Varaha Purana ke anusar Bharatvarsh ke 9 khand ka varnan, Lord Varaha aur Prachin Bharat ka manchitra

Bharatvarsh ke 9 Khand: Varaha Purana ka wo Rahasya jo Shayad Aap Nahi Jaante!

वराह पुराण: भारतवर्ष के नौ खण्डों का वर्णन

भगवान् रुद्र कहते हैं—

विप्रवरो! यह भूमण्डल कमल की भाँति गोलाकार में व्यवस्थित है—ऐसा कहा गया है। अब इसके अन्तर्वर्ती नौ उपवर्षों या खण्डों का वर्णन करता हूँ—सुनो। उनके नाम इस प्रकार हैं–

  • इन्द्रद्वीप
  • कसेरु
  • ताम्रवर्ण
  • गभस्तिमान्
  • नागद्वीप
  • सौम्य
  • गन्धर्व
  • वारुण
  • भारत

ये सभी उपवर्ष समुद्रों से घिरे हुए हैं। इनमें से एक-एक का प्रमाण हजार योजन है।

Dasha Vahan Calculator

भारतवर्ष के कुल-पर्वत और अन्य पर्वत

भारत वर्ष में सात ‘कुल’ संज्ञक पर्वत हैं, जिनके नाम इस प्रकार हैं—

  1. महेन्द्र
  2. मलय
  3. सह्य
  4. शुक्तिमान्
  5. ऋक्षगिरि
  6. विन्ध्याचल
  7. पारियात्र

इनके अतिरिक्त बहुत-से छोटे-छोटे पर्वत हैं, जिनके नाम यों बताये जाते हैं– मन्दर, शारद, दर्दुर, कैलास, मैनाक, वैद्युत, वारन्धम, पाण्डुर, तुङ्गप्रस्थ, कृष्णगिरि, जयन्त, ऐरावत, ऋष्यमूक, गोमन्त, चित्रकूट, श्रीपर्वत, चकोरकुट, श्रीशैल और कृतस्थल। इनसे भी कुछ छोटे बहुत-से दूसरे पर्वत हैं, जिनमें आर्य तथा म्लेच्छ लोगोंके जनपद हैं।

Join Astrology Sutras WhatsApp Channel For All Updates

भारत वर्ष की प्रमुख नदियाँ और उनके उद्गम स्थल

भारतवासी जिन नदियों का जल पीते हैं वे हैं— गङ्गा, सिन्धु, सरस्वती, शतद्रु, वितस्ता, विपाशा, चन्द्रभागा, सरयू, यमुना, इरावती, देविका, कुहू, गोमती, धूतपापा, बाहुदा, दृषद्वती, कौशिकी, निश्चीरा, गण्डकी, इक्षुमती और लोहिता आदि। ये सभी नदियाँ हिमालयसे प्रादुर्भूत हुई हैं।

पर्वतों के अनुसार नदियों का वर्गीकरण:

‘परियात्र’ पर्वत से निकली हुई नदियाँ: वेदस्मृति, वेदवती, सिन्धु, पर्णाशा, चन्दनाभा, नर्मदा, सदानीरा, रोहिणीपारा, चर्मण्वती, विदिशा, वेत्रवती, शिप्रा, अवन्ती और कुन्ती।

ऋक्षमान् पर्वत से प्रकट हुई नदियाँ: शोण, ज्योतिरथा, नर्मदा, सुरसा, मन्दाकिनी, दशार्णा, चित्रकूटा, तमसा, पिप्पला, करतोया, पिशाचिका, चित्रोत्पला, विमला, विशाला, वञ्जुका, वालुवाहिनी, शुक्तिमती, विरजा, पङ्किनी और रात्री।

विन्ध्यपर्वत की उपत्यका से निकली हुई नदियाँ: मणिजाला, शुभा, तापी, पयोष्णी, निर्विन्ध्या, वेणा, पाशा, वैतरणी, वैदिपाला, कुमुद्वती, तोया, दुर्गा और अन्तःशिला।

सह्य-पर्वत से प्रकट हुई नदियाँ: गोदावरी, भीमरथी, कृष्णावेणी, वञ्जुला, तुङ्गभद्रा, सुप्रयोगा और बाह्यकावेरी।

मलय-गिरिसे निकली हुई नदियाँ: कृतमाला, ताम्रपर्णी, पुष्पावती और उत्पलावती।

महेन्द्र पर्वत से निकली हुई नदियाँ: त्रिसामा, ऋषिकुल्या, इक्षुला, त्रिदिवा, लाङ्गूलिनी और वंशधरा।

शुक्तिमान् पर्वत से प्रवाहित नदियाँ: ऋषिका, सुकुमारी, मन्दगामिनी, कृपा और पलाशनी।

Join Astrology Sutras WhatsApp Channel For All Updates

ये ही सब भारतके ‘कुल’ पर्वत और प्रधान नदियाँ मानी गयी हैं। इनके अतिरिक्त छोटी-छोटी बहुत-सी नदियाँ हैं। एक लाख योजनवाला यह समग्र भाग ‘जम्बूद्वीप’ कहलाता है।

जय श्री राम।