Ghar Ka Vastu: 5 Vastu Shastra Rules for Main Gate, Kitchen, and Bedroom for Wealth and Peace

Ghar Ka Vastu: सुख-शांति और धन के लिए घर के 5 मुख्य नियम (शास्त्र प्रमाण सहित)

Ghar Ka Vastu: घर बनाते समय इन 5 नियमों का रखें ध्यान (संस्कृत श्लोक और अर्थ सहित)

घर केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि एक जीवित ऊर्जा है।

वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) और पंचतत्वों (Five Elements) के संतुलन का विज्ञान है। प्राचीन ग्रंथ ‘विश्वकर्मा प्रकाश’ और ‘मयमतम्’ के अनुसार, जिस घर का वास्तु सही होता है, वहां “महालक्ष्मी” का वास स्थायी रूप से होता है।

Astrology Sutras के इस विस्तृत लेख में हम प्राचीन ग्रंथों के प्रमाणों के साथ जानेंगे घर के 5 सबसे महत्वपूर्ण अंगों का वास्तु, जो 2026 में आपके लिए सुख और समृद्धि लाएंगे।

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1. मुख्य द्वार: ऊर्जा का प्रवेश (Main Entrance Vastu)

घर का मुख्य द्वार सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा का ‘मुख’ (Mouth) है। सकारात्मक ऊर्जा यहीं से प्रवेश करती है।

शास्त्र प्रमाण (विश्वकर्मा प्रकाश):
“द्वारं तु सर्वतो भद्रं, शुभदं, विजयं तथा।
अन्यथा क्लेशदं प्रोक्तं, वास्तुशास्त्रस्य निर्णयः॥”

अर्थ: मुख्य द्वार यदि सही स्थान पर हो, तो वह ‘सर्वतोभद्र’ (सभी प्रकार से कल्याणकारी) और विजय देने वाला होता है। अन्यथा वह केवल क्लेश और कष्ट ही देता है।

✅ वास्तु नियम (Do’s):

  • सही दिशा: घर का मुख्य द्वार उत्तर (North), पूर्व (East) या ईशान कोण (North-East) में होना सर्वश्रेष्ठ है।
  • साइज: मुख्य द्वार घर के अन्य दरवाजों से बड़ा और ऊंचा होना चाहिए।

❌ वर्जित (Don’ts):

  • द्वार वेध: मुख्य द्वार के ठीक सामने खंभा, पेड़, मंदिर या गंदा नाला नहीं होना चाहिए। इसे ‘द्वार वेध’ कहते हैं जो उन्नति रोकता है।

2. रसोई घर: स्वास्थ्य और धन (Kitchen Vastu)

रसोई घर का सीधा संबंध ‘अग्नि तत्व’ (Fire Element) से है। अगर अग्नि सही दिशा में नहीं होगी, तो धन जल की तरह बहेगा।

शास्त्र प्रमाण (वास्तु रत्नावली):
“आग्नेय्यां पाक सदनं…”

अर्थ: पाक सदन (रसोई) हमेशा आग्नेय कोण (South-East) में ही होना चाहिए।

  • दिशा: दक्षिण-पूर्व (South-East) कोना रसोई के लिए सर्वोत्तम है।
  • कुकिंग फेस: खाना बनाते समय मुख पूर्व (East) दिशा की ओर होना चाहिए।

3. शयन कक्ष: स्थिरता और संबंध (Master Bedroom Vastu)

घर के मुखिया का शयन कक्ष सही दिशा में होना परिवार की स्थिरता (Stability) के लिए जरूरी है।

शास्त्र प्रमाण (समरांगण सूत्रधार):
“नैऋत्यां शयनं कुर्यात्, गृहस्वामि सुखावहम्।”

अर्थ: गृहस्वामी (घर के मालिक) का शयन कक्ष नैऋत्य कोण (South-West) में होना चाहिए। यह सुख और स्वास्थ्य देने वाला है।

  • सिर की दिशा: सोते समय सिर हमेशा दक्षिण (South) या पूर्व (East) में होना चाहिए। उत्तर (North) में सिर करके कभी न सोएं।
  • दर्पण (Mirror): बेड के ठीक सामने शीशा नहीं होना चाहिए।

4. ब्रह्मस्थान: घर का केंद्र (Brahmasthan)

यह घर का फेफड़ा (Lungs) है। आधुनिक फ्लैट्स में अक्सर लोग इसे भूल जाते हैं।

चेतावनी (मयमतम्):
“ब्रह्मस्थानं न पीडयेत्, स्तम्भैः कूटादिभिस्तथा।”

नियम: घर का केंद्र (Center) हमेशा खाली, खुला और साफ-सुथरा रखें। यहाँ टॉयलेट, सीढ़ी या खंभा बनाना ‘वास्तु दोष’ का सबसे भयंकर रूप है।

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5. 2026 के लिए विशेष वास्तु टिप्स (Quick Tips Table)

(टेबल पूरा देखने के लिए उसे उंगली से बाएं-दाएं सरकाएं)

वास्तु तत्व सही दिशा (Direction) लाभ (Benefit)
पूजा घर उत्तर-पूर्व (Ishaan) मानसिक शांति
तिजोरी दक्षिण (South) – मुख उत्तर धन वृद्धि
बाथरूम उत्तर-पश्चिम (Vayavya) रोग मुक्ति
भारी सामान दक्षिण-पश्चिम (Nairitya) स्थिरता

🎯 निष्कर्ष

वास्तु शास्त्र कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि “ऊर्जा प्रबंधन” (Energy Management) का विज्ञान है। यदि आप इन 5 मूल नियमों का पालन करते हैं, तो आपका घर स्वर्ग समान बन जाएगा।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q: घर का मुख्य द्वार किस दिशा में सबसे शुभ होता है?

A: वास्तु के अनुसार, घर का मुख्य द्वार उत्तर (North), पूर्व (East) या ईशान कोण (North-East) में होना सबसे शुभ माना जाता है।

Q: क्या दक्षिण दिशा में सिर करके सोना चाहिए?

A: जी हाँ, वास्तु शास्त्र (समरांगण सूत्रधार) के अनुसार दक्षिण दिशा में सिर करके सोने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आयु बढ़ती है।

Q: घर का ब्रह्मस्थान (Center) कैसा होना चाहिए?

A: घर का ब्रह्मस्थान हमेशा खाली, खुला और भारी निर्माण (जैसे सीढ़ियां या खंबे) से मुक्त होना चाहिए।