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तीसरे भाव में स्थित शनि का फल भाग 2

यदि तीसरे भाव में उच्च राशि का शनि हो जो कि सिंह लग्न की कुंडली में संभव है तो व्यक्ति उत्तम प्रबंधनकर्ता व अच्छा शासक होता है जो कि अपने ग्रुप को अच्छे से manage करता है सिंह लग्न की कुंडली में शनि सप्तमेश होता है अब यहाँ देखिए कि सप्तमेश उच्च राशि का पराक्रम भाव में बैठा है जो कि यह दर्शाता है कि आपका जीवनसाथी मजबूत दिमाग या इरादों वाला होगा अगर यहाँ शनि वक्री हो जाए तो स्थिति और खराब हो जाएगी क्योंकि ऐसी स्थिति में जीवनसाथी को समझा पाना या उनके आगे अपनी बात अच्छे से रख पाना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि आपका लग्न भी सिंह है तो समस्या आती ही है।

शनि का प्रथम भाव में फल भाग:- 1

यदि तीसरे भाव में शनि शुभ वर्ग का हो तो ऐसा व्यक्ति शास्त्रों को जानने वाला और अनुसंधानकर्ता होता है मतलब कि उसकी रुचि रिसर्च में होती है, यदि नीच राशि का शनि तीसरे भाव में हो जो कि कुंभ लग्न में ही संभव है तो व्यक्ति दूषित मन वाला होता है अब यहाँ देखिए कि लग्नेश ही नीच राशि का हो गया तो वह बुरे विचार व्यक्ति के मन में पहले लाता है हालांकि दो सौम्य ग्रह या शुभ ग्रह की दृष्टि शनि पर पड़ जाए तो काफी हद तक इससे छुटकारा मिल जाता है।

शनि का प्रथम भाव में फल भाग:-2

यदि नीच नवांश का शनि तीसरे भाव में हो तो ऐसा व्यक्ति अपनी बातों से लोगों को मूर्ख बनाता है, यदि वर्गोत्तम शनि तीसरे भाव में हो तो व्यक्ति अत्यधिक स्वाभिमानी होता है, यदि पाप वर्ग का शनि तीसरे भाव में हो व्यक्ति भाव रहित होता है अर्थात न काहु से दोस्ती, न काहु से वैर वाली स्थिति होती है जो कि शुभ है।

शनि का द्वितीय भाव में फल

यदि मित्र राशि का शनि तीसरे भाव में हो तो ऐसा व्यक्ति दूसरों को परामर्श देने वाला व न्यायवक्ता होता है, यदि मित्र नवांश का शनि तीसरे भाव में हो तो ऐसा व्यक्ति गुणवान व धनवान दोनों होता है।

शनि का तीसरे भाव में फल भाग:-1

यदि शत्रु राशि का शनि तीसरे भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार की लत अवश्य रहती है भले वो चाय की हो या नशे की या अन्य किसी प्रकार की हो, यदि शत्रु नवांश का शनि तीसरे भाव में हो तो ऐसा व्यक्ति दीनता का प्रदर्शन करने वाला होता है और स्वराशि का शनि व्यक्ति को शत्रुओ पर विजय दिलाने वाला होता है।

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शनि के तीसरे भाव में प्राप्त होने वाले यह फल मेरे अनुभव के आधार पर हैं जिनको कि मैंने आप सभी को समझाने का एक प्रयास किया है उम्मीद करता हूँ आप सभी को शनि के तीसरे भाव में मिलने वाले फल आप सभी को बिना कठिनाई के समझ में आए होंगे।

जय श्री राम।

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तीसरे भाव में स्थित शनि का फल

तीसरे भाव में स्थित शनि व्यक्ति को उद्धमी अर्थात मेहनती बनाता है साथ ही ऐसा व्यक्ति राजा या अपने अधिकारी का प्रिय होता है और ऐसे व्यक्ति को संतान कुछ विलंब से होती है चूँकि संतान विलंब से होने के लिए कुछ और भी योग जरूरी है जैसे कि पंचम भाव व पंचमाधिपति दोनों पर शनि की दृष्टि का होना अन्यथा शनि की तीसरी दृष्टि पंचम भाव पर इतनी अशुभ नही होती।

यदि तीसरे भाव में शनि यदि वर्गोत्तम स्थिति में हो तो ऐसा व्यक्ति बहुत अधिक स्वभाविमानी होता है ऐसा कश्यप ऋषि का मत है साथ ही यदि स्वराशि का शनि तीसरे भाव में (ऐसा तभी संभव है जब व्यक्ति का जन्म या तो धनु लग्न में हो या वृश्चिक लग्न में) कुंभ राशि (अर्थात धनु लग्न की कुंडली) का स्थित हो तो भावम-भावत नियम के अनुसार ऐसा व्यक्ति धनवान होता है और यदि मकर राशि (जो कि वृश्चिक लग्न की कुंडली में संभव है) का हो तो ऐसा व्यक्ति जन्मस्थान से दूर रहकर उन्नति प्राप्त करता है।

तीसरे भाव का शनि जीवन के उत्तरार्ध में उन्नति प्रदान करता है एक मजेदार बात बताता हूँ तीसरा भाव काम त्रिकोण का पहला भाव है जब भी शनि काम त्रिकोण (३,७,११) में बैठेगा तो वो आपके त्रिकोण भाव (१,५,९) में से दो त्रिकोण भाव को पकड़ लेगा, तीसरे भाव काम त्रिकोण में बैठा हुआ शनि व्यक्ति को अल्प भोजी अर्थात कम में संतुष्ट होने वाला बनाता है, तीसरे भाव में बैठा शनि व्यक्ति को तकनीकि क्षेत्र में रुचि देता है और उसमें सहजता से सफल बनाता है।

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तीसरे भाव का एक नाम सहज भाव भी है तीसरे भाव से शौक, छोटे भाई-बहन का भी विचार किया जाता है यदि पाप वर्ग का शनि तीसरे भाव में हो तो ऐसा व्यक्ति “न काहु से दोस्ती, न काहु से वैर” वाला होता है जो कि अच्छा है इसके अलावा तीसरे भाव का शनि जीवन के उत्तरार्ध में सफलता देता है क्योंकि वह आपके नवम भाव को देखता है जो कि यह दर्शाता है ऐसे व्यक्ति तत्काल उन्नति नही प्राप्त करते वो खुद के कर्म-अनुभव से सीख कर खुद का भाग्योदय करते हैं यदि यह भी कह दूँ तो गलत नही कि “तीसरे भाव का शनि राजा नही तो बजीर के level तक का काम कर जाएगा” तीसरे भाव में स्थित शनि व्यक्ति को आध्यात्मिक बनाता है ऐसे व्यक्ति की कुंडली में छोटे भाईयों से वैचारिक मतभेद के योग होते हैं।

पोस्ट की लंबाई को ध्यान में रखते हुए इसका दूसरा भाग जल्द ही प्रकाशित करूँगा।

जय श्री राम।