मेष लग्न कुंडली में कुछ ग्रहों का संबंध विशेष शुभफलदायी होता है चलिए आज उनमें से कुछ ग्रह संबंध को समझते हैं जो कि अनुभव में भी शत-प्रतिशत सही बैठते हैं:-
1. मेष लग्न कुंडली में मंगल-सूर्य या सूर्य-चंद्र दोनों का संबंध प्रबल राजयोगकारक होता है, क्योंकि सूर्य-चन्द्र व सूर्य-मंगल का संबंध त्रिकोण और केंद्र का होगा।
2. मेष लग्न कुंडली में गुरु-शनि का संबंध सामान्य राजयोग बनाएगा और व्यक्ति की उन्नति विशेष होगी लेकिन मेष लग्न कुंडली में गुरु व्ययेश अर्थात व्यय भाव के भी मालिक है और शनि आय भाव के मालिक है अतः आयेश-व्ययेश संबंध होने से इस राजयोग का प्रभाव कमजोर रहता है।
3. यदि मेष लग्न कुंडली के दूसरे, दसवें या ग्याहरवें घर में मंगल हो और सूर्य से संबंध बनाता हो तो व्यक्ति डॉक्टरी शिक्षा में विशेष निपुणता प्राप्त कर सफल और प्रसिद्ध डॉक्टर बनता है।
4. मेष लग्न कुंडली के दशम भाव में गुरु अकेला हो और किसी प्रकार से किसी भी ग्रह से संबंध न रखता हो तो वह अपनी महादशा-अंतर्दशा में मारकेश होने का भी फल करेगा साथ ही रक्त/खून व हिर्दय से संबंधित प्रबलरोग भी देता है, गुरु-शनि साथ बैठे हों तो व्यक्ति सामान्य से अधिक अच्छी स्थिति में होता है।
5. मेष लग्न कुंडली में गुरु-शुक्र नवम भाव में हो तो व्यक्ति कलाकार होता है और उच्चस्तरीय ख्याति प्राप्त करता है, क्योंकि शुक्र धन भाव का मालिक बनकर भाग्य स्थान में भाग्येश गुरु के साथ बैठेंगे जो धन व मान-सम्मान की उत्तम स्थिति को दर्शाता है।

उदहारण के तौर पर दिलीप कुमार (प्रसिद्ध अभिनेता) की कुंडली में गुरु-शुक्र भाग्य स्थान पर बैठे हैं, दूसरा भाव वाणी और कला का होता है शुक्र जिनके कारक ग्रह भी है और भाग्येश के साथ भाग्य स्थान पर होने के कारण से दिलीप कुमार जी को अच्छा कलाकार और रंगमंच पर प्रसिद्धि देने के योग बनाता है।
6. मेष लग्न कुंडली में बुध-मंगल का संबंध मानसिक रोगी (न्यूरो पेशेंट) बनाता है, ऐसे व्यक्ति को अधिकतर सर दर्द की शिकायत देखने को मिलती है।
7. मेष लग्न कुंडली दूसरे भाव में मंगल, शुक्र व गुरु का संबंध व्यक्ति को श्रेष्ठ व्यापारी और अत्यंत धनी बनाता है किंतु जीवन के प्रारंभिक भाग में काफी कड़ा संघर्ष भी रहता है किंतु धन स्थान पर धनेश-भाग्येश-लग्नेश संबंध है तो व्यक्ति निश्चय ही प्रसिद्ध होगा।
“भावार्थ रत्नाकर” नामक ज्योतिष ग्रंथ में इस अनुभव की पुष्टि देखने को मिलती है उसमें कहा गया है कि:-
“मेषे जातस्य भौमस्तु गुरु-शुक्र समन्वित्।
द्वितीये यदि विद्येत योगदो भवति ध्रुवम्।।”
8. यदि मेष लग्न कुंडली के पंचम भाव में मंगल हो तो व्यक्ति मेडिकल एजेंट, चिकित्सक, डॉक्टर या चिकित्सा के क्षेत्र में निपुण होता है और मंगल अपनी महादशा में विशेष उन्नति प्रदान करने वाले ग्रह होंगे।
9. मेष लग्न कुंडली के अष्टम भाव में मंगल, शुक्र व सूर्य हो तो व्यक्ति विदेश यात्रा करता है क्योंकि दो कारक ग्रहों व मंगल का संबंध धनेश से होगा।
10. मेष लग्न कुंडली की महिला हो और प्रसवकाल निकट हो तो मंगल के प्रत्यंतर सूक्ष्म दशा में बच्चे के जन्म की अत्यधिक प्रबल संभावना बनती है।
जय श्री राम।
