Sheetla Mata riding a donkey with a broom and pot, Sheetla Ashtami 2026 celebration guide by Astrology Sutras.

शीतला अष्टमी 2026: 10 अप्रैल को है बसौड़ा, जानें शुभ मुहूर्त, कथा और प्रामाणिक पूजन विधि

शीतला सप्तमी व अष्टमी 2026: 10 अप्रैल को है बसौड़ा, जानें शास्त्रोक्त पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

सनातन धर्म में ऋतु परिवर्तन के समय स्वास्थ्य रक्षा और शुचिता का पर्व ‘शीतला सप्तमी’ और ‘शीतला अष्टमी’ अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। वर्ष 2026 में शीतला अष्टमी का महापर्व 10 अप्रैल को मनाया जाएगा। Astrology Sutras के इस विशेष शोधपरक लेख में हम स्कंद पुराण के प्रमाणों के साथ माता शीतला के दिव्य स्वरूप, उनकी उत्पत्ति के गूढ़ रहस्य और वैज्ञानिक महत्व का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

Sheetala Ashtami 2026 Date 10 April Muhurat Astrology Sutras
10 अप्रैल 2026 को है शीतला अष्टमी। जानें शास्त्रोक्त पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और शुक्र देव का विशेष प्रभाव।

🚩 माता शीतला की उत्पत्ति का पौराणिक रहस्य

स्कंद पुराण के अनुसार, माता शीतला की उत्पत्ति भगवान शिव के पसीने से हुई थी। जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि के संतुलन हेतु अग्नि देव को उत्पन्न किया, तब उनकी प्रचंड ज्वाला को शांत करने के लिए भगवती ने कलश और नीम के पत्तों के साथ अवतार लिया। माता के हाथों में ‘मार्जनी’ (झाड़ू) शुचिता का प्रतीक है और ‘कलश’ आरोग्य के अमृत का।

📜 शास्त्रों के अनुसार प्रमाण: श्लोक व अर्थ

‘शीतलाष्टकम्’ स्तोत्र में माता की महिमा का साक्षात प्रमाण मिलता है। जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इनका पाठ करता है, वह समस्त संक्रामक व्याधियों से मुक्त हो जाता है:

“नमस्तेऽस्तु शीतले देवि नानायोगधरिणि।
नमामि शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्॥”

अर्थ: हे नाना प्रकार के योगों को धारण करने वाली शीतल देवी! आपको नमस्कार है। गर्दभ (गधे) की सवारी करने वाली, दिगम्बरा स्वरूप वाली भगवती शीतला को मैं बारंबार नमन करता हूँ।


“मार्जनीकलशोपेतं सूर्पालंकृतमस्तकाम्।
नमामि शीतलां देवीं सर्वव्याधिविनाशिनीम्॥”

अर्थ: जिनके हाथों में मार्जनी (झाड़ू) और कलश है, जिनका मस्तक सूप (छालनी) से अलंकृत है, ऐसी समस्त व्याधियों का विनाश करने वाली माता शीतला को मेरा प्रणाम है।

📅 शीतला अष्टमी 2026: सटीक तिथियां व मुहूर्त

पंचांगीय गणना (ऋषिकेश पंचांग काशी) के अनुसार, वर्ष 2026 में बसौड़ा पूजन हेतु निम्नलिखित तिथियां सुनिश्चित हैं:

  • भोजन बनाने की तिथि (सप्तमी): 09 अप्रैल 2026, गुरुवार
  • शीतला अष्टमी (मुख्य पूजन/बसौड़ा): 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार
  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 09 अप्रैल 2026, शाम 06:01 बजे से
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 10 अप्रैल 2026, रात्रि 07:35 बजे तक
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: प्रातः 06:05 बजे से प्रातः 10:35 बजे तक (अमृत व शुभ चौघड़िया)

⚖️ वैज्ञानिक पक्ष और आयुर्वेद

चैत्र मास में ग्रीष्म ऋतु के बढ़ते प्रभाव से ‘पित्त’ का प्रकोप बढ़ता है। बासी और ठंडा भोजन करना इस बात का प्रतीक है कि अब गर्म आहार को त्यागकर शरीर को शीतलता प्रदान करने वाले भोजन की ओर मुड़ना चाहिए। नीम के पत्तों का प्रयोग एंटी-बैक्टीरियल सुरक्षा चक्र तैयार करता है।

🛠️ प्रामाणिक पूजन विधि

  1. अष्टमी (10 अप्रैल) के दिन सूर्योदय से पूर्व ठंडे जल से स्नान करें।
  2. हाथ में जल लेकर संकल्प करें— “मम गेहे शीतलाजनितोपद्रव प्रशमनपूर्वकायुरारोग्यैश्वर्याभिवृद्धये शीतला अष्टमी व्रत करिष्ये।”
  3. माता को सुगंधित पुष्प, गंध और अक्षत के साथ 09 अप्रैल को बना बासी भोजन (दही, राबड़ी, चने आदि) अर्पित करें।
  4. विशेष निषेध: इस दिन घर में अग्नि प्रज्वलित नहीं की जाती है।

निष्कर्ष: शीतला अष्टमी का पर्व स्वास्थ्य और स्वच्छता का संगम है। प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर हम व्याधियों से मुक्त जीवन जी सकते हैं।

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