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विक्रम संवत् २०७९ का सम्वत्सर फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार इस वर्ष के प्रारंभ में “राक्षस” नामक संवत्सर रहेगा, वैशाख कृष्ण १३ गुरुवार दिनांक २८ अप्रैल २०२२ को २५|२९ इष्ट (दिन ३:४५) पर “नल” नामक संवत्सर का प्रवेश होगा किंतु वर्ष पर्यन्त संकल्पादि में “राक्षस” संवत्सर का ही विनियोग करना चाहिए, इस वर्ष के राजा “शनि” तथा मंत्री “गुरु” हैं, राजा तथा मंत्री में परस्पर समभाव है परंतु इस वर्ष राजा शनि है इसलिए प्रजा को कई प्रकार के कष्टों से गुजरना पड़ सकता है, जगल्लग्न के विचार से लग्नेश बुध, सूर्य व राहु के साथ हैं अतः प्रजा के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं बनेंगी, अमेरिका को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, गुरु पर शनि की दृष्टि से विमान दुर्घटना या भयंकर प्राकृतिक प्रकोप से हानि होगी, शनि व मंगल का द्विदादश योग विश्व के कुछ राष्ट्रों में किसी विषय को लेकर स्थिति उग्र रूप धारण कर सकती है मित्र देशों में भी राजनयिक संबंध अकस्मात बिगड़ सकते हैं ऐसी स्थिति में राष्ट्रों के ध्रुवीकरण की प्रवृत्ति जोर पकड़ेगी।

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ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वर्ष लग्न के विचार लग्नेश नीच राशि में है और शनि की दृष्टि होने से यह ग्रह स्थिति विश्व में अघटित घटना चक्र का आभास कराएगी और किसी राष्ट्र विशेष में भूकम्प, जलप्लव आदि प्राकृतिक प्रकोप से जन-धन की हानि होगी, यूरोपीय देशों की ग्रह स्थिति से पश्चिम जर्मनी, फ्रांस, इटली, रोम, स्प्रेन, ब्रिटेन, आयरलैंड में कहीं भूकम्प आदि प्राकृतिक प्रकोप होगा, मुस्लिम राष्ट्रों में आंतरिक संघर्ष से सत्ता परिवर्तन के योग हैं, नव वर्ष प्रवेश में भारत की प्रभाव राशि मकर है लेकिन वृश्चिक लग्न में नव वर्ष का उदय होने से पश्चिमी प्रांत विशेष में कहीं ९ मास तक दुर्भिक्ष की स्थिति बनी रहेगी, उत्तर में विपरीत जलवायु के कारण फसलें प्रभावित होंगी, सोना-चांदी धातु में महँगाई अधिक बढ़ेगी, लोगों में विविध प्रकार के रोगों की व्याप्ति अधिक होगी, चोरी-डकैती, लूटमार एवं भ्रष्टाचार की वारदातें अधिक घटित होंगी।

 

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार आर्द्राप्रवेशाङ्ग के विचार से आर्द्रा प्रवेश कुंडली में धनु लग्न है, लग्नेश गुरु सुख भाव में जलराशि में हैं एवं चंद्र भी जल राशि में है भारत के पश्चिमी एवं पूर्वी भागों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश, हरियाणा व पंजाब आदि के अधिक क्षेत्रों में गर्मी का तापमान अधिक रहेगा व भीषण गर्मी पड़ेगी, पश्चिमी-पूर्वी भारत में मानसून की वर्षा तय समय पर होगी तो कहीं दुर्भिक्ष सूखा पड़ेगा इसलिए समाज व सरकार को सावधान रहने की आवश्यकता है, जलीय ग्रह शुक्र स्वराशि होकर बुध के साथ हैं अतः कहीं भूस्खलन आदि प्राकृतिक प्रकोप से हानि होगी, शारदधान्य एवं ग्रैष्मिकधान्य के विचार से शरद ऋतु की फसलें पर्याप्त होंगी, ग्रीष्मकाल की फसलों में प्राकृतिक प्रकोप से हानि संभव है।

Astrologer:- Pooshark Jetly
Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)
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