मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग २

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मेष लग्न की कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल:-

तीसरे भाव से भाई-बहन व पराक्रम का विचार किया जाता है जहाँ अपने मित्र बुध की राशि पर सूर्य के बैठे होने के कारण से उच्च शिक्षा प्राप्ति के योग बनते हैं व बैद्धिक क्षमता काफी अच्छी रहती है तथा ऐसे जातक/जातिका हर स्थिति में तुरंत निर्णय लेने में सक्षम होते हैं साथ ही इनके पराक्रम व पुरुषार्थ में काफी वृद्धि होती है अर्थात ऐसे व्यक्ति बहुत मेहनती होते हैं साथ ही इनके दिमाग व वाणी में भी तेजी रहती है और सातवीं दृष्टि से भाग्य व धर्म स्थान को मित्र गुरु की राशि में देखने के कारण से ऐसे व्यक्ति बुद्धि व विवेक शक्ति द्वारा भाग्य वृद्धि करने में सफल होते हैं तथा धर्म का मनन व पालन करते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों की ईश्वर और धर्म में निष्ठा बनी रहती है।
मेष लग्न की कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल:-

चतुर्थ भाव से माता, भूमि, वाहन व मानसिक स्थिति का विचार किया जाता है जहाँ सूर्य अपने मित्र चंद्र की कर्क राशि में बैठा होने के कारण से सुखपूर्वक विद्या प्राप्ति के योग बनता है तथा ऐसे व्यक्तियों संतान का उत्तम सुख प्राप्त होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति बुद्धि के अंदर तेजी रहते हुए भी शांति धारण किए रहते हैं व बुद्धि की योग्यता से भूमि-मकानादि का सुख भी प्राप्त करते हैं और सातवीं दृष्टि से दशम भाव को अपने शत्रु शनि की मकर राशि में देखने के कारण से पिता के संबंध में कुछ वैमनस्यता प्राप्त करेंगे तथा राज्य के मार्ग में कुछ नीरसता रहते हुए भी समाज में कुछ मान व प्रतिष्ठा प्राप्त होगी।
जय श्री राम।
Astrologer:- Pooshark Jetly
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