हनुमान जी की जन्म कुंडली का रहस्य: जानें किन ग्रहों ने बनाया उन्हें ‘अष्टसिद्धि और नवनिधि’ का दाता
हनुमान जी की जन्म कुंडली का रहस्य: जानें किन ग्रहों ने बनाया उन्हें ‘अष्टसिद्धि और नवनिधि’ का दाता
शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी का जन्म चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को सूर्योदय के समय हुआ था। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, उस समय ग्रहों की स्थिति इतनी प्रबल थी कि उसने एक ऐसे व्यक्तित्व को जन्म दिया जो काल को भी जीतने की शक्ति रखता है।
Astrology Sutras के इस विशेष शोधपरक लेख में आज हम बजरंगबली की ‘कथा’ नहीं, बल्कि उनकी ‘कुंडली’ के ज्योतिषीय सूत्रों का विश्लेषण करेंगे।
वाल्मीकि रामायण और अन्य ग्रंथों के अनुसार, हनुमान जी का जन्म ‘मेष लग्न’ और ‘चित्रा नक्षत्र’ में हुआ था। मेष लग्न का स्वामी मंगल है, जो साहस और पराक्रम का कारक है, यही कारण है कि हनुमान जी को ‘अतुलितबलधामं’ कहा गया है।
📊 हनुमान जी की कुंडली के 5 जादुई सूत्र
- 1. उच्च का मंगल (Exalted Mars): हनुमान जी की कुंडली में मंगल मकर राशि (उच्च) में स्थित है। मंगल का उच्च होना उन्हें असीमित ऊर्जा और युद्ध कौशल प्रदान करता है। इसी कारण वे ‘रणरंगधीरम्’ कहलाते हैं।
- 2. सूर्य का प्रभाव: सूर्य उनके गुरु हैं। कुंडली में सूर्य का केंद्र में होना उन्हें तेज, बुद्धि और विवेक प्रदान करता है। “विद्यावान गुनी अति चातुर” होने का मुख्य कारण सूर्य और बुध का शुभ योग है।
- 3. शनि की शुभ दृष्टि: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी की कुंडली में शनि देव अत्यंत शुभ स्थिति में थे। यही कारण है कि शनि देव ने स्वयं हनुमान जी को वचन दिया था कि उनके भक्तों पर शनि का कुप्रभाव नहीं पड़ेगा।
- 4. पंचग्रही योग: हनुमान जी की जन्म पत्रिका में सूर्य, मंगल, शनि, गुरु और शुक्र जैसे प्रमुख ग्रहों का बल इतना अधिक है कि यह केवल साक्षात रुद्रावतार की कुंडली में ही संभव है।
- 5. अष्टम भाव का बल (चिरंजीवी योग): हनुमान जी ‘अजर-अमर’ हैं। उनकी कुंडली का अष्टम भाव और राहु-केतु की विशिष्ट स्थिति उन्हें मृत्युंजयी और कालजयी बनाती है।
🔱 क्या कहती है उनकी ‘चित्रा नक्षत्र’ की शक्ति?
चित्रा नक्षत्र के स्वामी ‘त्वष्टा’ (देव शिल्पी विश्वकर्मा) हैं। यह नक्षत्र रचनात्मकता और अद्भुत निर्माण शक्ति प्रदान करता है। इसी नक्षत्र के प्रभाव से हनुमान जी ने न केवल लंका दहन किया, बल्कि समुद्र पर सेतु निर्माण में भी अपनी अलौकिक बुद्धि का परिचय दिया।
❓ हनुमान जी की कुंडली से जुड़े FAQ
Q 1. हनुमान जी का लग्न और राशि क्या है?
उत्तर: पराशर मत और ज्योतिषीय गणना के अनुसार हनुमान जी का मेष लग्न और तुला राशि (चित्रा नक्षत्र के प्रभाव से) मानी जाती है।
निष्कर्ष: हनुमान जी की कुंडली साक्षात शौर्य, बुद्धि और भक्ति का दस्तावेज है। उनकी कुंडली का विश्लेषण हमें सिखाता है कि कैसे ग्रहों की ऊर्जा को सेवा और समर्पण में बदलकर ‘महावीर’ बना जा सकता है।
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