विक्रम संवत 2078 में वर्ष प्रवेश लग्न से भारत का भविष्य
विक्रम संवत २०७८ के वर्ष प्रवेश लग्न से भारत में घटित होने वाली प्रमुख घटनाएं
विक्रम संवत 2078 में वर्ष प्रवेश लग्न से भारत का भविष्य
भारत के प्रवेश वर्ष प्रवेश लग्न के विचार से वर्ष प्रवेश लग्न मेष व द्रव्येश शुक्र है अतः मनोरंजन जगत एवं श्रृंगार संबधी व्यापार में थोड़ा लाभ होगा, पराक्रमेश बुध के होने से भारत की नीतियों से अंतराष्ट्रीय क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी, सुखेश चंद्रमा के होने के कारण से लोक कल्याण के कार्य से जनता सुखी रहेगी तथा बुध के कष्टेश होने के कारण से अनावश्यक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, मारकेश मंगल के होने के कारण से कई जगह अहिंसक उपद्रव होंगे व भाग्येश गुरु के होने के कारण से शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति होगी, कर्मेश शनि से कानून व्यवस्था अच्छी दीर्घकालिक योजनाओं का शुभारंभ होगा, आयेश शनि के होने से राष्ट्रीय कोष में वृद्धि होगी तथा व्ययेश गुरु के होने के कारण से शिक्षा, ऊर्जा व योग के क्षेत्र में विस्तार होगा।
अनेक ग्रंथों में सूर्यादि सभी ग्रहों के विभिन्न स्थानों में फल बताएं गए हैं पिछले लेख में मैंने भृगु सूत्र आधारित सूर्य के प्रथम भाव व द्वितीय में फल को बताया था अतः उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सूर्य के तृतीय भाव में फल को लिख रहा हूँ:-
भृगु सूत्र आधारित प्रथम भाव में सूर्य के फल को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं:-
१. यदि कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति बुद्धिमान होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों को अनुजों (छोटे भाइयों) का अभाव रहता है साथ ही बड़ा भाई तो होता है किंतु बड़े भाई के सुखों में त्रुटि रहती है और ऐसे व्यक्तियों को उम्र के ४, ५, ८ अथवा १२वें वर्ष में कुछ पीड़ा होती है।
२. यदि कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य पाप ग्रह से युक्त होकर बैठा हो तो व्यक्ति क्रूर कर्मों को करने वाला होता है तथा उसके दो भ्राता होते हैं साथ ही ऐसा व्यक्ति पराक्रमी तथा लड़ाई-झगड़े से न घबराने वाला और कीर्तिमान व अपने द्वारा अर्जित धन का भोग करने वाला होता है।
३. यदि तृतीय भाव में सूर्य शुभ ग्रहों से युक्त हो तो व्यक्ति के सहोदर भाइयों की अच्छी उन्नति व वृद्धि होती है।
४. यदि तृतीय भाव में सूर्य हो और तृतीयेश/पराक्रमेश बली अवस्था में बैठा हो या तृतीय भाव में सूर्य स्वराशि स्थित हो तो व्यक्ति अत्यंत पराक्रमी, खुद के पराक्रम से संपूर्ण सुख भोगने वाला, उच्च पद पर आसीन होने वाला, राजा या उच्चाधिकारी द्वारा सम्मानित होता है तथा ऐसे व्यक्तियों के भाई दीर्घायु होते हैं।
५. यदि तृतीय भाव में सूर्य स्थित हो और तृतीयेश/पराक्रमेश पाप ग्रहों से युक्त व दृष्ट हों तो व्यक्ति आलस्य करने वाला व पाप कर्म करने वाला होता है तथा ऐसे व्यक्तियों के भाइयों का नाश होता है।
६. यदि तृतीय भाव में सूर्य स्थित हो और उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति धनवान, भोगी तथा सुखी होता है।
भृगु सूत्र आधारित द्वितीय भाव में सूर्य के फल को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं:-
सितंबर 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा
मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए सितंबर 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरूवात में मंगल का लग्न से गोचर रूचक नामक पंचमहापुरुष योग बनाएगा जिस पर गुरु की दृष्टि भी रहेगी फलस्वरूप स्वास्थ्य में सुधार होगा, खुद को ऊर्जावान अनुभव करेंगे, नई चुनातियों का सामना करना पड़ सकता है व इन चुनौतियों पर विजय प्राप्त करते हुए उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, क्रोध पर नियंत्रण रखें, 10 सितंबर को मंगल वक्री हो जाएंगे अतः स्वास्थ्य में कुछ परेशानियाँ अनुभव होगी, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है जिस कारण से मन अप्रसन्न रहेगा, जीवनसाथी से क्षणिक विवाद संभव रहेगा, माह के शुरुवात में सूर्य व बुध का पंचम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, संतान का सहयोग प्राप्त होगा किंतु संतान के स्वास्थ्य में कुछ परेशानियाँ संभव रहेगी, 2 सितंबर को बुध गोचर बदलकर आपके छठे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर बुद्धि व विवेक द्वारा विजय प्राप्त होगी, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त होने के योग बनेंगे, 16 सितंबर को सूर्य भी गोचर बदलकर आपकी कुंडली के छठे भाव में आ जाएंगे अतः सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, ज्वर, सर दर्द, नेत्रों में जलन/दर्द की समस्या रह सकती है, 22 सितंबर को बुध पुनः गोचर बदलकर आपकी कुंडली के सप्तम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, जिनका कार्य बैंकिंग व फाइनेंस से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा, माह के शुरुवात में शुक्र का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा अतः घर में किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, सीनियर आपके कार्य से खुश रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, यदि आप अपने प्रेमी/प्रेमिका को प्रपोज करना चाहते हैं तो 14, 19, 20 व 21 सितंबर का दिन आपके लिए शुभ रहेगा।
मेष राशिफल
माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर शश नामक योग बनाएगा अतः मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यदि आपका फाइनेंस से जुड़ा हुआ कार्य है तो यह माह आपके लिए अच्छा रहेगा, शेयर बाजार में पैसा लगाने से बचें, माह के शुरूवात में गुरु व केतु का गोचर नवम भाव से रहेगा फलस्वरूप आध्यत्म की ओर झुकाव बड़ेगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह माह अच्छा सिद्ध होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए है उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, 23 सितंबर को राहु व केतु गोचर बदलकर क्रमशः दूसरे व अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें अन्यथा बनते हुए कार्य बिगड़ सकते हैं, वाहन सावधानी से चलाएं, तामसिक चीजों से परहेज करें, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, 25 सितंबर को अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 14 सितंबर को परिवार वालों के साथ अच्छा समय बीतेगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, 19 से 21 सितंबर का समय भी आपके लिए अच्छा रहेगा, किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे व नजदीकियाँ बढ़ेंगी, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा।
मेष राशिफल
कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए सितंबर 2020 सामान्य रहेगा जिसमें किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है 10 सितंबर के बाद स्वास्थ्य का ख्याल रखें व क्रोध और वाणी पर नियंत्रण रखें, दामपत्य जीवन अधिकांश ठीक रहेगा, वाहन सावधानी से चलाएं, माह की 3, 4, 5, 17, 18, 21, 22 व 23 तिथियाँ अधिक शुभ नही है अतः इस दौरान कोई भी रिस्क लेने से बचें, मेरे अनुसार मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सूर्य को जल दें व सुंदरकांड का पाठ करें तो लाभ होगा।