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धनतेरस 2025: जानिए खरीददारी व पूजन शुभ मुहूर्त्त

कार्तिक माह के कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस, धन्वंतरि जयंती के रूप में मनाते हैं जिसे धन त्रयोदशी और यमदीपदान त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है, स्कंदपुराण के वैष्णव खण्ड के 52 वें अध्याय के अनुसार:-

कार्तिकस्य तु मासस्य कृष्णपक्षे त्रयोदशी।

यमदीपं प्रयच्छेत प्रीत्यर्थं प्रेत्य न याम्यगः॥

अर्थात्:- कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को यमराज के लिए दीपदान करना चाहिए, ऐसा करने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद यमलोक के कष्टों से मुक्त रहता है।

धर्मसिंधु व निरण्यामृत के अनुसार:-

।।धन्वन्तरिजयन्त्यां स्नानदानजपहोमादिकं विधिवत् कुर्यात्।।

अर्थात्:- धन्वन्तरि जयन्ती के दिन स्नान, दान, जप, होम आदि शास्त्रविधि से करना चाहिए।

वर्ष 2025 में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी 18 अक्टूबर को दोपहर 01:21 पर लग रही है जो 19 अक्टूबर रविवार को दोपहर 01:55 तक रहेगी, इसी दिन शनि प्रदोष (पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाने वाला व्रत) का अद्भुत संयोग बन रहा है।

खरीददारी का शुभ मुहूर्त्त:-

धनतेरस अर्थात् 18 अक्टूबर को दोपहर 01:21 पर त्रयोदशी तिथि लग रही है यह पर्व धनागमन और पूजन के लिए विशेष होता है इसलिए खरीददारी के लिए दोपहर 01:22 बाद का पूरा दिन शुभ है, फिर भी खरीदा गया धन व संपत्ति लंबे समय तक स्थिर बनी रहे इसके लिए स्थिर लग्न की प्रधानता होती है अतः स्थिर लग्न में सोना, चाँदी, सोने-चाँदी से बने आभूषण, गृह, संपत्ति, वाहन, गृहप्रवेश व विवाह आदि करना शुभ होता है।

प्रथम मुहूर्त्त:- दोपहर 02:42 से शाम 04:13 तक कुंभ लग्न में।

द्वितीय मुहूर्त्त:- शाम 07:18 से रात्रि 09:14 तक वृषभ लग्न में।

 

धनतेरस पूजन शुभ मुहूर्त्त:-

स्थिर लग्न में भगवान गणेश, धन्वन्तरि, माँ लक्ष्मी व कुबेरादि का पूजन स्थिर प्रभाव देने वाला होता है, पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान धन्वन्तरि, माँ लक्ष्मी व कुबेर आदि का पूजन करने से वर्ष भर घर में धन-धान्य एवं समृद्धि बनी रहती है लक्ष्मी तंत्र में कहा भी गया है:-

त्रयोदश्यां तु यः पूज्यां लक्ष्मीं धान्यसमन्विताम्।
तस्य कुबेरसहिता सदा वासं प्रयच्छति॥

अर्थात्:- त्रयोदशी तिथि के दिन लक्ष्मी व कुबेरादि पूजन से धन-धान्य व संपत्ति सदा बनी रहती है।

18 अक्टूबर 2025 को सूर्यास्त शाम 05:42 पर होगा अतः प्रदोषकाल रात्रि 08:06 तक पूजन से जुड़े सभी कार्य संपन्न कर लेना अत्यंत शुभ रहेगा जिससे माँ लक्ष्मी व गणेश जी का वास भी स्थिर रहे एवं गणेश, लक्ष्मी, धन्वन्तरि व कुबेरादि पूजन मुहूर्त्त शाम 07:18 से रात्रि 09:14 तक वृषभ लग्न में रहेगा।

Astrologer Pooshark Jetly

(Founder of Astrology Sutras)