व है, कुछ जगहों पर मौनी अमावस्या को त्रिवेणी अमावस्या भी कहा जाता है रविवार के दिन अमावस्या की युति दुर्भिक्ष व प्रजा के लिए भयकारक होती है।

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मौनी अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार कांचीपुरी में एक ब्राह्मण अपनी पत्नी, 7 पुत्रों व 1 पुत्री के साथ रहता था उसकी पुत्री का नाम गुणवती था उस ब्राह्मण में अपने सभी पुत्रों का विवाह करने के पश्चात अपनी पुत्री के लिए सुयोग्य वर खोजने के लिए अपने ज्येष्ठ पुत्र को भेजा और उसकी कुंडली एक पंडित को दिखाई, पंडित ने कुंडली देखकर यह बताया कि आपकी पुत्री की कुंडली में वैधव्य योग प्रवल है अतः सप्तवदी होते-होते आपकी पुत्री विधुर हो जाएगी।

पंडित के द्वारा समस्या का निवारण व भाई-बहन का सिंह द्वीप प्रस्थान

ब्राह्मण के द्वारा पंडित से इसका निवारण पूछने पर पंडित ने बताया कि यहाँ से कुछ ही दूरी पर सिंहल द्वीप के पास एक धोबिन सोमा रहती है आप उसको प्रसन्न कर अपनी पुत्री के विवाह पूर्व उनको यहाँ ले आएं वह आपकी पुत्री के वैधव्य दोष को दूर कर सकती है तत्पश्चात राजा का सबसे छोटा पुत्र अपनी बहन को साथ लेकर सिंहल द्वीप के लिए निकल गया और सागर तट पर एक विशाल वृक्ष के नीचे बैठकर वह दोनो सागर पार करने के उपाय के बारे में चिंतन करने लगे वहीं उसी वृक्ष के एक घोंसले में गिद्ध का एक परिवार रहता था जिनके बच्चे उन दोनों के क्रिया-कलापों को देख रहे थे सायंकाल गिद्ध के बच्चों की माँ आयी व उन्हें भोजन परोसने लगीं तो गिद्ध के बच्चों ने कहा कि नीचे दो मनुष्य प्रातःकाल से भूखे-प्यासे बैठे हैं जब तक वह भोजन नही कर लेते तब तक हम भी कुछ नही खाएंगे।

गिद्ध की माता व राजा के पुत्र-पुत्री के बीच संवाद

गिद्ध की माता राजा के पुत्र व पुत्री के पास जाकर बोलीं कि मैं आप दोनों की मंशा समझ गयी हूँ और मैं प्रातःकाल आप दोनों को सागर पार सिंहल द्वीप पर पहुँचा दूँगी अतः आप दोनों अभी भोजन कर कुछ देर विश्राम करें मैं आपके लिए कंद-मूल, फल ले आती हूँ रात्रि विश्राम के बाद गिद्ध माता ने राजा के पुत्र व पुत्री को सिंहल द्वीप पहुँचा दिया और वह दोनो नित्य प्रातःकाल सोमा के घर को झाड़ कर लीपने लगे, एक दिवस सोमा ने अपनी बहुओं से पूछा कि हमारे घर कौन बुहारता है, कौन लीपता-पोतता है तो सभी बहुएं कहने लगी कि हम ही नित्य घर को संवारते है किंतु सोमा को उन पर विश्वास नही हुआ और वह सत्य जानने की इच्छा से सम्पूर्ण रात्रि जाग कर प्रातःकाल की प्रतीक्षा करने लगी और सब कुछ प्रत्यक्ष देखकर सत्य से अवगत हुई।

सोमा का वचन देना व राजा के निवास स्थान पहुँचना

तत्पश्चात सोमा का उन दोनों भाई-बहन से वार्ता करी और सारी बात जानकर उन्होंने उचित समय पर उनके घर आने का वचन दे दिया किंतु भाई-बहन उनसे साथ चलने का निवेदन करने लगे तो सोमा ने उनके निवेदन को स्वीकार कर अपनी बहुओं से कहा कि यदि मेरे आने के पूर्व यहाँ किसी की मृत्यु हो जाए तो उनका देह नष्ट न करना अपितु मेरे वापस आने की प्रतीक्षा करना और फिर सोमा राजा के पुत्र व पुत्री साथ उनके निवास स्थान कांचीपुरी पहुँच गयी।

सोमा द्वारा राजा के जमाता को पुनः जीवित करना

दूसरे दिवस जब राजा की पुत्री का विवाह कार्यक्रम आयोजित हुआ तो सप्तवदी होते ही राजा के जमाता की मृत्यु हो गयी तत्पश्चात सोमा ने अपने द्वारा संचित सभी पुण्यों को राजा की पुत्री को देकर उनके पति को पुनः जीवित कर दिया किंतु इसके फलस्वरूप सोमा के पुत्र, जमाता तथा पति की मृत्यु हो गयी।

सोमा ने पुष्प फल संचित करने के लिए मार्ग में पीपल वृक्ष के नीचे विष्णु जी का पूजन कर पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा की जिनसे सोमा के मृतक जन पुनः जीवित हो उठे।

मौनी अमावस्या स्नान शुभ मुहूर्त्त

“ऋषिकेश पंचांग” (काशी) अनुसार अमावस्या तिथि 17 जनवरी 11 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 18 जनवरी की मध्य रात्रि 01 बजकर 09 मिनट तक रहेगी अतः मौनी अमावस्या स्नान ब्रह्म मुहर्त प्रातः 05:02 से 05:50 में करना सर्वोत्तम रहेगा इसके बाद प्रातः 06:28 से 08:14 तक भी मौनी अमावस्या स्नान शुभ मुहर्त रहेगा व पीपल वृक्ष पूजन और विष्णु जी के पूजन का शुभ मुहर्त स्थिर लग्न वृषभ लग्न दोपहर 02:47 से 05:00 बजे तक रहेगा।

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राशि अनुसार उपाय

मेष राशि

मेष राशि वाले जातक गाय को मसूर की दाल भीगा कर खिलाएं व ब्राह्मण को तिल और गेहूँ का दान करें साथ ही पीपल वृक्ष को सरसों के तेल का दीपक अर्पित कर संकटमोचन हनुमाष्टक का पाठ करना चाहिए।

वृषभ राशि

वृषभ राशि वाले जातक गाय को पके हुए चावल में चीनी मिलाकर खिलाएं व ब्राह्मण को जौं और चीनी का दान करें और पीपल वृक्ष को सरसों के तेल का दीपक अर्पित कर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।

मिथुन राशि

मिथुन राशि वाले जातक गाय को हरा चारा खिलाएं व ब्राह्मण को काला तिल, हरी दाल, तिलकुट आदि का दान करें और यदि संभव हो तो किन्नर को हरी चूड़ी व हरी साड़ी दान करना आपके लिए विशेष शुभ रहेगा।

कर्क राशि

कर्क राशि वाले जातकों को शकर व श्वेत मीठे का किसी ब्राह्मण को दान करना बेहद शुभ रहेगा साथ ही सूर्यास्त बाद काले कुत्ते को पनीर/मलाई/खोया अर्थात कोई ताकत की चीज खिलाना आपके लिए बेहद शुभ रहेगा।

सिंह राशि

सिंह राशि वाले जातकों को सूर्यास्त बाद किसी भिखारी को काला जूता, गेहूँ व काले कंबल का दान करना बेहद शुभ रहेगा साथ ही यदि संभव हो तो चाँदी का एक जोड़ा सर्प बहते पानी में प्रवाहित करना आपके लिए शुभ रहेगा।

कन्या राशि

कन्या राशि वाले जातकों के लिए सूर्यास्त बाद विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ कर बहते पानी में नारियल को प्रवाहित करना बेहद शुभ रहेगा साथ ही यदि किसी ब्राह्मण को गेहूँ, जौं, तिलकुट, हरी दाल दान करना अत्यंत शुभ रहेगा।

तुला राशि

तुला राशि वाले जातकों को 12 वर्ष से छोटी कन्याओं को चॉकलेट/चिप्स आदि का दान करना बेहद शुभ रहेगा साथ ही किसी ब्राह्मण को आटा, चीनी, जौं, श्वेत तिल, कुशा, श्वेत मीठा आदि का दान करना बेहद शुभ रहेगा।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वाले जातकों के लिए किसी भिखारी को काली चप्पल, काले कंबल आदि का दान करना शुभ रहेगा साथ ही किसी ब्राह्मण को मसूर की दाल, ताम्र का कोई पात्र, शकर व सुराही का दान करना बेहद शुभ रहेगा।

धनु राशि

धनु राशि वाले जातकों के लिए किसी ब्राह्मण को पीला मीठा, पीला वस्त्र, पीला मीठा आदि का दान करना व सूर्यास्त बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर बहते पानी में नारियल को प्रवाहित करना विशेष रूप से शुभ फलदायक रहेगा।

मकर राशि

मकर राशि वाले जातकों के लिए काली उर्द, किशमिश, शहद, आम का अचार, मेवा युक्त कोई नमकीन किसी भिखारी/जमादार/नौकर को दान करना व सूर्यास्त बाद पीपल वृक्ष को सरसों के तेल का दीपक अर्पित कर नव ग्रह स्तोत्र का पाठ करना बेहद शुभ रहेगा।

कुंभ राशि

कुंभ राशि वाले जातकों के लिए लौह से बने उत्पाद, काला तिल व सरसों तेल का दान करना शुभ रहेगा साथ ही सूर्यास्त बाद शनि स्तोत्र का पाठ करना विशेष रूप से शुभ फलदाई होगा।

मीन राशि

मीन राशि वाले जातकों के लिए विष्णु जी के मंदिर में पीली वस्तुओं का दान करना व शिवलिंग पर मधु से अभिषेक कर मधुराष्टकं का पाठ करना विशेष रूप से शुभ फलदाई रहेगा।

जय श्री राम।