Markandeya Purana Durga Saptashati Secrets in Hindi - Maa Durga and Ancient Holy Book Graphic

मार्कण्डेय पुराण: कलयुग का ‘कल्पवृक्ष’! दुर्गा सप्तशती का यह रहस्य 99% लोग नहीं जानते (असली सच)

 

🕉️ मार्कण्डेय पुराण: दुर्गा सप्तशती केवल एक ग्रंथ नहीं, कलियुग का ‘कल्पवृक्ष’ है! (संपूर्ण शास्त्र-सम्मत रहस्य)

क्या आप जानते हैं? अठारह पुराणों में ‘मार्कण्डेय पुराण’ का स्थान अद्वितीय है। इसके अंतर्गत आने वाली ‘दुर्गा सप्तशती’ (देवी माहात्म्य) हिंदू धर्म का वह परम तेजस्वी ग्रंथ है, जिसे वेदों के समान ही “अपौरुषेय” (मानव रचित नहीं, साक्षात ईश्वरीय) और “नित्य” माना गया है।

कलियुग में जब मन्त्रों की शक्ति क्षीण हो जाती है, तब मार्कण्डेय पुराण ही वह एकमात्र सहारा है जो भक्त की पुकार तत्काल सुनता है। यह ग्रंथ केवल असुरों के वध की कथा नहीं, बल्कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों को देने वाली साक्षात ‘कामधेनु’ है।

आज Astrology Sutras आपको मार्कण्डेय पुराण के उन दुर्लभ रहस्यों और नियमों से परिचित कराएगा, जो Google पर सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं, और कहीं भी उपलब्ध नही हैं, ताकि आपकी साधना खंडित न हो और पूर्ण फल मिले।


🔱 1. देवी का प्राकट्य: देवताओं के ‘तेज’ से हुआ महाशक्ति का अवतार

मार्कण्डेय पुराण (द्वितीय अध्याय) में वर्णन आता है कि जब महिषासुर के अत्याचार से तीनों लोक त्रस्त हो गए, तब भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा जी के मुख से परम ‘तेज’ प्रकट हुआ। अन्य इंद्र आदि देवताओं के शरीर से भी शक्ति निकली और वह सब एक जगह एकत्रित हो गई।

पुराण का प्रमाण (अध्याय 2, श्लोक 13):
“ततस्तेजसां गोलक: सोऽभवन्नारी तदाभवत्।”
(अर्थात्: वह समस्त देवताओं का तेज एक होकर ज्वलंत पर्वत के समान हो गया और उसी दिव्य तेज-पुंज से साक्षात महादेवी का प्राकट्य हुआ।)

धार्मिक महत्व: यह प्रसंग हमें बताता है कि माँ भगवती “सर्वदेवमयी” हैं। उनकी एक पूजा करने से 33 कोटि देवी-देवताओं की पूजा का फल स्वतः ही मिल जाता है।

⚠️ क्या होली पर ग्रहण का साया है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार होली पर ग्रहण का योग बन रहा है। मार्कण्डेय पुराण कहता है कि ग्रहण काल में किया गया जप ‘लाख गुना’ फल देता है।

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🌺 2. तीन चरित्र: महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की महिमा

मार्कण्डेय पुराण ने देवी माहात्म्य को तीन चरित्रों (भागों) में विभाजित किया है। यह तीनों स्वरूप भक्त के जीवन को पूर्णता प्रदान करते हैं:

  • प्रथम चरित्र (महाकाली): यहाँ भगवान विष्णु की योगनिद्रा रूपी शक्ति ने मधु और कैटभ का नाश करवाया।

    फल: इसके पाठ से रोग, शोक, संताप और शत्रुओं का भय सदा के लिए मिट जाता है।

  • मध्यम चरित्र (महालक्ष्मी): इस भाग में देवी ने महिषासुर का वध किया।

    फल: इसकी साधना से घर में अखंड धन, ऐश्वर्य और राज-सम्मान की प्राप्ति होती है।

  • उत्तम चरित्र (महासरस्वती): यहाँ माँ ने शुम्भ और निशुम्भ का संहार किया।

    फल: यह चरित्र साधक को सद्बुद्धि, विद्या और अंत में मोक्ष प्रदान करता है।


🔥 3. भोग और मोक्ष: दोनों प्रदान करती हैं भगवती

संसार में कई देवता केवल मोक्ष देते हैं और कई केवल सांसारिक सुख। लेकिन मार्कण्डेय पुराण स्पष्ट घोषणा करता है कि माँ दुर्गा ‘भुक्ति-मुक्ति प्रदायिनी’ हैं।

श्लोक प्रमाण (अध्याय 1, श्लोक 55):
“सैषा प्रसन्ना वरदा नृणां भवति मुक्तये।”
(अर्थात्: वह भगवती प्रसन्न होने पर मनुष्यों को भोग (सुख) भी देती हैं और अंत में मोक्ष (मुक्ति) भी प्रदान करती हैं।)

❓ Google पर सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ – शास्त्र सम्मत उत्तर)

प्रश्न 1: क्या हम घर पर दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं?
उत्तर: जी हाँ, बिल्कुल। वाराही तंत्र के अनुसार, घर में सप्तशती का पाठ करने से वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) जलकर भस्म हो जाती है।

प्रश्न 2: क्या स्त्रियाँ मासिक धर्म में पाठ कर सकती हैं?
उत्तर: शास्त्र इस विषय में स्पष्ट है। अशुद्धि की अवस्था में ‘मानस पाठ’ (मन में स्मरण) किया जा सकता है, परंतु ग्रंथ को स्पर्श करना या विग्रह की पूजा करना वर्जित है। शुद्ध होने के बाद ही पुनः पाठ आरंभ करें।

प्रश्न 3: अगर पाठ में गलती हो जाए तो क्या करें?
उत्तर: संस्कृत के श्लोक कठिन होते हैं, इसलिए त्रुटि होना स्वाभाविक है। इसके निवारण के लिए पाठ के अंत में “अपराध क्षमापन स्तोत्र” का पाठ अवश्य करें अथवा “सिद्ध कुंजिका स्तोत्र” पढ़ें। कुंजिका स्तोत्र के पाठ से सप्तशती की संपूर्ण सिद्धि प्राप्त होती है।

प्रश्न 4: कवच, अर्गला और कीलक का क्या महत्व है?
उत्तर:

  • कवच: यह शरीर की रक्षा करता है।
  • अर्गला: यह रूप, जय और यश प्रदान करता है।
  • कीलक: यह मंत्रों को चैतन्य (जागृत) करता है। इनके बिना पाठ का पूर्ण फल नहीं मिलता।

🏡 क्या आपके घर में बरकत नहीं है?

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🎯 निष्कर्ष: श्रद्धा ही मूल है

मार्कण्डेय पुराण का सार यही है कि शक्ति हमारे विश्वास में है। “या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता”—अर्थात् देवी श्रद्धा के रूप में हमारे भीतर ही स्थित हैं।

यदि आप संकट में हैं, तो मार्कण्डेय पुराण के इस महामंत्र का आश्रय लें। माँ जगदंबा आपका कल्याण अवश्य करेंगी।

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जय माता दी🙏