विक्रम संवत २०७८ में वर्षा होने के योग

विक्रम संवत 2078 में वर्षा विचार जानें आनंद संवत्सर में कब होगी वर्षा

विक्रम संवत 2078 में वर्षा विचार जानें आनंद संवत्सर में कब होगी वर्षा

 

विक्रम संवत २०७८ में वर्षा होने के योग
विक्रम संवत २०७८ में वर्षा होने के योग

 

आर्द्राप्रवेशाङ्ग के विचार से वर्षा मध्यम है, चक्रवात व तूफान का प्रकोप रहेगा, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा उत्तम, पूर्वी भाग में सामान्य वर्षा, देश के पश्चिम व मध्य भाग में वर्षा की कमी होगी, दक्षिण भाग में वायु का प्रकोप होगा, जल संकट संभव है।

 

शारदधानयोत्तपत्ति के विचार से उत्पादन संतोषप्रद रहेगा, फसलों के मूल्य सामान्य रहेंगे, पूर्वोत्तर तथा दक्षिण पश्चिम कृषि को क्षति होगी, ग्रैष्मिकधानयोत्तपत्ति के विचार से रवी की फसल का उत्पादन उत्तम रहेगा, फसलों को रोगादि का भय होगा, दक्षिण भाग में कृषि को क्षति होगी, फसलों के मूल्यों में वृद्धि होगी।

 

वर्षा विज्ञान:-

 

वर्षा विज्ञान
वर्षा विज्ञान

 

सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में जिस दिन वर्षा होवे उसके ऊपर लिखे दिन तक जलवृष्टि उत्तम ढंग से न होगी।

 

उदाहरण:-

 

यदि रोहिणी नक्षत्र का सूर्य आने के पाँचवें दिन वर्षा हो गयी तो ३१ दिन तक सुंदर ढंग से जल वृष्टि न हो सकेगी, जिस दिशा से बादल रोहिणी नक्षत्र में आते हुए दृष्टिगोचर होगा उसी दिन में जलवृष्टि की आगे न्यूनता रहेगी।

 

वर्षा विचार:-

 

आर्द्रा (२२ जून दिन १/५१ पर)

 

आर्द्रा का केवल तृतीय चरण निर्जल है शेष सभी चरण सजल है अतः तारीख २२ से २८ जून व तारीख ३ से ५ जुलाई तक वर्षा होगी।

 

पुनर्वसु (६ जुलाई दिन ३/३२ पर)

 

पुनर्वसु नक्षत्र का तृतीय व चतुर्थ चरण निर्जल है और प्रथम व द्वितीय चरण सजल है अतः तारीख ६ से १२ जुलाई तक वर्षा होगी।

 

पुष्य (तारीख २० जुलाई सायं ५/० पर)

 

पुष्य नक्षत्र का केवल द्वितीय चरण सजल है शेष सभी चरण निर्जल है अतः तारीख २२ से २६ जुलाई तक वर्षा होगी।

 

आश्लेषा (तारीख ३ अगस्त सायं ५/२४ पर)

 

आश्लेषा नक्षत्र का केवल द्वितीय चरण सजल है शेष सभी चरण निर्जल है अतः तारीख ६ से ११ अगस्त तक वर्षा होगी।

 

मघा (तारीख १७ अगस्त सायं ४/०८ पर)

 

मघा नक्षत्र का केवल द्वितीय चरण सजल है शेष सभी चरण निर्जल है अतः तारीख २० से २३ अगस्त तक वर्षा होगी।

 

पूर्वाफाल्गुनी (तारीख ३१ अगस्त दिन १२/३२ पर)

 

पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का प्रथम व द्वितीय चरण सजल है शेष तृतीय व चतुर्थ चरण निर्जल है अतः तारीख ३१ अगस्त से ६ सितंबर व तारीख ७ से १० सितंबर तक वर्षा होगी।

 

उत्तराफाल्गुनी (तारीख १४ सितंबर प्रातः ६/२३ पर)

 

उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का केवल तृतीय चरण सजल व शेष चरण निर्जल है अतः तारीख २१ से २४ सितंबर तक आँधी-तूफान व उमस के साथ वर्षा होगी।

 

हस्त (तारीख २७ सितंबर रात्रि ९/३२ पर)

 

हस्त नक्षत्र का तृतीय व चतुर्थ चरण सजल व शेष प्रथम व द्वितीय चरण निर्जल है अतः तारीख ५ से १० अक्टूबर तक वायु के साथ अच्छी वर्षा होगी।

 

चित्रा (तारीख ११ अक्टूबर दिन ९/५४ पर)

 

चित्रा नक्षत्र का प्रथम व द्वितीय चरण सजल व शेष तृतीय व चतुर्थ चरण निर्जल है अतः तारीख ११ से १७ व २३ अक्टूबर को वर्षा होगी।

 

स्वाती (तारीख २४ अक्टूबर रात्रि ०७/३३ पर)

 

स्वाती नक्षत्र का तृतीय व चतुर्थ चरण सजल व शेष प्रथम व द्वितीय चरण निर्जल है अतः तारीख १ से ६ नवंबर तक अच्छी वर्षा होगी।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

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