फाल्गुन मास 2026: व्रत-त्योहारों की लिस्ट, महाशिवरात्रि और होली का ज्योतिषीय महत्व
फाल्गुन मास 2026: शिव-शक्ति के मिलन से लेकर रंगोत्सव तक, जानें ज्योतिषीय गणना और आध्यात्मिक महत्व
।। श्री गणेशाय नमः ।।
भारतीय काल-गणना में फाल्गुन मास केवल एक महीना नहीं, बल्कि चैतन्य और आनंद का वह संगम है जहाँ प्रकृति और पुरुष (शिव-शक्ति) एकाकार होते हैं। विक्रम संवत 2082 का यह अंतिम मास आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत ऊर्जावान रहने वाला है। एक ज्योतिषी के रूप में जब मैं इस मास की कुंडली और तिथियों का विश्लेषण करता हूँ, तो यह स्पष्ट है कि इस बार का फाल्गुन भक्तों के लिए विशेष सिद्धियों का द्वार खोलने वाला है।
🌟 फाल्गुन का ज्योतिषीय और आध्यात्मिक स्वरूप
2 फरवरी 2026 से फाल्गुन मास का शुभारंभ हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में फाल्गुन को ‘उत्साह का कारक’ माना गया है क्योंकि इसके स्वामी चंद्रमा हैं और इस मास की पूर्णिमा फाल्गुनी नक्षत्र में होती है। इस वर्ष यह मास पूरे 30 दिनों का है, जिसमें 26 विशेष योग और व्रत-पर्वों का अनूठा संयोग बन रहा है।
📅 फरवरी 2026 पंचांग:
फाल्गुन मास के अलावा फरवरी में और कौन से बड़े व्रत आ रहे हैं? पूरी लिस्ट यहाँ देखें:
🔱 महाशिवरात्रि: जब जागृत होती है शिव-तत्व की ऊर्जा
इस मास का सबसे प्रखर पर्व महाशिवरात्रि (15 फरवरी) है। ग्रहों की स्थिति बताती है कि इस दिन अर्धरात्रि में किया गया रुद्राभिषेक साधकों के जीवन से बड़े से बड़े कष्टों का निवारण करेगा। यह समय अपनी आंतरिक ऊर्जा को ऊर्ध्वगामी बनाने का है, क्योंकि इसी कालखंड में प्रकृति भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन की साक्षी बनती है।
🕉️ शिव भक्तों के लिए विशेष:
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📅 फाल्गुन मास 2026: मुख्य व्रत एवं पर्व तालिका
नीचे दी गई तालिका में ज्योतिषीय गणना अनुसार फाल्गुन मास के प्रमुख व्रतों और उनके आध्यात्मिक महत्व का विवरण दिया गया है:
| तिथि | व्रत एवं त्योहार | आध्यात्मिक महत्व |
|---|---|---|
| 05 फरवरी | संकष्टी चतुर्थी (चंद्रोदय: रात्रि 09:10 काशी) |
विघ्नहर्ता गणेश की कृपा प्राप्ति हेतु |
| 09 फरवरी | जानकी जयंती | सतीत्व और शक्ति की आराधना |
| 13 फरवरी | विजया एकादशी | शत्रुओं पर विजय और कार्य सिद्धि |
| 14 फरवरी | शनि प्रदोष | संतान सुख और शिव कृपा प्राप्ति |
| 15 फरवरी | महाशिवरात्रि | शिव-शक्ति मिलन, मोक्ष प्रदायक रात्रि |
| 17 फरवरी | भौमवती अमावस्या | पितृ दोष शांति एवं पवित्र स्नान का योग |
| 23 फरवरी | होलाष्टक आरंभ | मांगलिक कार्य वर्जित, तप हेतु उत्तम |
| 27 फरवरी | रंगभरी एकादशी | बाबा विश्वनाथ का गौना, काशी का दिव्य उत्सव |
| 02 मार्च | होलिका दहन | बुराई पर अच्छाई की विजय, अग्नि शुद्धि |
| 04 मार्च | धुलेंडी (होली) | पंच तत्वों का रंगों के साथ सामंजस्य |
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🕉️ काशी की परंपरा: रंगभरी एकादशी का रहस्य
ज्योतिष और लोक परंपराओं का अद्भुत संगम रंगभरी एकादशी (27 फरवरी) को देखने को मिलता है। हमारे शास्त्र कहते हैं कि इसी दिन महादेव माता गौरा का गौना करवाकर प्रथम बार काशी आए थे। काशी के विद्वानों के अनुसार, यह दिन वैवाहिक जीवन में मधुरता लाने के लिए सबसे उत्तम है। यदि आपके वैवाहिक जीवन में तनाव है, तो इस दिन शिव-पार्वती को अबीर-गुलाल अर्पित करना अत्यंत शुभ फलदायी होगा।
🌓 विशेष ज्योतिषीय परामर्श: चंद्रग्रहण का प्रभाव
इस वर्ष 25 मार्च (फाल्गुन पूर्णिमा) को चंद्रग्रहण का योग बन रहा है। यद्यपि इसका प्रभाव होली के उत्सव पर सूक्ष्म रूप से होगा, परंतु साधकों को ध्यान रखना चाहिए कि होलिका दहन के समय भद्रा और ग्रहण के सूतक काल का विचार अवश्य करें। शास्त्र सम्मत मुहूर्त में ही पूजन करना श्रेयस्कर होता है।






