मंगल दोष क्या सच में इतना बुरा है जितना इसे बताया जाता है? जानिए: मंगल दोष की विस्तृत जानकारी
जब भी विवाह की बात चलती है, तो कुंडली मिलान में सबसे पहला और सबसे डरावना प्रश्न यही होता है— “कहीं लड़का या लड़की मांगलिक तो नहीं?”
आम तौर पर लोग ‘मंगल दोष’ को एक अभिशाप मान लेते हैं। लेकिन प्राचीन ज्योतिष ग्रंथ ‘फलदीपिका’ का अध्ययन करने पर पता चलता है कि मंगल दोष केवल ‘डर’ नहीं, बल्कि ऊर्जा का एक ‘असंतुलन’ है। आज इस लेख में मैं आपको शास्त्रों के उन पन्नों तक ले चलूँगा, जहाँ मंगल दोष और काम-विज्ञान (Sexuality) के गहरे रहस्य छिपे हैं।
🔥 मंगल दोष (कुज योग): डर नहीं, विज्ञान समझें
फलदीपिका के अनुसार, ज्योतिष में 5 ग्रहों को ‘क्रूर’ या ‘पापी’ की श्रेणी में रखा गया है— मंगल, शनि, सूर्य, राहु और केतु। जब ये ग्रह विवाह और सुख से जुड़े भावों (Houses) पर कब्जा कर लेते हैं, तो दांपत्य जीवन की गाड़ी डगमगाने लगती है।
लेकिन याद रखें, इसका विचार केवल लग्न कुंडली से नहीं, बल्कि ‘चंद्र कुंडली’ (मन) और ‘शुक्र’ (विवाह कारक) से भी करना अनिवार्य है।
🏠 कुंडली के वो 5 भाव जहाँ मंगल मचाता है हलचल
मेरे ज्योतिषीय अनुभव में, मंगल दोष का प्रभाव इन पांच स्थानों पर सबसे ज्यादा खतरनाक होता है:
- द्वितीय भाव (कुटुंब स्थान): लग्न से दूसरा भाव ‘परिवार’ का है। पत्नी घर की नींव होती है। ज्योतिष में कहा गया है कि यदि ‘कुटुंब रूपी शामियाने’ का मुख्य स्तंभ (पत्नी) ही दोषपूर्ण हो जाए, तो पूरा परिवार बिखर सकता है। यहाँ बैठा पाप ग्रह वंश वृद्धि और पारिवारिक सुख को ‘दीमक’ की तरह चाट जाता है।
- चतुर्थ भाव (सुख स्थान): चौथा घर मकान, वाहन और घरेलू शांति का है। यदि घर की लक्ष्मी (गृहिणी) ही सुखी न हो, तो आलीशान मकान और गाड़ियों का भोग कौन करेगा? चौथे घर का मंगल ‘गृह-क्लेश’ का कारण बनता है।
- सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव:
- सप्तम: यह सीधे पति-पत्नी का घर है। यहाँ पाप ग्रह अलगाव पैदा करता है।
- अष्टम: यह आयु और ‘गुप्तांगों’ का भाव है। इसका सीधा संबंध आपकी ‘Sexual Health’ से है।
- द्वादश (12वां): इसे ‘शैया सुख’ (Bed Comforts) का भाव कहते हैं। यहाँ बैठा मंगल पति-पत्नी के अंतरंग पलों (Intimacy) में आग लगाने का काम करता है।
🛑 क्या आपकी कुंडली में मंगल भारी है?
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❤️ स्त्री और पुरुष: मंगल और शुक्र का ‘सीक्रेट कनेक्शन’
ज्योतिष केवल ग्रहों की चाल नहीं, बल्कि मानव शरीर का विज्ञान है। फलदीपिका में स्त्री और पुरुष की ‘बायोलॉजी’ को ग्रहों से बहुत खूबसूरती से जोड़ा गया है:
- स्त्रियों का विचार (मंगल से क्यों?): स्त्री के शरीर में ‘रज’ (Menstruation/Blood) की प्रधानता होती है। चूंकि रक्त का रंग लाल है और मंगल भी लाल है, इसलिए स्त्री की कामवासना और स्वास्थ्य का विचार मंगल से किया जाता है।
- पुरुषों का विचार (शुक्र से क्यों?): पुरुष के शरीर में ‘वीर्य’ (Semen) प्रधान होता है, जिसका रंग श्वेत (सफेद) होता है। इसलिए पुरुष की कामशक्ति का विचार शुक्र से होता है।
यही कारण है कि जब कुंडली में शुक्र और मंगल का मिलन होता है, तो व्यक्ति के अंदर ‘पैशन’ (Passion) की अधिकता होती है।
🏹 कामदेव, मकर और मीन राशि का रहस्य
क्या आपने कभी सोचा है कि कामदेव को ‘मकरध्वज’ और ‘मीनकेतु’ क्यों कहा जाता है? इसके पीछे एक गहरा ज्योतिषीय सिद्धांत है:
- मंगल (ऊर्जा) ‘मकर राशि’ में उच्च का होता है। (इसलिए मकरध्वज)
- शुक्र (प्रेम) ‘मीन राशि’ में उच्च का होता है। (इसलिए मीनकेतु)
कामदेव कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि मंगल और शुक्र का वह संतुलन है जो सृष्टि को आगे बढ़ाता है। बसंत पंचमी को कामदेव का जन्मोत्सव इसीलिए मनाया जाता है क्योंकि उस समय प्रकृति में शुक्र (सौंदर्य) अपने चरम पर होता है।
🚩 मंगल दोष का सबसे बड़ा उपाय:
यदि मंगल आपकी कुंडली में भारी है, तो हनुमान जी की शरण ही एकमात्र उपाय है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी के पाठ का नाम ‘सुंदरकांड’ ही क्यों पड़ा?
यह रहस्य जानकर आप चौंक जाएंगे: [सुंदरकांड का नाम ‘सुंदर’ ही क्यों है? यहाँ क्लिक करें और जानें]
🌸 निष्कर्ष: कामदेव के 5 बाण
शास्त्रों में कहा गया है कि कामदेव के बाण लोहे के नहीं, बल्कि ‘फूलों’ के होते हैं। ये 5 फूल हमारी 5 इंद्रियों (शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध) के प्रतीक हैं।
इसलिए, मंगल दोष से घबराएं नहीं। कुंडली का सूक्ष्म विश्लेषण करवाएं, क्योंकि कई बार कुंडली में दोष होता है लेकिन परिहार (Remedy) के कारण उसका असर खत्म हो जाता है।
।। शुभम भवतु ।।
जय श्री राम।






