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मेष लग्न और आप: जानिए, मेष लग्न वालों का व्यक्तित्व

मेष लग्न और आप: जानिए, मेष लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

मेष लग्न वालों का व्यक्तित्व
मेष लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

मेष लग्न के व्यक्ति पुत्रवान, तेजस्वी, क्रोधी, वीर, कठोर चित्त, सृजनात्मकता स्वभाव अर्थात मन में हमेशा ही कुछ नया करने की चाह रखने वाले, भावुक, झगड़ालू, स्पष्ट वक्ता, साहसी, उद्दमी अर्थात मेहनती, वीर, मेधावी और सतत अर्थात किसी न किसी कार्य में संलग्न रहने वाले होते हैं, बचपन में इन्हें अनेक हानियों का सामना करना पड़ता है तथा मेष लग्न वाले व्यक्ति स्वतंत्रता प्रिय और उदार प्रकृति के होते हैं साथ ही मेष लग्न वाले व्यक्ति दूसरों की जरूरत पड़ने पर सब कुछ भूल कर उसकी सहायता भी पूरे दिल से करते हैं, मेष लग्न के व्यक्ति किसी भी कार्य को संपन्न करने में निर्भय एवं निःसंकोच होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति उच्च पद पर आसीन होते हैं तथा इनमें नेतृत्व करने की अद्भुद क्षमता होती है, मेष लग्न के व्यक्तियों के शरीर के किसी स्थान पर चिन्ह अवश्य होता है।

 

मेष लग्न वाले व्यक्ति झूठ बोलने में भी संकोच न करने वाले, कम खिल-खिला कर हँसने वाले, अभिमानी, शुभ आचरण वाले, गलत कार्यों से नफरत करने वाले, निष्कपट, महत्वाकांक्षी, बुद्धि व युक्ति लगाने में निपुण, युद्ध कला में कुशल, मुँहफट, सदैव लड़ने-झगड़ने को तैयार, सामने से वार करने वाले होते हैं, शास्त्रकारों का मत है कि यदि किसी महिला का जन्म मेष लग्न में हुआ हो तो ऐसी महिला सच बोलने वाली, स्पष्ट वक्ता, गन्दगी से नफरत करने वाली, कठोर चित्त, बदला लेने को सदैव तत्पर रहने वाली, कभी-कभी कठोर शब्दों का इस्तेमाल करने वाली, कफ से पीड़ित व अपने स्वजनों से प्रीति रखने वाली होती है।

 

मेष लग्न में जन्मे व्यक्तियों के लिए सूर्य सबसे अधिक सुखदाई ग्रह है, बृहस्पति भी सुखदाई ग्रह है किंतु सूर्य से कम शुभ होता है, साधारण नियम के अनुसार यदि नवमेश और दशमेश एक हों तो यह राजयोग होता है किंतु मेष लग्न की कुंडली पर यह सूत्र लागू नही होता क्योंकि पराशर ऋषि का मत है कि यदि दशमेश और एकादशेश एक ही ग्रह हों तो राजयोग भंग हो जाता है अतएव मेष लग्न वालों के लिए गुरु व शनि का संबंध अनिष्टकर होता है, मेष लग्न वालों के लिए शनि, बुध और शुक्र अशुभ ग्रह होते है, शनि और बुध प्रायः मारकेश होते हैं, शुक्र द्वितीयेश व सप्तमेश होने से मारक ग्रह बनता है किंतु प्रायः मृत्यु दायक नही होता है, मेष लग्न वालों के लिए यदि चंद्र और बृहस्पति, मंगल और राहु, शुक्र व राहु का यदि संबंध बने तो राजयोग होता है, मेष लग्न वालों के लिए मंगल अष्टमेश होने पर भी बहुत अधिक अशुभ नही होता है, यदि मेष लग्न पहले नवमांश में हो तो व्यक्ति अपने प्राकृतिक स्वभाव को विशेष रूप से प्रकट करता है।

 

मेष लग्न वाले व्यक्तियों की कुछ अन्य विशेष बातें:-

 

१. मेष लग्न वाले व्यक्ति की कुंडली में यदि लग्न में ही मंगल स्थित हो तो व्यक्ति अत्यधिक क्रोधी होता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों को बहुत जल्दी और छोटी-छोटी बातों पर भी क्रोध आता है।

 

२. यदि मंगल लग्न में ही हो तो व्यक्ति दुबला-पतला अर्थात दुर्बल होता है किंतु अपने प्रयासों से बलवान बन जाता है तथा इनके सिर या माथे पर चोट का चिन्ह भी रहता है।

 

३. मेष लग्न के व्यक्तियों को चेचक बीमारी की संभावना रहती है।

 

४. मेष लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः ज्वर, अग्नि व शस्त्र भय तथा मस्तिष्क जनित रोग की समस्या रहती है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

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सिंह राशि: जानिए, सिंह राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

सिंह राशि: जानिए, सिंह राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

सिंह राशि वाले व्यक्तियों से जुड़ी मुख्य बातें

 

सिंह राशि वाले व्यक्तियों की चेहरा कुछ बड़ा और ठोड़ी कुछ मोटी होती है, ऐसे व्यक्ति अभिमानी, पराक्रमी, स्थिर बुद्धि वाले और अपनी माता के विशेष प्यारे होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्ति वनों और पहाड़ों वाले जगहों पर घूमने के शौंकीन होते है साथ ही इनमें क्रोध की अधिकता रहती है, सिंह राशि वाले व्यक्ति धन-धान्य से युक्त, लक्ष्मीवान, विद्वान, सभी कलाओं में निपुण, अहंकारी, निष्ठुर, सत्यवादी, विदेश यात्रा पसंद करने वाले, शत्रु पर विजय प्राप्त करने वाले, तीक्ष्ण स्वभाव, उदार, मानसिक दुःख से पीड़ित, बुद्धिमान, निष्कपट, माता के प्रेमी, वस्त्र व सुगंधित द्रव्यों में रुचि रखने वाले, कला, संगीत व चित्र प्रेमी, उच्च पद प्राप्ति हेतु प्रयत्नशील रहने वाले, किसी की अधीनता जल्द न स्वीकार करने वाले और कभी-कभी कुंडली में ग्रहों द्वारा चतुर्थ भाव को पीड़ित करने की अवस्था में बाल्यकाल में दो स्त्रियों द्वारा दुग्धपान कराए जाने वाले होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्ति शरीर से पुष्ट, पीठ पर तिल या मस्से से युक्त चिन्ह, पेट के वाम भाग में वात रोग, सर, दंत, गला एवं उदर रोग से पीड़ित, भूख-प्यास और मानसिक व्यथा से पीड़ित, स्त्रियों से शत्रुता व अनबन रखने वाले होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्तियों की संतान प्रायः कम होती है, चोर के माध्यम से सिंह राशि वालों को नुकसान उठाना पड़ता है तथा अग्नि से भय रहता है।

 

सिंह राशि वालों के लिए १, ५, ७, २०, २१, २८, ३० और ३२ वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में प्रेत-पिशाच आदि बाधा से पीड़ा, पाँचवें वर्ष में अग्नि भय, सातवें वर्ष में ज्वर पीड़ा एवं विसूचिका रोग, २० वें वर्ष में सर्प भय, २१ वें वर्ष में पीड़ा, २८ वें वर्ष में अपवाद और ३२ वें वर्ष में पीड़ा होती है, यदि अष्टम, तृतीय, लग्न पर आशुभ ग्रहों का प्रभाव न हो और शनि या चंद्रमा या शुक्र में से कोई एक या दो या तीनों तृतीय व अष्टम भाव में स्थित हो तो व्यक्ति की औसत आयु ८७ वर्ष तक रहती है वहीं कुछ ग्रंथकारों ने बताया है कि ऐसी स्थिति में व्यक्ति की आयु १०० से ११७ वर्ष तक होती है, सिंह राशि वालों के लिए तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि अशुभ होती है, रविवार किसी भी कार्य के आरंभ हेतु शुभ होता है, मेष, मिथुन, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वाले व्यक्ति सिंह राशि वालों के लिए शुभचिंतक व सहयोगी अर्थात अच्छे मित्र होते हैं किंतु तुला, मकर और कुंभ राशि वाले व्यक्तियों से प्रायः इनकी शत्रुता रहती है, फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष, तृतीया, पंचमी, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि, मंगलवार, दोपहर का समय सिंह राशि वालों के लिए अनिष्टकारी रहता है साथ ही सिंह राशि वाले व्यक्तियों को जल से भी मृत्यु भय होता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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