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नवरात्रि छठा दिन और सूर्य षष्ठी (24 मार्च 2026): माँ कात्यायनी पूजा, चैती छठ कथा और विवाह बाधा निवारण

नवरात्रि छठा दिन और सूर्य षष्ठी: माँ कात्यायनी और छठ पूजा विधि

सनातन धर्म में 24 मार्च 2026 का दिन एक अत्यंत दुर्लभ और महा-कल्याणकारी संयोग लेकर आ रहा है। एक ओर जहाँ इस दिन चैत्र नवरात्रि के छठे दिन के रूप में महिषासुर मर्दिनी ‘माँ कात्यायनी’ (Maa Katyayani) की उपासना की जाएगी, वहीं दूसरी ओर इसी दिन भगवान सूर्य और छठी मैया को समर्पित ‘सूर्य षष्ठी’ (चैती छठ / Chaiti Chhath) का पावन पर्व भी मनाया जाएगा।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माँ कात्यायनी विवाह की बाधाओं को दूर करने और देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) को बलवान करने वाली देवी हैं, जबकि भगवान सूर्य (Sun) सरकारी नौकरी, आरोग्य और अपार तेज के प्रदाता हैं। Astrology Sutras के इस विशेष शोध लेख में आइए विस्तार से जानते हैं माँ कात्यायनी और सूर्य षष्ठी की शास्त्रोक्त कथा, अचूक पूजा विधि, सिद्ध मंत्र और विवाह में आ रही अड़चनों को हमेशा के लिए खत्म करने वाले अचूक वैदिक उपाय।


🚩 भाग 1: नवरात्रि का छठा दिन (माँ कात्यायनी की उपासना)

नवदुर्गा का छठा स्वरूप ‘माँ कात्यायनी’ है। इनका स्वरूप अत्यंत भव्य, दिव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है। इनकी चार भुजाएं हैं; दाईं ओर का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में और नीचे वाला वरमुद्रा में है। बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में तलवार (खड्ग) और नीचे वाले हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है। इनका वाहन सिंह है।

✨ माँ कात्यायनी का शास्त्रोक्त सिद्ध ध्यान मंत्र

“चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥”

हिंदी अर्थ: जिनके हाथों में चंद्रहास नामक चमकती हुई तलवार है, जो सर्वश्रेष्ठ सिंह पर सवार हैं और जो दानवों (महिषासुर) का वध करने वाली हैं, वे माँ कात्यायनी मुझे अपना शुभ आशीर्वाद प्रदान करें।

📜 माँ कात्यायनी की प्रामाणिक पौराणिक कथा

मार्कंडेय पुराण के अनुसार, प्राचीन काल में ‘कत’ नाम के एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि ‘कात्य’ हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए। महर्षि कात्यायन ने भगवती परांबा की घोर तपस्या की और यह वरदान मांगा कि देवी उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। देवी ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली।

जब पृथ्वी पर महिषासुर नामक राक्षस का अत्याचार बहुत बढ़ गया, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों ने अपने तेज का अंश देकर एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन ने सबसे पहले इस देवी की पूजा की, इसलिए इनका नाम ‘कात्यायनी’ पड़ा। माता कात्यायनी ने ही अश्विन कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेकर, शुक्ल पक्ष की सप्तमी, अष्टमी और नवमी तक महर्षि कात्यायन की पूजा ग्रहण की और दशमी के दिन महिषासुर का वध करके तीनों लोकों को भयमुक्त किया।

विवाह में आ रही बाधाओं का अचूक वैदिक उपाय

ज्योतिष में माँ कात्यायनी का संबंध देवगुरु बृहस्पति से माना गया है। जिन कन्याओं या युवकों के विवाह में लगातार देरी हो रही है, उन्हें छठे दिन गोधूलि वेला (शाम के समय) माता की विशेष पूजा करनी चाहिए।

🍯 शहद (Honey) का महा-भोग:

छठे दिन माता कात्यायनी को शहद (Honey) का भोग लगाना सबसे शुभ माना जाता है। माता को पीले वस्त्र, पीली हल्दी की गांठें और लाल पुष्प अर्पित करें। मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए इस सिद्ध मंत्र का 108 बार जाप करें:

“ॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥”


🌅 भाग 2: सूर्य षष्ठी (चैती छठ) – आरोग्य और सफलता का महाव्रत

24 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल षष्ठी है, जिसे चैती छठ (Chaiti Chhath) या सूर्य षष्ठी के रूप में मनाया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से भगवान सूर्य देव और उनकी मानस बहन ‘छठी मैया’ को समर्पित है। यह व्रत संतान के सुखी जीवन, सरकारी नौकरी में सफलता और त्वचा संबंधी असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए किया जाता है।

✨ सूर्य देव को अर्घ्य देने का शास्त्रोक्त मंत्र

“एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥”

हिंदी अर्थ: हे हज़ारों किरणों वाले, तेज के पुंज और जगत् के स्वामी सूर्य देव! मुझ पर कृपा करें और मेरे द्वारा भक्तिपूर्वक दिए गए इस अर्घ्य (जल) को स्वीकार करें।

📜 सूर्य षष्ठी (छठ पर्व) की पौराणिक कथा

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, स्वायम्भुव मनु के पुत्र राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी मालिनी संतान न होने के कारण अत्यंत दुखी थे। महर्षि कश्यप के निर्देश पर उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ किया, जिसके फलस्वरूप रानी मालिनी गर्भवती हुईं। लेकिन दुर्भाग्य से रानी ने एक मृत पुत्र को जन्म दिया। राजा प्रियव्रत अत्यंत निराश होकर प्राण त्यागने लगे।

तभी आकाश से एक दिव्य विमान उतरा, जिसमें ब्रह्मा जी की मानस पुत्री ‘देवसेना’ (छठी मैया) विराजमान थीं। उन्होंने राजा से कहा, “मैं सृष्टि की मूल प्रकृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हूँ, इसलिए मेरा नाम षष्ठी है। तुम मेरी पूजा करो और दूसरों को भी प्रेरित करो।” राजा प्रियव्रत ने कार्तिक और चैत्र माह की षष्ठी तिथि को पूरे विधि-विधान से छठी मैया और सूर्य देव का व्रत किया, जिसके प्रभाव से उनका मृत पुत्र जीवित हो गया। तभी से यह ‘महाव्रत’ मनाया जाने लगा।

🙏 सूर्य षष्ठी अर्घ्य और पूजा विधि

  • षष्ठी के दिन सायंकाल (अस्त होते सूर्य को) और अगले दिन सप्तमी को प्रातःकाल (उगते सूर्य को) अर्घ्य दिया जाता है।
  • अर्घ्य देते समय जल में किसी नदी या सरोवर में खड़े होना सर्वोत्तम माना जाता है।
  • बांस के सूप (दउरा) में ठेकुआ (Thekua), गन्ना, नारियल, सेब, केला और अन्य मौसमी फल रखकर भगवान सूर्य को अर्पित करें।
  • तांबे के लोटे में शुद्ध जल, लाल चंदन, लाल फूल और गुड़ डालकर भगवान सूर्य को ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दें।

निष्कर्ष: 24 मार्च 2026 का यह दिन आध्यात्मिक रूप से अजेय है। जो भी साधक इस दिन माता कात्यायनी को शहद का भोग लगाएंगे और भगवान सूर्य को नियमपूर्वक अर्घ्य देंगे, उनके जीवन से विवाह की अड़चनें, बीमारियां और दरिद्रता हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।


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नोट: यह लेख वैदिक ज्योतिष, मार्कंडेय पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में उल्लेखित तथ्यों व श्लोकों के आधार पर तैयार किया गया है।