सुंदरकांड का नाम सुंदर क्यों है? जानिए इसका आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व
सुंदरकांड का नाम ‘सुंदर’ क्यों है? जानिए इसका आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व
वाल्मीकि रामायण के सात कांडों में ‘सुंदरकांड’ का स्थान सबसे विशिष्ट है। हालांकि, जहां अन्य कांडों के नाम स्थान या पात्रों पर आधारित हैं, वहीं दूसरी ओर इस कांड का नाम ‘सुंदर’ रखा गया है। इसलिए, अक्सर पाठकों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इसमें ऐसा क्या है जो इसे ‘सुंदर’ बनाता है?
🌸 सुंदरकांड की सुंदरता: एक श्लोक में सार
“सुन्दरे सुन्दरो रामः सुन्दरे सुन्दरी कथा।
सुन्दरे सुन्दरी सीता सुन्दरे सुन्दरं वनम्॥”
“सुन्दरे सुन्दरं काव्यं सुन्दरे सुन्दरः कपिः।
सुन्दरे सुन्दरं मन्त्रं सुन्दरे किं न सुन्दरम्॥”
अर्थात, इसका अर्थ है कि इसमें श्री राम सुंदर हैं, तथा इसकी कथा भी सुंदर है। इसके अलावा, इसमें वर्णित अशोक वाटिका (वन) सुंदर है और इसके नायक हनुमान जी (कपि) भी सुंदर हैं। वास्तव में, सुंदरकांड में ऐसा क्या है जो सुंदर नहीं है?
🚩 नाम ‘सुंदर’ होने के 5 प्रमुख कारण
- क्योंकि हनुमान जी का नाम ‘सुंदर’ था: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता अंजनी उन्हें बचपन में प्यार से ‘सुंदर’ पुकारती थीं। इसलिए वाल्मीकि जी ने इसका नाम सुंदरकांड रखा।
- शोक का अंत: यद्यपि रामायण के अन्य भागों में संघर्ष है, किंतु सुंदरकांड वह मोड़ है जहाँ श्री राम को सीता माता का पता चलता है। अतः यह ‘शोक’ के बीच ‘आशा’ की किरण है।
- विभीषण की शरणागति: इसी क्रम में, इसी कांड में विभीषण जैसा भक्त राम की शरण में आता है।
- त्रिजटा का स्वप्न: साथ ही, अशोक वाटिका में त्रिजटा एक स्वप्न देखती है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संकेत है।
- हनुमान जी की चतुराई: अंततः, जिस प्रकार हनुमान जी ने बुद्धि से लंका को जलाया, वह अद्भुत है।
🔮 ज्योतिषीय दृष्टिकोण: सुंदरकांड का महत्व
इसके अतिरिक्त, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सुंदरकांड का पाठ ग्रहों की शांति के लिए अचूक उपाय है:
- शनि और मंगल दोष निवारण: चूंकि सुंदरकांड में हनुमान जी के बल का वर्णन है, इसलिए इसका पाठ शनि की साढ़ेसाती में लाभ देता है।
- आत्मविश्वास में वृद्धि: यदि आपकी कुंडली में आत्मविश्वास की कमी है, तो सुंदरकांड का पाठ मानसिक शक्ति प्रदान करता है।
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