Shivling Vastu Direction: Mahashivratri 2026 Jal Abhishek Puja Vidhi - Correct North Direction

महाशिवरात्रि 2026: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय ‘दिशा’ का रखें खास ध्यान! वरना पूजा होगी खंडित (शास्त्र प्रमाण सहित)

महाशिवरात्रि 2026: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय ‘दिशा’ का रखें खास ध्यान! वरना पूजा होगी खंडित (शास्त्र प्रमाण सहित)

15 फरवरी 2026: आज महाशिवरात्रि है। यह शिव कृपा पाने का सबसे बड़ा अवसर है, लेकिन अक्सर भक्त अनजाने में शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय “दिशा शूल” (Directional Fault) कर बैठते हैं।

वास्तु शास्त्र और शिव पुराण स्पष्ट कहते हैं कि गलत दिशा में खड़े होकर या गलत दिशा में शिवलिंग रखकर की गई पूजा का फल नहीं मिलता, उल्टा दोष लगता है। Astrology Sutras के इस वृहद लेख में जानें शास्त्रों के श्लोकों के साथ शिवलिंग की सही स्थिति और जलाभिषेक का सटीक नियम।

🔢 आज का पंचांग और राशिफल

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1. शिवलिंग की जलहरी (Jalahari) किस दिशा में होनी चाहिए?

सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण नियम शिवलिंग की स्थापना का है। चाहे मंदिर हो या घर का पूजा स्थल, यह नियम अटल है।

शास्त्र प्रमाण:
“पीठम् उत्तराभिमुखम् स्थापयेत्…”
(शिव आगम शास्त्र)

अर्थ: शिवलिंग की वेदी (जलहरी/योनि) का मुख सदैव उत्तर दिशा (North Direction) की ओर होना चाहिए।

वास्तु कारण (Scientific Logic): उत्तर दिशा में जल का प्रवाह होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) बनी रहती है। उत्तर दिशा सोम (चंद्रमा) और शीतलता की दिशा है। शिव जी का मस्तक गर्म रहता है, इसलिए जल का प्रवाह उत्तर की ओर होने से उन्हें शीतलता मिलती है।


2. भक्त को किस दिशा में खड़ा होना चाहिए? (Direction of Devotee)

ज्यादातर लोग यहीं गलती करते हैं। वे शिवलिंग के सामने (पूर्व या पश्चिम) खड़े हो जाते हैं, जो गलत है।

शास्त्र प्रमाण:
“प्राङ्मुखो वा उदङ्मुखो पूजयेत् शिवशंकरम्।
न पूर्वे न च उत्तरे, न कुर्यात् पृष्ठतो रविम्॥”

✅ सही स्थिति (Correct Position):

  • दक्षिण दिशा में बैठें (Sit in South): पूजा करते समय भक्त का मुख उत्तर (North) की ओर होना चाहिए। यह सबसे उत्तम माना गया है। इसमें जलहरी आपके बाएं (Left) हाथ की तरफ रहेगी।
  • पश्चिम दिशा में बैठें (Sit in West): भक्त का मुख पूर्व (East) की ओर हो।

🚫 यहाँ कभी खड़े न हों (Strictly Prohibited):

  • उत्तर दिशा में (Facing South): कभी भी शिवलिंग की जलहरी के ठीक सामने (उत्तर दिशा में) खड़े होकर जल न चढ़ाएं। इससे आप शिव जी का रास्ता रोकते हैं।
  • पूर्व दिशा में (Facing West): पूर्व में खड़े होकर पश्चिम की ओर मुख करके जल चढ़ाने से शिव जी के पीछे (Back) खड़े होने का दोष लगता है।

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3. घर में शिवलिंग रखने के वास्तु नियम (Home Vastu Rules)

घर में शिवलिंग रखना बहुत शुभ है, लेकिन इसके नियम बहुत कड़े हैं।

शास्त्र प्रमाण:
“गृहे लिङ्गं न कुर्वीत अंगुष्ठाद् अधिकं क्वचित्।”
(लिंग पुराण)

अर्थ: घर में कभी भी अंगूठे के पोर (Thumb Joint) से बड़ा शिवलिंग स्थापित नहीं करना चाहिए।

  • नर्मदेश्वर शिवलिंग: घर के लिए ‘नर्मदेश्वर शिवलिंग’ (नर्मदा नदी का पत्थर) सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसके लिए प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती।
  • स्थान: शिवलिंग को कभी भी तुलसी के पौधे के पास या बंद अलमारी में न रखें। इसे खुले स्थान में रखें जहाँ नित्य जल चढ़ाया जा सके।

4. जलाभिषेक की धारा और परिक्रमा (Water Flow Rule)

सिर्फ दिशा ही नहीं, जल चढ़ाने का तरीका भी शास्त्रों में वर्णित है।

💧 अखंड धारा: भगवान शिव को जल हमेशा “अखंड धारा” (Continuous thin stream) में चढ़ाना चाहिए। लोटा भरकर एक साथ पानी न उड़ेलें। धीरे-धीरे, पतली धार से जल चढ़ाएं और साथ में “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।

परिक्रमा: “सोमसूत्र” का उल्लंघन न करें

शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा (Full Circumambulation) नहीं की जाती। जहाँ से जल बहकर नीचे गिरता है (जलहरी का नाला), उसे ‘सोमसूत्र’ कहते हैं। इसे कभी लांघना (Cross) नहीं चाहिए। आधी परिक्रमा करें और जलहरी के पास से वापस लौट आएं।

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  1. 💡 आज (15 फरवरी) महाशिवरात्रि विशेष उपाय

आज के दिन अगर आप ‘पंचग्रही योग’ का लाभ उठाना चाहते हैं, तो:

  1. दिशा: उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  2. सामग्री: तांबे के लोटे में जल, थोड़ा सा गंगाजल और काले तिल मिलाएं।
  3. जाप: “ॐ शं शनैश्चराय नमः” बोलते हुए शिवलिंग पर चढ़ाएं।

यह उपाय शनि की साढ़ेसाती और ढैया के प्रभाव को तुरंत खत्म करेगा और धन के द्वार खोलेगा।

🎯 निष्कर्ष

पूजा का पूर्ण फल तभी मिलता है जब वह विधि-विधान से की जाए। आज महाशिवरात्रि पर इन वास्तु नियमों का पालन करें और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करें।

।। हर हर महादेव ।।