लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

यदि लग्न कुंडली के तृतीय भाव में हो तो शास्त्रकारों का मत है कि ऐसा व्यक्ति कुशाग्र बुद्धि वाला, पराक्रमी, बली, प्रिय भाषी अर्थात मधुर वचन बोलने वाला, साफ मन वाला अर्थात स्वच्छ चित्त वाला, वाहन व नौकरों से सुशोभित व तेजस्वी होता है और इनके भाईयों की संख्या प्रायः कम ही होती है, यदि तृतीय भाव में सूर्य हो तो अग्रज भाई का नाश होता है व सहोदर भाई की अल्पता और चचेरे भाई बहु संख्यक होते हैं, ऐसे व्यक्ति धनवान और द्रव्य विशिष्ट होते हैं उसे ५ वें वर्ष में पशु से भय और २० वें वर्ष में अर्थ की प्राप्ति होती है।
मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति बलवान, शूरवीर, धनी और उदार होता है किंतु अपने (संबंधी) लोगों से शत्रुता रखता है, मानसागरी में कहा गया है कि यदि लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य हो तो:-
सहजभुवनसंस्थे भास्करे भ्रातृनाश: प्रियजन हितकारी पुत्रधाराभियुक्त:।
भवति च धनयुक्तो धैर्ययुक्त: सहिष्णु: विपुल धनविहारी नागरीप्रीतिकारी।।
अर्थात यदि लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो उसके भाइयों का नाश होता है किंतु ऐसे व्यक्ति अपने प्रियजनों का हित चाहने वाले होते हैं और इन्हें स्त्री व पुत्र दोनो सुख प्राप्त होते हैं, ऐसे व्यक्ति धनवान, धैर्यवान तथा दूसरों का उत्कर्ष देखकर प्रसन्न होने वाले होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति अतिव्ययी होते हैं तथा सुंदर लड़कियों का इनके प्रति आकर्षण रहता है।
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति अत्यंत धनी, समाज सेवा हेतु सदैव तत्पर, दयालु, उदार, अत्यधिक धन खर्च करने वाला, अत्यंत आकर्षक शक्ति वाला, प्रतापी, पराक्रमी, तीर्थ यात्रा करने वाला, शत्रुओं पर विजयी किंतु अग्रज के सुखों से वंचित रहता है, वृहत्त्पराशर होराशास्त्र में लिखा है कि “अग्रेजातं रवि: हन्ति” अर्थात तृतीय भाव का सूर्य बड़े भाई के लिए मारक होता है, यदि तृतीय भाव में सूर्य यदि मेष राशि का हो तो व्यक्ति दुर्बल विचारों वाला, आलसी, शरीर को कष्ट न देने वाला, बातूनी, निरुधमी और उपद्रवकारी होता है किंतु शेष पुरुष राशि का सूर्य यदि तृतीय भाव में हो तो व्यक्ति शांत, विचारशील, बुद्धिमान, सामाजिक, शिक्षासंबंधी तथा राजकीय कार्यों में भाग लेने वाला, नेता, स्थानीय स्तर पर स्वराज्य संस्था चलाने वाला, लोकल बोर्ड आदि में चुनाव लड़ने वाला, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद की प्राप्ति करने वाला, बड़ी कम्पनियों में उच्च पद पर आसीन, तथा राजा के समान कर्म व पराक्रम करने वाला होता है और इनके नीचे कार्यरत व्यक्ति इनसे प्रसन्न रहते हैं, पुरुष राशि का तृतीय भावगत सूर्य बड़े भाई के लिए मारक होता है जिस कारण से प्रायः बड़े भाई की मृत्यु २२ वें वर्ष तक हो जाती है किंतु यदि बड़े भाई की जन्म कुंडली में दीर्घायु योग हों तो ऐसी अवस्था में बड़े भाई की मृत्यु नही होती अपितु कुछ कष्ट बने रहते हैं या दोनो भाईयों में वैचारिक मतभेद होते रहते हैं तथा दोनो भाईयों के एक ही स्थान पर रहने से उन्नति न होती व घर के वातावरण में तनावपूर्ण माहौल बना ही रहता है, यदि पुरुष राशि का सूर्य तृतीय भाव में हो तो संपत्ति विभाजन शांतिपूर्ण तरह से हो जाता है किंतु यदि स्त्री राशि का सूर्य तृतीय भाव में हो तो संपत्ति विभाजन के लिए कोर्ट में मुकदमें चलते हैं, यदि तृतीय भाव में सूर्य मिथुन, तुला व धनु राशि का हो तो व्यक्ति लेखक, प्रकाशक, प्रोफेसर और वकील होता है या इनमें रुचि रखता है, यदि कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो प्रायः व्यक्ति अपने माता-पिता का या तो सबसे बड़ी संतान होती है या फिर वह इकलौती संतान होती है, स्त्री राशि का सूर्य यदि तृतीय भाव में हो शुभ फल मिलते हैं किंतु संपत्ति विभाजन के लिए कोर्ट में मुकदमा लड़ते हैं।
जय श्री राम।
Astrologer:- Pooshark Jetly
Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)
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