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चांडाल योग: अर्थ, इतिहास और करिअर पर प्रभाव | Astrology Sutras

ज्योतिष में चांडाल योग: एक सरल व्याख्या

ज्योतिष शास्त्र में ‘चांडाल योग’ को लेकर अक्सर गलतफहमियां रहती हैं और आधुनिक ज्योतिषी इसके सही अर्थ को नजरअंदाज कर देते हैं। इस कारण इसका व्यावहारिक महत्व कम हो गया है।

शब्द का अर्थ और इतिहास

​’चांडाल’ शब्द ‘चंद’ से बना है। इसका मतलब है- उग्र, गुस्सैल, या भावुक। यानी, चांडाल का अर्थ हुआ ऐसा व्यक्ति जिसके कर्म क्रूर या कठोर हों।

​प्राचीन काल में, अलग-अलग जातियों के मेल से जन्मे बच्चों (जैसे महाभारत के कर्ण) को समाज में अक्सर अपमान सहना पड़ता था। इस मानसिक प्रताड़ना के कारण उनका स्वभाव कठोर हो जाता था। इसी कठोर स्वभाव के कारण उन्हें ‘चांडाल’ जैसे गुणों वाला कहा गया। बाद में, शूद्र पिता एवं ब्राह्मण माता की संतान को ‘चांडाल’ कहा जाने लगा। यही कारण है कि आज भी शनि ग्रह के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए इन्हीं लोगों को दान देने का नियम है।

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ज्योतिष में चांडाल योग कैसे बनता है?

ज्योतिष के प्रमुख ग्रंथों के अनुसार, कुंडली में यह योग मुख्य रूप से दो स्थितियों में बनता है:

1. जब शुक्र या चंद्रमा केंद्र में हों और राहु लग्न (पहले घर) में बैठा हो।
2. जब बृहस्पति (गुरु) के साथ राहु या केतु हों, और उन पर पापी ग्रहों की नजर हो, या बृहस्पति बहुत कमजोर हो।

इस योग का फल क्या होता है?

इस योग का सबसे मुख्य प्रभाव व्यक्ति के काम और करिअर पर पड़ता है।

पारिवारिक पेशे से दूरी: जिस व्यक्ति की कुंडली में चांडाल योग होता है, वह अपने पिता या पूर्वजों का काम नहीं अपनाता। उदाहरण के लिए, यदि पिता एक प्रसिद्ध डॉक्टर हैं, तो बेटा डॉक्टर नहीं बनेगा।

हर वर्ग पर लागू: यह नियम सिर्फ अच्छे कामों पर ही नहीं, बल्कि साधारण कार्यों पर भी लागू होता है, मतलब साधारण काम करने वाले का बेटा भी पिता का काम नहीं करेगा।

बृहस्पति का प्रभाव: यदि यह योग बृहस्पति (गुरु) के कारण बन रहा है, तो इसका असर और गहरा होता है। भले ही व्यक्ति अच्छे और संस्कारी परिवार (जैसे ब्राह्मण) में पैदा हुआ हो, वह अपने कुल की परंपराओं से हटकर काम करता है।

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अगर किसी की कुंडली में चांडाल योग है, तो यह पक्का है कि वह अपने पूर्वजों के नक्शेकदम पर नहीं चलेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वह गरीब या असफल होगा।

​अगर कुंडली मजबूत है, तो वह अपने पिता के क्षेत्र से अलग किसी दूसरे क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है। यह योग सिर्फ इतना ही बताता है कि बच्चा अपने पिता के बिजनेस या नौकरी में जाएगा या नहीं।

जय श्री राम।

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18 जनवरी को जन्में लोगों का व्यक्तित्व: स्वभाव, करियर और लव लाइफ (January 18 Birthday Personality)

18 जनवरी को जन्में लोग: “बर्फ और आग” का अद्भुत संगम

18 जनवरी को जन्में व्यक्ति शनि (Saturn) और मंगल (Mars) की ऊर्जा का एक दुर्लभ मिश्रण होते हैं इनकी सूर्य राशि मकर होती है जिनके स्वामी शनि होते हैं तो मूलांक (1+8= 9) होने से मंगल का भी विशेष प्रभाव रहता है इसलिए, इन लोगों में ‘शनि का अनुशासन’ और ‘मंगल का जोश’ दोनों देखने को मिलता है।

प्रमुख विशेषताएं (Key Personality Traits)

महत्वाकांक्षी और निडर (Ambitious & Fearless): 18 जनवरी को जन्में लोग जन्मजात योद्धा होते हैं ये जीवन में बड़ी चुनौतियों से नहीं डरते अकसर जहाँ दूसरे लोग हार मान लेते हैं वहाँ से इनकी शुरुआत होती है।

बाहर से सख्त, अंदर से नरम (Fire & Ice Personality): मकर राशि होने के कारण ये बाहर से बहुत गंभीर और सख्त दिख सकते हैं, लेकिन अंदर से ऐसे व्यक्ति बहुत भावुक और परवाह करने वाले होते हैं साथ ही इनके व्यक्तित्व में एक चुम्बकीय आकर्षण (Charisma) होता है जो लोगों को अपनी ओर खींचता है।

स्वाभिमानी (Self-Respecting): 18 जनवरी को जन्में व्यक्ति किसी के अधीन काम करना पसंद नहीं करते इन्हें अपने नियमों पर चलना पसंद होता है और यदि कोई इनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाए तो ये उसे आसानी से माफ़ नहीं करते।

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करिअर और आर्थिक जीवन (Career & Financial Life)

मंगल और शनि के प्रभाव के कारण, ऐसे उन क्षेत्रों में बहुत सफल होते हैं जहाँ पावर और अनुशासन की जरूरत होती है।

उपयुक्त करिअर: सेना, पुलिस, प्रशासन (IAS/IPS), राजनीति, इंजीनियरिंग, और रियल एस्टेट।

18 जनवरी को जन्में व्यक्ति अच्छे Team Leader और Manager साबित होते हैं।

आर्थिक स्थिति: शुरुआती जीवन में इन्हें संघर्ष करना पड़ सकता है, लेकिन 30-35 की उम्र के बाद इनकी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत हो जाती है, ऐसे व्यक्ति मेहनत की कमाई पर भरोसा करते हैं और बुढ़ापे तक काफ़ी संपत्ति बना लेते हैं।

प्रेम और वैवाहिक जीवन (Love & Marriage Compatibility)

रिश्तों में वफादारी: प्रेम के मामले में ये थोड़े रूढ़िवादी (Conservative) हो सकते हैं, ऐसे व्यक्ति फ्लर्ट करना पसंद नहीं करते और गंभीर रिश्तों की तलाश में रहते हैं।

चुनौतियाँ: इनका गुस्सैल स्वभाव (मंगल के कारण) कभी-कभी वैवाहिक जीवन में तनाव पैदा कर सकता है जिस कारण से इन्हें ऐसे साथी की जरूरत होती है जो शांत स्वभाव का हो।

बेस्ट मैच: वृषभ (Taurus), कन्या (Virgo) और कर्क (Cancer) राशि वाले लोग इनके लिए सबसे अच्छे जीवनसाथी साबित होते हैं।

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ताकत और कमजोरियाँ (Strengths & Weaknesses)

ताकत (Strength)

फौलादी इच्छाशक्ति (The Iron Will): 18 जनवरी को जन्में व्यक्ति “कभी न मरने वाली भावना” (Never-say-die spirit) के साथ पैदा होते हैं, अक्सर ऐसे व्यक्ति जितना तेजी से नीचे गिरते हैं, उतनी ही तेजी से संभलकर उठते भी हैं क्योंकि मकर राशि जहाँ गिरकर संभलने का धैर्य देती है, वहीं मंगल दोबारा लड़ने का साहस देता है, ऐसे व्यक्ति उन कामों को करना अधिक पसंद करते हैं जिन्हें दुनिया “असंभव” कहती है।

मूक महत्वाकांक्षा (Silent Ambition): ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार 18 जनवरी को जन्में व्यक्ति “पहाड़ी बकरी” (Mountain Goat) के तरह होते हैं, जो धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से पहाड़ की चोटी पर पहुँचती है अर्थात बड़ी उन्नति प्राप्त करते हैं, ऐसे व्यक्ति अपनी योजनाओं को गुप्त रखते हैं तथा एक ‘लॉन्ग टर्म विजन’ बनाकर उसके प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहते हैं।

संगठन और प्रशासन (Organizational Genius): शनि “व्यवस्था” का कारक होता है अतः अव्यवस्था (Chaos) के बीच व्यवस्था बनाने में ऐसे व्यक्ति माहिर होते हैं, चाहे वह घर का बजट हो या किसी बड़ी कंपनी का मैनेजमेंट, ऐसे व्यक्ति चीजों को सिस्टम में लाना जानते हैं और अधिकतर लोग भी संकट के समय आपकी तरफ देखते हैं क्योंकि आप परिस्थितियों से घबराते नहीं, बल्कि समाधान निकालते हैं।

कमजोरियाँ (Weaknesses)

आंतरिक द्वंद्व (The Internal Conflict): ऐसे व्यक्तियों के अंदर एक युद्ध सा चलता रहता है, मंगल कहता है— “अभी करो, तुरंत करो!” और शनि कहता है— “रुको, सोचो और फिर करो।” जिस कारण से कारण ऐसे व्यक्ति अक्सर मानसिक तनाव (Mental Anxiety) और अनिद्रा का शिकार हो जाते हैं साथ ही कभी-कभी बाहर से बहुत शांत दिखते होने पर भी, अंदर से ज्वालामुखी की तरह उबल रहे होते हैं, यह दमित ऊर्जा (Repressed Energy) स्वास्थ्य के लिए कई बार बड़ी दिक्कतें देने वाली भी होती हैं।

क्षमा न कर पाना (Unforgiving Nature): मंगल एक “योद्धा” है, और एक योद्धा अपने शत्रुओं को नहीं भूलता जिस कारण से यदि कोई आपके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचा दे, तो आप उसे शायद ही कभी माफ़ करते हैं, आप बदला लेने की भावना नहीं रखते तो भी, उस व्यक्ति के लिए अपने दिल के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर देते हैं, यह स्वभाव कभी-कभी आपको अपनों से दूर भी कर देता है।

अत्यधिक भौतिकवाद (Materialistic Tendencies): मकर राशि पृथ्वी तत्व (Earth Sign) है जिस कारण से कभी-कभी ऐसे व्यक्ति सफलता को केवल ‘पैसे’ और ‘पद’ से तोलने लगते हैं और करिअर की दौड़ में अक्सर अपने परिवार, भावनाओं और छोटी-छोटी खुशियों को नजरअंदाज करते हैं।

18 जनवरी को जन्में व्यक्तियों के शुभ तत्व (Lucky Elements for Jan 18 Born)

शुभ रंग: गहरा लाल (Maroon) और नीला।
शुभ दिन: मंगलवार और शनिवार।
शुभ अंक: 9, 18, 27 और 8।
शुभ रत्न (Gemstone): नीलम (Blue Sapphire) या गार्नेट (Garnet)।

विशेष:- कोई भी रत्न बिना कुंडली दिखाए पहनने पर नुकसान भी करता है अतः कुंडली या हाथ दिखाकर एवं उचित परामर्श लेकर ही रत्न धारण करें।

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18 जनवरी को जन्में व्यक्ति “Self-Made” होते हैं इनका जीवन संघर्षों से भरा रहता है लेकिन हर संघर्ष के बाद एक बड़ी उन्नति भी प्राप्त होती है साथ ही ऐसे व्यक्ति समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं और अक्सर उच्च पदों पर पहुँचते हैं।

जय श्री राम।

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तुला राशि: जानिए, तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

तुला राशि: जानिए, तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

तुला राशि वाले व्यक्ति देवताओं और ब्राह्मणों के भक्त किंतु चंचल स्वभाव और कृश शरीर वाले होते हैं, ऐसे व्यक्तियों का कद सामान्यतः लंबा होता है तथा ऐसे व्यक्ति खरीद-फरोख्त में होशियार, धैर्यवान, इंसाफ पसंद करने वाले तथा प्रायः दो नाम वाले होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्ति घूमने-फिरने के शौकीन होते हैं, इनकी संतान प्रायः कम ही होती है साथ ही तुला राशि वालों का भाग्योदय कुछ विलंब के साथ होता है, तुला राशि वाले व्यक्ति भोगी, धार्मिक, चतुर, बुद्धिमान, कला में कुशल, राजा प्रिय, पितृ सेवी, वस्तुओं का संग्रह करने वाले, विद्वान, धनी, अत्यंत बोलने वाले, मित्रों से युक्त, संगीत, कविता व युद्ध के प्रेमी, सभा-सोसाइटी और कंपनी इत्यादि में रुचि रखने वाले, अपने जीवन के प्रत्येक कार्य में अन्य किसी पर भरोसा रखने वाले, लंबे कद वाले, बलवान, उन्नत नासिका वाले और वायु प्रकृति से पीड़ित होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्तियों को सर, उदर एवं चर्म रोग संभव रहता है साथ ही इन्हें जल भय भी रहता है, तुला राशि वाले व्यक्ति स्त्री के अधीन, बहु स्त्री भोगी अर्थात दो विवाह करने वाले, कृषि करने में चतुर तथा क्रय-विक्रय से लाभ प्राप्त करने वाले होते हैं।

 

तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए १, ३, ५, ६, १५, २५, २६, ३६, ४६ व ५६ वां वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में ज्वर, तृतीय वर्ष में अग्नि भय, वें वर्ष में ज्वर पीड़ा, १५ वें वर्ष में सामान्य पीड़ा और २५ वें वर्ष में अधिक पीड़ा रहती है, यदि चंद्रमा को शुभ ग्रह देखते हैं और आयु सुख को करने वाले अन्य योग न बनते हो और उपर्युक्त बताए गए वर्षों को पार कर लें तो ८५ वर्ष की औसत आयु प्राप्त करते हैं कुछ ग्रंथकारों के अनुसार तुला राशि वाले व्यक्तियों की आयु ६५ वर्ष ११ माह की होती है तथा इन्हें मृत्यु उपरांत ख्याति अवश्य ही मिलती है, तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी तिथि अनिष्टकारी होती है तथा मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि वालों से मित्रता एवं कर्क व सिंह राशि वालों से शत्रुता रहती है, रत्नों में इनके लिए हीरा शुभदायी होता है, वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, अष्टमी तिथि, शुक्रवार व आश्लेषा नक्षत्र और दिन का प्रथम प्रहर इनके लिए अनिष्टकारी होता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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भृगु सूत्र आधारित सूर्य का तृतीय भाव में फल

भृगु सूत्र आधारित सूर्य का तृतीय भाव में फल

 

तृतीय भाव में सूर्य का फल
तृतीय भाव में सूर्य का फल

 

अनेक ग्रंथों में सूर्यादि सभी ग्रहों के विभिन्न स्थानों में फल बताएं गए हैं पिछले लेख में मैंने भृगु सूत्र आधारित सूर्य के प्रथम भाव व द्वितीय में फल को बताया था अतः उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सूर्य के तृतीय भाव में फल को लिख रहा हूँ:-

 

 

भृगु सूत्र आधारित प्रथम भाव में सूर्य के फल को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं:-

 

भृगु सूत्र आधारित  प्रथम भाव में सूर्य का फल

 

१. यदि कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति बुद्धिमान होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों को अनुजों (छोटे भाइयों) का अभाव रहता है साथ ही बड़ा भाई तो होता है किंतु बड़े भाई के सुखों में त्रुटि रहती है और ऐसे व्यक्तियों को उम्र के ४, ५, ८ अथवा १२वें वर्ष में कुछ पीड़ा होती है।

 

२. यदि कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य पाप ग्रह से युक्त होकर बैठा हो तो व्यक्ति क्रूर कर्मों को करने वाला होता है तथा उसके दो भ्राता होते हैं साथ ही ऐसा व्यक्ति पराक्रमी तथा लड़ाई-झगड़े से न घबराने वाला और कीर्तिमान व अपने द्वारा अर्जित धन का भोग करने वाला होता है।

 

३. यदि तृतीय भाव में सूर्य शुभ ग्रहों से युक्त हो तो व्यक्ति के सहोदर भाइयों की अच्छी उन्नति व वृद्धि होती है।

 

४. यदि तृतीय भाव में सूर्य हो और तृतीयेश/पराक्रमेश बली अवस्था में बैठा हो या तृतीय भाव में सूर्य स्वराशि स्थित हो तो व्यक्ति अत्यंत पराक्रमी, खुद के पराक्रम से संपूर्ण सुख भोगने वाला, उच्च पद पर आसीन होने वाला, राजा या उच्चाधिकारी द्वारा सम्मानित होता है तथा ऐसे व्यक्तियों के भाई दीर्घायु होते हैं।

 

५. यदि तृतीय भाव में सूर्य स्थित हो और तृतीयेश/पराक्रमेश पाप ग्रहों से युक्त व दृष्ट हों तो व्यक्ति आलस्य करने वाला व पाप कर्म करने वाला होता है तथा ऐसे व्यक्तियों के भाइयों का नाश होता है।

 

६. यदि तृतीय भाव में सूर्य स्थित हो और उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति धनवान, भोगी तथा सुखी होता है।

 

भृगु सूत्र आधारित द्वितीय भाव में सूर्य के फल को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं:-

 

भृगु सूत्र आधारित सूर्य का द्वितीय भाव में फल

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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सितंबर 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

सितंबर 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न कुंडली

 

मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए सितंबर 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरूवात में मंगल का लग्न से गोचर रूचक नामक पंचमहापुरुष योग बनाएगा जिस पर गुरु की दृष्टि भी रहेगी फलस्वरूप स्वास्थ्य में सुधार होगा, खुद को ऊर्जावान अनुभव करेंगे, नई चुनातियों का सामना करना पड़ सकता है व इन चुनौतियों पर विजय प्राप्त करते हुए उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, क्रोध पर नियंत्रण रखें, 10 सितंबर को मंगल वक्री हो जाएंगे अतः स्वास्थ्य में कुछ परेशानियाँ अनुभव होगी, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है जिस कारण से मन अप्रसन्न रहेगा, जीवनसाथी से क्षणिक विवाद संभव रहेगा, माह के शुरुवात में सूर्य व बुध का पंचम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, संतान का सहयोग प्राप्त होगा किंतु संतान के स्वास्थ्य में कुछ परेशानियाँ संभव रहेगी, 2 सितंबर को बुध गोचर बदलकर आपके छठे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर बुद्धि व विवेक द्वारा विजय प्राप्त होगी, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त होने के योग बनेंगे, 16 सितंबर को सूर्य भी गोचर बदलकर आपकी कुंडली के छठे भाव में आ जाएंगे अतः सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, ज्वर, सर दर्द, नेत्रों में जलन/दर्द की समस्या रह सकती है, 22 सितंबर को बुध पुनः गोचर बदलकर आपकी कुंडली के सप्तम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, जिनका कार्य बैंकिंग व फाइनेंस से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा, माह के शुरुवात में शुक्र का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा अतः घर में किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, सीनियर आपके कार्य से खुश रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, यदि आप अपने प्रेमी/प्रेमिका को प्रपोज करना चाहते हैं तो 14, 19, 20 व 21 सितंबर का दिन आपके लिए शुभ रहेगा।

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर शश नामक योग बनाएगा अतः मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यदि आपका फाइनेंस से जुड़ा हुआ कार्य है तो यह माह आपके लिए अच्छा रहेगा, शेयर बाजार में पैसा लगाने से बचें, माह के शुरूवात में गुरु व केतु का गोचर नवम भाव से रहेगा फलस्वरूप आध्यत्म की ओर झुकाव बड़ेगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह माह अच्छा सिद्ध होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए है उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, 23 सितंबर को राहु व केतु गोचर बदलकर क्रमशः दूसरे व अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें अन्यथा बनते हुए कार्य बिगड़ सकते हैं, वाहन सावधानी से चलाएं, तामसिक चीजों से परहेज करें, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, 25 सितंबर को अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 14 सितंबर को परिवार वालों के साथ अच्छा समय बीतेगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, 19 से 21 सितंबर का समय भी आपके लिए अच्छा रहेगा, किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे व नजदीकियाँ बढ़ेंगी, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा।

 

Mesh rashi
मेष राशिफल

 

कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए सितंबर 2020 सामान्य रहेगा जिसमें किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है 10 सितंबर के बाद स्वास्थ्य का ख्याल रखें व क्रोध और वाणी पर नियंत्रण रखें, दामपत्य जीवन अधिकांश ठीक रहेगा, वाहन सावधानी से चलाएं, माह की 3, 4, 5, 17, 18, 21, 22 व 23 तिथियाँ अधिक शुभ नही है अतः इस दौरान कोई भी रिस्क लेने से बचें, मेरे अनुसार मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सूर्य को जल दें व सुंदरकांड का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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अंतर्दशा निकालने की सबसे सरल विधि—-Astrology Sutras

अंतर्दशा निकालने की सबसे सरल विधि—-Astrology Sutras

 

दशा और आपके प्रश्न
दशा और आपके प्रश्न

 

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सरल विधि—-Astrology Sutras

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सबसे सरल विधि जानें, कैसे ज्ञात किया जाए कि व्यक्ति का जन्म किस दशा में हुआ है व उस दशा का भोग्यवर्ष क्या होगा।

 

प्रत्येक ग्रह की दशा में ९ ग्रह की अंतर्दशा होती है जैसे सूर्य की महादशा में पहली अंतर्दशा सूर्य की, दूसरी चंद्र की, तीसरी मंगल की, चतुर्थ राहु की, पांचवीं गुरु की, छठी शनि की, सातवीं बुध की, आठवीं केतु की व नौवीं शुक्र की इसी प्रकार अन्य ग्रहों में भी समझना चाहिए आशय यह है कि जिस ग्रह की दशा हो उससे सूर्य, चंद्र, भौम के क्रमानुसार अन्य नवग्रहों की अन्तर्दशाएँ होती हैं।

 

अंतर्दशा निकालने का एक सबसे सरल नियम यह है कि दशा-दशा का परस्पर गुणा कर १० से भाग देने से लब्ध मास और शेष को ३ से गुणा करने से दिन होंगे

 

विंशोत्तरी दशा वर्ष:-

 

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सरल विधि—-Astrology Sutras

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सबसे सरल विधि जानें, कैसे ज्ञात किया जाए कि व्यक्ति का जन्म किस दशा में हुआ है व उस दशा का भोग्यवर्ष क्या होगा।

 

१. सूर्य:- ६ वर्ष
२. चंद्र:- १० वर्ष
३. मंगल:- ७ वर्ष
४. राहु:- १८ वर्ष
५. गुरु:- १६ वर्ष
६. शनि:- १९ वर्ष
७. बुध:- १७ वर्ष
८. केतु:- ७ वर्ष
९. शुक्र:- २० वर्ष

 

उदहारण:-

 

सूर्य की दशा में अंतर्दशा निकालनी हो तो सूर्य के दशा वर्ष का सूर्य के ही दशा वर्षों से गुणा किया तो:-

 

६×६= ३६

३६÷१०= ३ मास, शेष ६

६×३= 18 दिन

अर्थात ३ मास १८ दिन सूर्य की अंतर्दशा रहेगी।

 

इसी तरह सूर्य की दशा मे अन्य ग्रहों की अंतर्दशा:-

 

चंद्रमा:-

 

६×१०= ६०, ६०÷१०=मास

 

मंगल:-

 

६×७= ४२, ४२÷१०= मास शेष , २×३= ६ दिन अर्थात मास दिन

राहु:-

 

६×१८= १०८, १०८÷१०= १० मास शेष ८, ८×३= २४ दिन अर्थात १० मास २४ दिन

 

गुरु:-

 

६×१६= ९६, ९६÷१०= ९ मास शेष ६, ६×३= १८ दिन अर्थात मास १८ दिन

 

शनि:-

 

६×१९= ११४, ११४÷१०= ११ मास शेष , ४×३= १२ दिन अर्थात ११ मास १२ दिन

 

बुध:-

 

६×१७= १०२, १०२÷१०= १० मास शेष , २×३= ६ दिन अर्थात १० मास दिन

 

केतु:-

 

६×७= ४२, ४२÷१०= ४ मास शेष , २×३= ६ दिन अर्थात मास दिन

 

शुक्र:-

 

६×२०= १२०, १२०÷१०= १२ मास अर्थात वर्ष

 

इसी तरह से अन्य ग्रहों की दशा में भी अंतर्दशा निकाली जाती है।

 

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सरल विधि—-Astrology Sutras

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सबसे सरल विधि जानें, कैसे ज्ञात किया जाए कि व्यक्ति का जन्म किस दशा में हुआ है व उस दशा का भोग्यवर्ष क्या होगा।

 

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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जुलाई 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

जुलाई 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न कुंडली

 

मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए जुलाई 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य, बुध व राहु आपके तीसरे भाव से गोचर करेंगे अतः आवेश में आने से बचें, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा 16 जुलाई को सूर्य गोचर बदलकर आपके चतुर्थ भाव में चले जाएंगे फलस्वरूप माता के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, तनाव लेने से बचें, जिन्हें हिर्दय जनित कोई रोग हो या जिन्हें छाती में दर्द की समस्या रहती हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, संतान पर धन व्यय होगा, माह के शुरुवात में मंगल का द्वादश भाव से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें व जल्दबाजी में कोई भी निर्णय न लें क्योंकि इस माह आपके अधिकतर निर्णय गलत सिद्ध हो सकते हैं अतः सोच-समझकर ही कोई निर्णय लें, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, कोई भी रिस्क लेने से बचें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें।

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर शश नामक योग बनाएगा किंतु शनि के वक्री अवस्था में गोचर करने के कारण से मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यदि आपका फाइनेंस से जुड़ा हुआ कार्य है तो यह माह आपके लिए अच्छा रहेगा, शेयर बाजार में पैसा लगाने से  बचें, माह के शुरूवात में गुरु व केतु का गोचर नवम भाव से रहेगा फलस्वरूप आध्यत्म की ओर झुकाव बड़ेगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह माह अच्छा सिद्ध होगा, 1 से 4 जुलाई 12 जुलाई को विशेष सावधानी बरतें व इनमें कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें, धोखा मिल सकता है, तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, 5 से 10 जुलाई का समय आपके लिए अच्छा सिद्ध होगा इनमें जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे व नजदीकियाँ बढ़ेंगी, कोई नया अवसर प्राप्त हो सकता है, किसी उच्च अधिकारी से मुलाकात भी संभव रहेगी, 11 से 16 जुलाई का समय विशेष 12 जुलाई का समय अधिक शुभ नही है अतः यह समय थोड़ा सावधान रहें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, 17 से 23 जुलाई के मध्य आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा व धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे या धार्मिक अनुष्ठान पर धन व्यय होगा, यह समय विद्यार्थियों के लिए बहुत शुभ रहेगा, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व अपने प्रेम का इजहार करना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा, 24 से 31 जुलाई तक का समय कार्यक्षेत्र के लिए सामान्य रहेगा जिसमें कार्य को लेकर लंबे समय से जो तनाव था उसमें राहत मिलेगी, यदि आप नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो 15 अगस्त तक इंतजार कर लें।

 

Mesh rashi
मेष राशिफल

 

कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए जुलाई 2020 सामान्य रहेगा जिसमें पराक्रम में वृद्धि होगी, छोटे भाई-बहन से विवाद संभव रहेगा, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, आवेश में आने व तनाव लेने से बचें, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, यदि आप लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो कुछ समय और रुक जाएं, कोई भी रिस्क लेने से बचें व कोई भी निर्णय बहुत सोच-समझकर लें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है माह की 1, 2, 3, 4, 11, 12, 13, 14, 15 व 16 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि मंगलवार का व्रत कर हनुमान जी की उपासना करें व नित्य गाय को रोटी, गुड़ व चने की दाल खिलाएं तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

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