कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के रूप में मनाते हैं जिसे हरि प्रोबिधिनी एकादशी भी कहते हैं, इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा से बाहर आते हैं जिससे चातुर्मास का अंत भी होता है तथा सभी मांगलिक कार्यक्रम जैसे विवाह व गृहप्रवेश जैसे कृत्य शुरू हो जाते हैं, साथ ही इस दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है, देवउठनी एकादशी का विधिवत व्रत व तुलसी विवाह और दान-पुण्य करने वाले के जीवन में सुख, शांति व समृद्धि बनी रहती है।
देवउठनी एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त्त व पूजा विधि
“ऋषिकेश पंचांग” (काशी) अनुसार वर्ष 2025 में कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि 31 अक्टूबर की अर्ध रात्रि 04:03 पर लग रही है जो कि 1 नवंबर की ही अर्ध रात्रि 02:56 पर खत्म हो जाएगी अतः देवउठनी एकादशी व्रत व पूजा 1 नवंबर के दिन रहेगा और एकादशी व्रत पारणा 2 नवंबर को दोपहर 01:45 से 03:15 के मध्य करना अतिलाभकारी रहेगा।
पूजन व व्रत विधि
सर्वप्रथम स्नानादि कर पवित्र एवं स्वच्छ आसन पर बैठकर मन में गणेश जी का ध्यान कर गुरु वंदना करें पश्चात विष्णु जी और लक्ष्मी जी का ध्यान कर उन्हें गंगा जल या किसी पवित्र नदी के जल और पंचामृत से स्नान करवा कर पुनः जल से स्नान करवाएं औऱ तुलसी के पत्ते, पीले पुष्प, चंदन का तिलक और पीले मीठे का भोग व घी का दीपक अर्पित कर के विष्णु चालीसा, लक्ष्मी चालीसा, एकादशी व्रत कथा का पाठ कर विष्णु जी व लक्ष्मी जी के मंत्रों का जप करना चाहिए और इसके बाद तुलसी पूजन व तुलसी विवाह करवा कर सम्पूर्ण दिन-रात्रि व्रत का पालन करें और गरीबों को मिठाई (पीला मीठा) और केला दान करें।
