एकादशी व्रत के नियम और महत्व: पुराणों के अनुसार क्या खाएं, क्या नहीं?
सनातन धर्म में व्रतों की कोई कमी नहीं है, लेकिन ‘एकादशी’ को ‘व्रतों का राजा’ कहा गया है। पद्म पुराण के अनुसार, जिस प्रकार देवताओं में श्री हरि विष्णु और प्रकाश पुंजों में सूर्य श्रेष्ठ हैं, उसी प्रकार व्रतों में एकादशी सर्वश्रेष्ठ है।
अक्सर लोग भावुकता में व्रत तो रख लेते हैं, लेकिन शास्त्रों में वर्णित सूक्ष्म नियमों (Rules) की जानकारी न होने के कारण उन्हें पूर्ण फल नहीं मिल पाता। आज मैं आपको शास्त्रों के सागर से निकालकर वो प्रमाणिक नियम और रहस्य बताऊंगा, जो आपके व्रत को सफल बनाएंगे।
📜 एकादशी का महत्व: शास्त्र क्या कहते हैं?
स्कंद पुराण और महाभारत में स्पष्ट लिखा है कि एकादशी का व्रत करने से पूर्व जन्म के पाप वैसे ही जलकर भस्म हो जाते हैं, जैसे सूखी लकड़ी आग में जल जाती है।
“न गायत्र्या: परो मन्त्रो न मातु: परदैवतम्।
न एकादश्या: परं व्रतं न तीर्थं कुरुष्वता।।”
(अर्थात: गायत्री से बड़ा कोई मंत्र नहीं, माता से बड़ा कोई देवता नहीं और एकादशी से बड़ा कोई व्रत नहीं है।)
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🛑 एकादशी व्रत के 5 स्वर्ण नियम (Must-Follow Rules)
यदि आप चाहते हैं कि भगवान विष्णु की कृपा आप पर बरसे, तो इन नियमों का पालन अनिवार्य है:
1. दशमी (एक दिन पहले) के नियम
व्रत की शुरुआत एकादशी से नहीं, बल्कि दशमी की रात से ही हो जाती है।
- दशमी को सूर्यास्त के बाद भोजन न करें।
- इस दिन मसूर की दाल, शहद और कांसे के बर्तन में भोजन करना वर्जित है।
- ब्रह्मचर्य का पालन दशमी से ही शुरू करें।
2. चावल क्यों नहीं खाना चाहिए? (सबसे बड़ा रहस्य)
अक्सर लोग पूछते हैं कि एकादशी को चावल क्यों मना है? ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार:
“एकादशी के दिन ‘पाप पुरुष’ (संसार के समस्त पाप) चावल और अन्न के दानों में शरण लेते हैं। इसलिए जो व्यक्ति इस दिन चावल खाता है, वह भोजन नहीं, बल्कि साक्षात् पाप का भक्षण करता है।”
3. निद्रा निषेध (दिन में सोना मना है)
एकादशी के दिन शरीर में आलस्य नहीं होना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, व्रत रखकर दिन में सोने से व्रत का फल नष्ट हो जाता है। रात में ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ का पाठ या भजन-कीर्तन (जागरण) करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
4. क्या खाएं और क्या नहीं? (Phalahar Rules)
- निषेध (Don’ts): चावल, गेहूं, दालें, लहसुन, प्याज, बैंगन, और सेम की फली।
- ग्राह्य (Do’s): कुट्टू का आटा, सिंघाड़ा, साबूदाना, आलू, शकरकंद, फल और दूध।
- श्रेष्ठ व्रत: यदि स्वास्थ्य साथ दे, तो ‘निर्जला’ (बिना जल के) या केवल जल पर रहना सबसे उत्तम है।
📚 पुराणों का ज्ञान:
एकादशी के साथ-साथ वराह पुराण में भगवान नारायण ने ‘द्वादशी व्रत’ और चारों वर्णों के लिए मोक्ष का एक गुप्त मार्ग भी बताया है।
इसे मिस न करें: [वराह पुराण: मोक्ष और धर्म के गूढ़ रहस्य]
5. पारण (व्रत खोलने) का नियम
एकादशी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक उसका विधि-विधान से ‘पारण’ (Breaking the Fast) न किया जाए।
- व्रत अगले दिन (द्वादशी) सूर्योदय के बाद ही खोलना चाहिए।
- हरि वासर: द्वादशी तिथि की पहली एक-चौथाई अवधि को ‘हरि वासर’ कहते हैं। इस समय व्रत नहीं खोलना चाहिए।
- ब्राह्मण को भोजन या सीधा (अन्न दान) देकर ही स्वयं भोजन ग्रहण करें।
🌸 निष्कर्ष
एकादशी केवल भूखे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपनी इन्द्रियों (Senses) को वश में करके ईश्वर के निकट जाने की एक साधना है। जो व्यक्ति निष्काम भाव से एकादशी करता है, उसे अंत में वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है।
।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।।
जय श्री राम।






